देश में TET की अनिवार्यता से 30 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में, मानसून सत्र में सांसदों का घेराव

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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

▪️अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य किए जाने के विरोध में आगामी मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में सांसदों के आवास पर 'घेरा डालो-डेरा डालो' आंदोलन की घोषणा की है।
▪️यह निर्णय पटना के नूरुद्दीनगंज मध्य विद्यालय में आयोजित बैठक में लिया गया; विरोध प्रदर्शन नई दिल्ली में मानसून सत्र के दौरान होगा।
▪️देश भर के लगभग 25 से 30 लाख शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे, जिनकी सेवा 5 वर्ष से अधिक बची है।
▪️सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार TET पास न करने पर 25-30 वर्षों से पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों की नौकरी जा सकती है और उनकी प्रोन्नति रोक दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन का ऐलान किया; पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत देने के लिए कानून में संशोधन की मांग।

​सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय शेष रहने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य किए जाने से देश भर के करीब 30 लाख प्रारंभिक शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। इस फैसले के विरोध में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ (AIPTS) ने आगामी मानसून सत्र में नई दिल्ली में सांसदों के आवास का घेराव करने का निर्णय लिया है।

​पटना में शिक्षक संघ की आपात बैठक

​इस गंभीर संकट पर रणनीति तय करने के लिए पटना के मालसलामी अंचल के शिक्षकों की शनिवार को नूरुद्दीनगंज मध्य विद्यालय में एक अहम बैठक हुई। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उन शिक्षकों के भविष्य पर गहरी चिंता व्यक्त की गई, जो दशकों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं।

​सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

​शिक्षक संघ ने इस अनिवार्यता को सीधे तौर पर सरकार की विफलता बताया है। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार ने कहा, “25-30 वर्षों से शिक्षक पद पर योगदान देकर शिक्षण का कार्य कर रहे शिक्षकों को टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य करना सरकार की गलत नीतियों का परिणाम है।”

​उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी अन्य पद या कैडर में सेवा के बीच में दक्षता या पात्रता से संबंधित परीक्षा लेने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके खिलाफ अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ लगातार संघर्षरत है।

​RTE एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का प्रभाव

​अधिसूचना के अनुसार, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 लागू होने के बाद, राष्ट्रीय शैक्षिक परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को प्रावधान किया था कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, संघ का दावा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (संशोधित), 2017 में इसे दरकिनार कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक बची है, उन्हें नौकरी बचाने और प्रोन्नति पाने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना ही होगा। इससे देश भर के लगभग 25 से 30 लाख शिक्षकों की सेवा खतरे में पड़ गई है।

​दिल्ली में ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन

​शिक्षकों को इस संकट से मुक्त कराने के लिए संघ ने संपूर्ण देश में आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत आगामी मानसून सत्र में देश के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा सदस्यों के दिल्ली स्थित आवासों पर ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ कार्यक्रम चलाया जाएगा। शिक्षकों की मांग है कि संसद में नया संशोधन विधेयक लाकर 2017 के संशोधित अधिनियम में बदलाव किया जाए, ताकि पुराने शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्ति मिल सके।

​बैठक में यह भी तय किया गया कि पटना साहिब के स्थानीय सांसद से एक प्रतिनिधिमंडल मिलकर सुधार का अनुरोध करेगा। इसके अतिरिक्त, सचिव सत्यलाल सिंह के संचालन में हुई इस बैठक में बिना सरकारी आदेश के पटना जिले के शिक्षकों की रोकी गई प्रोन्नति, प्रशिक्षण से विरमण की तिथि से प्रशिक्षित का वेतनमान और बकायों के भुगतान जैसे अहम मुद्दों पर भी जिला शिक्षा पदाधिकारी से मिलकर हस्तक्षेप की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया।

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar

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