​बिहार शिक्षक स्थानांतरण नीति तैयार: ऐच्छिक तबादले के लिए मिलेंगे 30 विकल्प, जुलाई में प्रक्रिया होगी पूरी

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▪️बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूल शिक्षकों के लिए डिजिटल स्थानांतरण एवं रेशनलाइजेशन नीति तैयार की है, जिसमें ऐच्छिक तबादलों के लिए 30 विकल्प दिए जाएंगे।
▪️BPSC TRE-1, 2, 3 समेत सक्षमता परीक्षा पास विशिष्ट शिक्षक व प्रधानाध्यापको को मिलेगा मौका।
▪️जुलाई 2026 तक पूरी प्रक्रिया समाप्त करने का लक्ष्य, शिक्षा विभाग (बिहार)।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद शुरू होगा राज्य का सबसे बड़ा डिजिटल ट्रांसफर अभियान; पहली बार मेरिट और रेशनलाइजेशन को बनाया गया पोस्टिंग का आधार।

​बिहार सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत लाखों शिक्षकों के लिए अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल स्थानांतरण और रेशनलाइजेशन (नियमितीकरण) अभियान शुरू करने जा रही है। इस नई नीति के तहत शिक्षकों को ऐच्छिक तबादले के लिए कुल 30 विकल्प दिए जाएंगे और शिक्षा विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को जुलाई में हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

​जैसा कि उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आ रहा है, राज्य सरकार ने स्थानांतरण नीति को अंतिम रूप दे दिया है और आगामी कैबिनेट बैठक में इस पर आधिकारिक मुहर लगने की पूरी संभावना है।

​कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार, शिक्षा मंत्री ने दी नीति की जानकारी

​बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस नई स्थानांतरण नीति की पुष्टि करते हुए कहा:

​”तबादला नीति तैयार है। हम चाहते हैं कि शिक्षक बगैर किसी तनाव के रहें ताकि अध्यापन कार्यों को बेहतर ढंग से निष्पादित कर सकें। वे बच्चों को अच्छे से पढ़ाएं, हमारा यही लक्ष्य है।”

​शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई को बाधित होने से बचाना और छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को संतुलित करना है। कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही इस नीति के आधार पर तेजी से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।

​पहली बार मेरिट और रेशनलाइजेशन बनेगा पोस्टिंग का आधार

​इस बार का स्थानांतरण अभियान केवल स्कूलों को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ व्यापक स्तर पर ‘रेशनलाइजेशन’ (Rationalization) भी लागू किया जा रहा है। जैसा कि मीडिया रिपोर्टों से स्पष्ट किया जा रहा है, जिन स्कूलों में निर्धारित संख्या से अधिक शिक्षक हैं, उन्हें ‘सरप्लस’ (Surplus) माना जाएगा। यदि किसी स्कूल में तय संख्या से अधिक आवेदन आते हैं, तो पहली बार मेरिट लिस्ट को ट्रांसफर और पोस्टिंग का मुख्य आधार बनाया जाएगा।

शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे ​दस्तावेजों के अनुसार, प्राथमिक विद्यालयों के लिए संभावित मानक इस प्रकार तय किए गए हैं:

  • ​30 छात्र = 1 शिक्षक
  • ​60 छात्र = 2 शिक्षक
  • ​90 छात्र = 3 शिक्षक
  • ​120 छात्र = 4 शिक्षक
  • ​150 से अधिक छात्र होने पर एक अतिरिक्त शिक्षक और प्रधान शिक्षक के पद की व्यवस्था होगी।

​सॉफ्टवेयर के माध्यम से शिक्षकों की सेवा अवधि और जॉइनिंग रिकॉर्ड का विश्लेषण करके सरप्लस शिक्षकों की पहचान की जाएगी। जो शिक्षक स्कूल में सबसे बाद में नियुक्त हुए हैं, उन्हें पहले सरप्लस श्रेणी में रखा जाएगा।

​कौन-कौन से शिक्षक होंगे शामिल और क्या हैं चॉइस फिलिंग के नियम?

​शिक्षा विभाग और मीडिया रिपोर्ट की माने तो, इस स्थानांतरण प्रक्रिया में निम्नलिखित श्रेणियों को शामिल किया जा रहा है:

  • ​BPSC TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के तहत नियुक्त शिक्षक
  • ​सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण विशिष्ट शिक्षक
  • ​प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक
  • ​पुस्तकालयाध्यक्ष

चॉइस फिलिंग की शर्तें: ऑनलाइन आवेदन के दौरान शिक्षकों को पोर्टल पर केवल उन्हीं स्कूलों की सीटें दिखाई देंगी जहां वास्तव में शिक्षकों की कमी है। जिन स्कूलों में पहले से पर्याप्त या अधिक शिक्षक हैं, वे सीटें सॉफ्टवेयर में लॉक या ब्लॉक रहेंगी। इसका सीधा मतलब है कि शिक्षक अपनी मर्जी से किसी भी स्कूल का चयन नहीं कर पाएंगे। यदि कोई सरप्लस शिक्षक स्थानांतरण के लिए फॉर्म नहीं भरता है, तो उसे अनिवार्य रूप से किसी भी जरूरतमंद विद्यालय में समायोजित (Adjust) कर दिया जाएगा और उसके पुराने स्कूल में बने रहने की कोई गारंटी नहीं होगी।

​महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार और ग्रामीण सेवा करने वालों को विशेष राहत

​नीति के तहत अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं, जिनका विवरण कुछ इस प्रकार दिया जा रहा है:

  • महिला शिक्षक: महिला शिक्षकों को उनके गृह पंचायत या पड़ोसी पंचायत में पोस्टिंग की प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही विधवा, परित्यक्ता और अकेली महिला शिक्षकों को विशेष वरीयता श्रेणी में रखा गया है।
  • पुरुष शिक्षक: पुरुष शिक्षकों को उनके गृह ब्लॉक (प्रखंड) के बाहर निकटवर्ती अथवा पड़ोसी ब्लॉक में पदस्थापित करने पर विचार किया जाएगा।
  • बीमार और दिव्यांग शिक्षक: गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों को उनके घर के निकट ही पदस्थापन का लाभ मिलेगा, बशर्ते उनके प्रमाणपत्रों की कड़ाई से जांच की जाएगी। दिव्यांग शिक्षकों और पति-पत्नी श्रेणी (साथ में पोस्टिंग) को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
  • ग्रामीण सेवा: दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक सेवा देने वाले शिक्षकों को ट्रांसफर के समय अतिरिक्त वरीयता अंक (Weightage) दिए जाएंगे।
  • इंटर-जिला ट्रांसफर: अंतर-जिला ट्रांसफर का विकल्प उपलब्ध होगा, जिसके लिए एक से अधिक जिलों का चयन किया जा सकता है। हालांकि, स्वैच्छिक अंतर-जिला ट्रांसफर लेने पर नए जिले में वरिष्ठता (Seniority) प्रभावित हो सकती है और शिक्षक वहां सबसे जूनियर हो सकते हैं।

​इसके अतिरिक्त, प्राथमिक कक्षाओं में कार्यरत B.Ed डिग्री धारक शिक्षकों को उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर मध्य अथवा उच्च विद्यालयों में समायोजित करने की कवायद भी इस नीति का हिस्सा है।

​पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया, इन मामलों पर रहेगी रोक

​शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया पारदर्शी और पेपरलेस होगी। इसके लिए ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल पर मोबाइल सत्यापन के जरिए डेटा अपडेट करना अनिवार्य है। अपूर्ण या त्रुटिपूर्ण डेटा वाले शिक्षकों को आवेदन में कठिनाई हो सकती है। ऑनलाइन आवेदन से लेकर डिजिटल आवंटन, ऑनलाइन रीलीविंग और ऑनलाइन जॉइनिंग तक के सभी चरण डिजिटल होंगे।

​हालांकि, जिन शिक्षकों के खिलाफ कोई विभागीय जांच, वित्तीय अनियमितता, या अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, उन्हें इस स्थानांतरण प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा जा सकता है।

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar

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