देश में 17,141 सरकारी स्कूल घटे, 12वीं से पहले 45% छात्राएं छोड़ रहीं पढ़ाई

updateUpdated: July 28, 2026 at 7:36 pm schedule 2 min read
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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

◾️5 साल में 17,141 सरकारी स्कूल घटे; 12वीं से पहले 45% लड़कियों ने पढ़ाई छोड़ी।
◾️2021-22 से 2025-26 के अखिल भारतीय आंकड़े; मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में लड़कियों की स्थिति सबसे खराब।
◾️सरकारी स्कूलों की संख्या 10,22,386 से घटकर 10,05,245 हुई। 12वीं तक छात्राओं का रिटेंशन रेट मात्र 55% है।
◾️ये आंकड़े समग्र शिक्षा जैसी योजनाओं के बावजूद, छात्राओं और SC/ST समुदायों के लिए शिक्षा प्रणाली में मौजूद गंभीर कमियों को उजागर करते हैं।
◾️सरकार 'समग्र शिक्षा योजना' के तहत बुनियादी ढांचे, मुफ्त किताबों और परिवहन के लिए राज्यों को वित्तीय मदद जारी रखेगी।

​संसद में पेश शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, स्कूलों की संख्या में गिरावट जारी है और लड़कियों का ड्रॉपआउट रेट चिंताजनक स्तर पर है।

​ठीक 17,141। यह उन सरकारी स्कूलों की संख्या है, जो पिछले पांच वर्षों के भीतर देश के शिक्षा मानचित्र से गायब हो गए हैं। लोकसभा में हाल ही में पेश किए गए शिक्षा मंत्रालय के आंकड़े न केवल स्कूलों की घटती संख्या को सामने लाए हैं, बल्कि एक और गंभीर सच्चाई को भी उजागर करते हैं—देश में हर दूसरी छात्रा 12वीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही स्कूल छोड़ रही है।

​आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2021-22 में भारत में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या 10,22,386 थी। साल 2025-26 आते-आते यह आंकड़ा घटकर 10,05,245 रह गया है।

​रिपोर्ट में स्कूलों के बंद होने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। हालांकि, इस बुनियादी ढांचे की कमी का सीधा असर माध्यमिक शिक्षा पर पड़ रहा है।

​लड़कियों का Retention Rate केवल 55%

​सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति छात्राओं की शिक्षा को लेकर है। 2025-26 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 12वीं कक्षा तक पहुंचने वाली लड़कियों की हिस्सेदारी (Retention Rate) मात्र 55% दर्ज की गई।

​यानी, प्राथमिक या माध्यमिक स्तर पर दाखिला लेने वाली 100 लड़कियों में से केवल 55 ही अपनी स्कूली शिक्षा 12वीं तक जारी रख पाती हैं। शेष 45 लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं। राष्ट्रीय औसत के मुकाबले पूर्वोत्तर के राज्यों की जमीनी हकीकत ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों में 12वीं तक पहुंचने वाली छात्राओं की संख्या राष्ट्रीय औसत से भी काफी कम है।

​SC-ST छात्रों का Gross Enrolment Ratio (GER)

​9वीं से 12वीं कक्षा की पढ़ाई में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के बच्चों की पहुंच अभी भी राष्ट्रीय लक्ष्यों से दूर है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी 2025-26 के सकल नामांकन अनुपात (GER) प्रतिशत इस प्रकार हैं:

  • कक्षा 9-12 (SC): 75.2% (2024-25 में यह 70.8% था)
  • कक्षा 9-12 (ST): 71.0% (2024-25 में 66.9% था)

​छोटी कक्षाओं (कक्षा 3 से 8) में GER 94% से 100% के बीच है, लेकिन 9वीं के बाद इसमें भारी गिरावट आती है। सरकार का कहना है कि स्थिति को सुधारने के लिए ‘समग्र शिक्षा योजना’ के तहत राज्यों को स्कूलों के बुनियादी ढांचे, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और परिवहन सुविधा जैसी शैक्षणिक सहायता के लिए वित्तीय मदद दी जा रही है।

Siddharth

verifiedManager and Content Writer

Expertise: B.Tech and MBA in IT

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