बजट पर महंगाई की मार: आटा-दाल से लेकर तेल-मसालों के दामों में भारी बढ़ोतरी

updateUpdated: August 7, 2026 at 1:11 pm schedule 4 min read
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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

◾️आटा, दाल, तेल और FMCG उत्पादों के दाम तेजी से बढ़ने के कारण मासिक घरेलू बजट ₹5,000 तक बढ़ गया है।
◾️फरवरी से अब तक सरसों का तेल ₹170 से ₹190 प्रति लीटर और चीनी ₹40 से ₹54 प्रति किलो हो गई है।
◾️मध्य-पूर्व का तनाव, कमजोर मानसून और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत से लोगों की बचत घट रही है। RBI के 14,500+ परिवारों के सर्वे में भी महंगाई और रोजगार को लेकर गहरी चिंता दिखी है।
◾️खाद्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि जब तक फसल की पैदावार और आयात (अमेरिका और मध्य-पूर्व से) की स्थिति नहीं सुधरती, तब तक दालों, तिलहन और ड्राई फ्रूट्स की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।

मध्य-पूर्व के तनाव और कमजोर मानसून के कारण रसोई का खर्च ₹5,000 तक बढ़ा, आरबीआई सर्वे में भी दिखी रोजगार-महंगाई की चिंता।

​शाहदरा की रहने वाली वंदना शर्मा के लिए पिछले छह महीनों में रसोई का खर्च 5,000 रुपये तक बढ़ गया है, जिससे उन्हें खाद्य तेल जैसी जरूरी चीजों की खपत में कटौती करनी पड़ी है। रोहिणी के विनीत की स्थिति भी अलग नहीं है; बढ़ती महंगाई ने उनकी मासिक बचत पूरी तरह खत्म कर दी है, और अब कार के ईंधन से लेकर दवाओं तक का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है।

​ये केवल दो परिवारों की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे देश में आम आदमी के रसोई बजट की जमीनी हकीकत है। आटा, दाल, चावल और तेल-मसालों के साथ-साथ रोजमर्रा के एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों की कीमतों में भारी उछाल आया है। फरवरी की तुलना में वर्तमान में सरसों तेल 170 रुपये से बढ़कर 190 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि 100 ग्राम मसालों के दाम 100 रुपये से छलांग लगाकर 130 रुपये पर पहुंच गए हैं।

​थोक व्यापारियों के अनुसार, इस कमरतोड़ महंगाई के पीछे केवल घरेलू कारण नहीं हैं। लक्ष्मी नगर के किराना कारोबारी अभिषेक जैन बताते हैं कि मध्य-पूर्व में बीते दिनों तनाव कम होने पर कीमतों में मामूली कमी आई थी। “लेकिन तनाव दोबारा बढ़ने के बाद कीमतें फिर बढ़ी हैं,” जैन ने स्पष्ट किया। पेट्रोकेमिकल उत्पाद और पैकेजिंग सामग्री पर निर्भरता के कारण आयातित कच्चे माल की लागत बढ़ गई है, जिससे एफएमसीजी कंपनियों ने भी त्योहारी सीजन से पहले दाम बढ़ा दिए हैं।

​कमजोर मानसून और अंतरराष्ट्रीय दबाव

​कृषि उत्पादों की कीमतों पर मौसम और लॉजिस्टिक्स का सीधा असर दिख रहा है। खाद्य उत्पाद बाजार विशेषज्ञ और थोक व्यापारी अशोक गुप्ता के मुताबिक, अगर मानसून कमजोर रहता है तो दालों, मसालों और ऑयल सीड (तिलहन) की आगामी फसलें भी प्रभावित होंगी। भविष्य में अधिक मुनाफे की उम्मीद में किसानों ने अपनी फसलों का स्टॉक रोक लिया है, जिससे आपूर्ति बाधित हुई है। इसके अतिरिक्त, अफगानिस्तान, ईरान और अमेरिका से आयात में सुधार न होने तक ड्राईफ्रूट्स की कीमतों में भी तेजी बने रहने की आशंका है।

​परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में तेजी ने रोजमर्रा के सामान को महंगा कर दिया है। कीमतों में आए उछाल की तस्वीर इस प्रकार है:

  • आटा (Atta): 30 रुपये से बढ़कर 35 रुपये प्रति किलो हो गया है।
  • चावल (Rice): 50-100 रुपये से बढ़कर 60-120 रुपये की रेंज में आ गया है।
  • दालें (Pulses): 100-130 रुपये की तुलना में अब 110-150 रुपये में बिक रही हैं।
  • चीनी (Sugar): कीमत 40 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति किलो हो गई है।
  • साबुन और टूथपेस्ट (FMCG): 125 ग्राम का साबुन 40 रुपये से 42 रुपये और 200 ग्राम का टूथपेस्ट 125 रुपये से 132 रुपये का हो गया है। [VERIFY: FMCG brands involved]

​आरबीआई (RBI) सर्वे: महंगाई और रोजगार की चिंता

​राष्ट्रीय स्तर पर भी इस आर्थिक दबाव की साफ तौर पर पुष्टि होती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में किए गए हालिया उपभोक्ता सर्वेक्षण के अनुसार, आम जनता के लिए महंगाई इस वक्त सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। देश के 19 बड़े शहरों के 5,987 और ग्रामीण व अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों के 8,581 परिवारों पर किए गए इस सर्वे में नौकरियों की उपलब्धता और देश की सामान्य आर्थिक स्थिति को लेकर नकारात्मकता दर्ज की गई है। अधिकांश शहरी और ग्रामीण उत्तरदाताओं का मानना है कि आने वाले एक वर्ष में भी मूल्य वृद्धि का यह दबाव बरकरार रह सकता है, और ग्रामीण क्षेत्रों में आय में गिरावट महसूस करने वाले परिवारों की संख्या में वृद्धि हुई है।

​हालांकि, इस निराशा के बीच एक राहत की बात भी है। आरबीआई सर्वे यह भी बताता है कि आवश्यक वस्तुओं पर लोगों का खर्च बढ़ा है, और गैर-जरूरी वस्तुओं पर भी खर्च करने की इच्छा पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत देता है कि आर्थिक चिंताओं के बावजूद उपभोक्ता खर्च पूरी तरह से कमजोर नहीं पड़ा है और लोग भविष्य में अपनी आय बढ़ने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

Siddharth

verifiedManager and Content Writer

Expertise: B.Tech and MBA in IT

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