auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने देश भर के सभी अधिसूचित स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में वाहनों की अधिकतम गति सीमा 25 किमी/घंटा तय की है और उल्लंघन पर सामान्य से 10 गुना जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है।
◾️सितंबर 2026 से पूरे भारत के अधिसूचित स्कूल क्षेत्र जैसे बिहार के समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर सहित सभी जिलों में सुझाव प्रक्रिया जारी।
◾️25 किमी/घंटा गति सीमा, 10 गुना जुर्माना, 50 किमी/घंटा पर टक्कर में बचने की संभावना 20% से कम, जबकि 30 किमी/घंटा पर 80% से अधिक।
◾️5 से 14 वर्ष के बच्चों में सड़क दुर्घटनाएं मौत की सबसे बड़ी वजह हैं; गति सीमित होने से बच्चों की जान जोखिम में पड़ने से बचेगी।
◾️राज्य सरकारें जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों से सुझाव संकलित कर समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी, जिसके बाद नियमावली पूरी तरह लागू होगी।

सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने जारी किया कड़ा निर्देश; स्कूल गेट से 20 मीटर दूर पिकअप-ड्रॉप वे और जेब्रा क्रॉसिंग अनिवार्य।
देश भर के सभी अधिसूचित स्कूल क्षेत्रों में अब कोई भी वाहन 25 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से नहीं निकल सकेगा। सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति ने स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में इस गति सीमा को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है। तय सीमा से तेज गाड़ी चलाने वाले चालकों पर सामान्य से 10 गुना अधिक जुर्माना ठोका जाएगा।
सड़क हादसों में हर रोज एक पूरी क्लास के बराबर मासूमों की जान जा रही है। इसी भयावह हकीकत को देखते हुए शीर्ष अदालत की समिति ने यह कदम उठाया है।
समिति के अंतरिम सचिव आर.के. जैन द्वारा जारी तकनीकी नोट में स्पष्ट किया गया है कि 5 से 14 वर्ष के बच्चों में असमय मौत का सबसे बड़ा कारण सड़क दुर्घटनाएं हैं। नोट के अनुसार बच्चों की शारीरिक और मानसिक समझ वयस्कों जैसी परिपक्व नहीं होती। वे सड़क पार करते समय सामने से आ रहे वाहन की सटीक दूरी और उसकी गति का सही अनुमान नहीं लगा पाते।
रफ्तार घटते ही 80 फीसदी तक बढ़ जाता है जीवन
वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि गाड़ी की गति और बच्चे के जीवन रक्षा के बीच सीधा संबंध है। यदि कोई वाहन 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से किसी बच्चे से टकराता है, तो उसके जीवित बचने की संभावना 20 फीसदी से भी कम रह जाती है।
इसके उलट, अगर गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे कम हो, तो बच्चे के सुरक्षित बच निकलने की संभावना बढ़कर 80 फीसदी से ज्यादा हो जाती है।
स्कूल जोन में अनिवार्य होंगे ये 7 सुरक्षा मानक
आदेश के तहत सिर्फ गति नियंत्रित करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि स्कूल क्षेत्रों के भौतिक बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह बदलना होगा। प्रत्येक अधिसूचित स्कूल के आसपास निम्नलिखित मानकों का निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है:
- स्कूल के 100 मीटर दायरे में वैज्ञानिक रूप से निर्मित स्पीड ब्रेकर।
- चालकों को सचेत करने वाले चमकीले ‘स्कूल जोन अहेड’ संकेतक बोर्ड।
- स्पष्ट दृश्यता वाली जेब्रा क्रॉसिंग और स्लो/स्कूल पेवमेंट मार्किंग।
- विद्यार्थियों के पैदल चलने के लिए कम से कम दो मीटर चौड़े सुरक्षित फुटपाथ।
- दिव्यांग बच्चों की सुगम आवाजाही के लिए टैक्टाइल पेविंग और मानक ढलान वाले रैंप।
- मुख्य स्कूल गेट के ठीक बाहर वाहनों के जमावड़े को रोकने के लिए गेट से न्यूनतम 20 मीटर की दूरी पर वाहन पिकअप व ड्रॉप वे।
राज्यों में कवायद तेज, बिहार ने मांगे सुझाव
सुप्रीम कोर्ट समिति के इस रुख के बाद राज्य स्तर पर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को पत्र भेजकर स्कूल सुरक्षा क्षेत्रों के संबंध में विस्तृत राय मांगी है।
जमीनी स्तर से आने वाले सभी सुझावों को संकलित कर राज्य सरकार अपना एकीकृत मंतव्य सुप्रीम कोर्ट की समिति को सौंपेगी, ताकि नियमों के व्यावहारिक क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो सके। संबंधित गजट अधिसूचना के औपचारिक प्रकाशन की तारीख जल्द स्पष्ट की जाएगी।