पटना के 423 सरकारी स्कूलों में 10वीं का 50% प्रैक्टिकल अधूरा, जनवरी में परीक्षा

updateUpdated: October 25, 2026 at 8:11 am schedule 9 min read
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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

◾️पटना जिले के 423 सरकारी हाईस्कूलों में 10वीं बोर्ड परीक्षा के विज्ञान प्रैक्टिकल का 50% से भी कम सिलेबस पूरा हुआ है; 249 विद्यालयों ने समीक्षा रिपोर्ट तक जमा नहीं की है।
◾️अक्टूबर 2026 में समीक्षा बैठक के दौरान खुलासा; प्रैक्टिकल परीक्षा जनवरी 2027/2026 में निर्धारित; पटना जिला, बिहार।
◾️कुल 423 में से केवल 174 स्कूलों ने रिपोर्ट दी, 249 डिफॉल्टर; 20 अंकों के वेटेज वाले 11 प्रयोग और 6 प्रोजेक्ट कार्य पेंडिंग; 74 क्रियाशील आईसीटी लैब्स।
◾️10वीं बोर्ड परीक्षा के 20 अंकों के आंतरिक मूल्यांकन पर सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है, जिससे छात्रों के अंतिम परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
◾️शिक्षा विभाग ने सभी डिफॉल्टर स्कूलों को चालू माह के अंत तक अनिवार्य रिपोर्ट देने, आईसीटी लैब के खराब कंप्यूटर बदलने और नोटकैम उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दिया है।

​शिक्षा विभाग ने 249 लापरवाह स्कूलों से मांगी रिपोर्ट, आईसीटी लैब के खराब कंप्यूटर बदलने और नोटकैम निगरानी का सख्त आदेश।

​महज 50 फीसदी—जनवरी में होने वाली 10वीं मैट्रिक बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले पटना जिले के 423 सरकारी हाईस्कूलों में विज्ञान प्रैक्टिकल की यही जमीनी हकीकत है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की मुख्य परीक्षा सिर पर है, लेकिन जिले की प्रयोगशालाओं में उपकरण धूल फांक रहे हैं और सिलेबस का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं कराया जा सका है।

​जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) की हालिया आंतरिक समीक्षा में जब यह रिपोर्ट सामने आई, तो विभाग में हड़कंप मच गया। 10वीं बोर्ड में विज्ञान विषय के कुल 100 अंकों में से 20 अंक पूरी तरह आंतरिक मूल्यांकन और प्रायोगिक परीक्षा (प्रैक्टिकल) पर निर्भर करते हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन 11 अनिवार्य प्रयोगों और 6 प्रोजेक्ट फाइलों को बीते जून और जुलाई के महीनों में ही पूरा करा लिया जाना चाहिए था, वे अक्टूबर बीतने के बावजूद फाइलों और रफ कॉपियों में अटके पड़े हैं।

​इस लापरवाही ने न केवल सरकारी स्कूलों की अकादमिक गंभीरता की पोल खोल दी है, बल्कि बोर्ड परीक्षा में बैठने जा रहे हजारों छात्र-छात्राओं के अंकों पर भी सीधे सवालिया निशान लगा दिया है।

​20 अंकों का गणित: 11 प्रयोग और 6 प्रोजेक्ट फाइलों में उलझे छात्र

​मैट्रिक बोर्ड परीक्षा में विज्ञान के अंक विभाजन को समझें तो प्रैक्टिकल कोई औपचारिकता भर नहीं है। 80 अंकों की सैद्धांतिक (थ्योरी) परीक्षा के साथ 20 अंकों का प्रैक्टिकल छात्रों के अंतिम परिणाम, डिविजन और मेरिट लिस्ट में निर्णायक भूमिका निभाता है। विभागीय नियमावली के अनुसार, 20 अंकों के इस आंतरिक मूल्यांकन को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा जाता है:

  1. ​प्रयोग प्रदर्शन (Experiments): 11 अंक
  2. ​प्रोजेक्ट फाइल और रिकॉर्ड (Project File): 6 अंक
  3. ​मौखिकी परीक्षा (Viva-Voce): 3 अंक

​शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, सत्र शुरू होने के साथ ही प्रयोगशालाओं में शिक्षकों को निर्धारित प्रयोग कराने होते हैं। छात्रों को प्रयोगों के नतीजे अपनी प्रैक्टिकल नोटबुक में दर्ज करने होते हैं और प्रोजेक्ट फाइल तैयार करनी होती है। पटना जिले के 423 हाईस्कूलों में स्थिति यह है कि अधिकांश छात्रों ने अब तक लैब का मुंह तक ठीक से नहीं देखा है। जो काम जून-जुलाई की गर्मियों में पूरा हो जाना चाहिए था, वह सर्दियों की दहलीज पर भी अधूरा पड़ा है।

​फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी: जानिए किस विषय में कितना अटका काम

​विभागीय समीक्षा में विषयवार सिलेबस की जो स्थिति सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। भौतिक विज्ञान (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology)—तीनों ही शाखाओं में केवल खानापूर्ति के लिए एक-एक शुरुआती प्रयोग कराया गया है, जबकि कोर कॉन्सेप्ट वाले जटिल प्रयोग पूरी तरह छोड़ दिए गए हैं।

​रसायन विज्ञान में छात्रों को अब तक केवल ‘अम्ल और क्षार की पहचान’ (Identification of acids and bases) से जुड़ा शुरुआती प्रयोग कराया गया है। बोर्ड के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला ‘रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार’ (Types of chemical reactions) और ‘धातुओं की सक्रियता श्रेणी’ (Reactivity series of metals) का प्रयोग प्रयोगशाला में छुआ तक नहीं गया है।

​भौतिक विज्ञान का हाल भी इससे अलग नहीं है। स्कूलों में केवल ‘प्रकाश का अपवर्तन’ (Refraction of light) ही ब्लैकबोर्ड या टेबल पर दिखाया गया है। ‘प्रतिरोधों का श्रेणीक्रम एवं समानांतर क्रम संयोजन’ (Combination of resistors in series and parallel) और ओम के नियम का सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक बिना किसी प्रायोगिक अभ्यास के पड़े हैं।

​जीव विज्ञान में तो स्थिति और भी गंभीर है। शिक्षकों ने सिर्फ ‘प्रकाश संश्लेषण’ (Photosynthesis) का सामान्य प्रयोग कराकर पल्ला झाड़ लिया। ‘स्टोमेटा की स्लाइड तैयार करना’ (Temporary mount of leaf peel to observe stomata), ‘अमीबा में द्विविभाजन’ (Binary fission in amoeba) और ‘बीज के आंतरिक भाग’ (Parts of a dicot seed) जैसे सूक्ष्मदर्शी (Microscope) आधारित प्रयोग कराए ही नहीं गए।

​कक्षा 10वीं विज्ञान प्रैक्टिकल सिलेबस: पूरा बनाम अधूरा कार्य

विषय (Subject)पूरा कराया गया प्रैक्टिकल (Completed)अधूरा / लंबित महत्वपूर्ण सिलेबस (Pending Experiments)बोर्ड वेटेज व प्रभाव
रसायन विज्ञान (Chemistry)अम्ल और क्षार की पहचान (लिटमस व सूचक द्वारा)• रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार• धातुओं की सक्रियता श्रेणी• एसिटिक एसिड के गुणधर्मवीवा और मुख्य प्रयोग (4 अंक)
भौतिक विज्ञान (Physics)प्रकाश का अपवर्तन (कांच की सिल्ली द्वारा)• प्रतिरोधों का श्रेणी व समानांतर संयोजन• ओम के नियम का सत्यापन• उत्तल लेंस की फोकस दूरी निर्धारणसर्किट आरेख व गणना (4 अंक)
जीव विज्ञान (Biology)प्रकाश संश्लेषण में स्टार्च की उपस्थिति• पत्ती की झिल्ली से स्टोमेटा की स्लाइड बनाना• अमीबा व यीस्ट में द्विविभाजन/मुकुलन• द्विबीजपत्री बीज की संरचनास्लाइड निर्माण व चित्र (3 अंक)
प्रोजेक्ट वर्क (All Sciences)शून्य से 1 प्रोजेक्ट फाइल (प्रारंभिक)कुल 6 अनिवार्य प्रोजेक्ट फाइलें तैयार करना और चार्ट सबमिशनआंतरिक मूल्यांकन (6 अंक)

423 में से सिर्फ 174 स्कूलों ने भेजी रिपोर्ट, 249 पर लटकी कार्रवाई की तलवार

​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक झटका तब लगा जब जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी विद्यालयों से प्रैक्टिकल क्लास की अद्यतन स्थिति मांगी। जिले के कुल 423 सरकारी हाईस्कूलों में से महज 174 स्कूलों ने ही अपनी रिपोर्ट कार्यालय को सौंपी।

​बाकी बचे 249 स्कूलों ने रिपोर्ट भेजने तक की जहमत नहीं उठाई। इससे यह साफ जाहिर होता है कि इन 249 विद्यालयों में प्रैक्टिकल क्लास की स्थिति या तो शून्य है या फिर वहां प्रयोगशालाएं बंद पड़ी हैं।

​शिक्षा विभाग ने इस मनमानी और शिथिलता को अत्यंत गंभीरता से लिया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी डिफॉल्टर स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सख्त चेतावनी जारी करते हुए चालू माह के अंत तक हर हाल में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट नहीं दी गई और अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर प्रैक्टिकल पूरा नहीं कराया गया, तो संबंधित प्रधानाध्यापकों और विज्ञान शिक्षकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​पटना जिला हाईस्कूल प्रैक्टिकल एवं आईसीटी लैब समीक्षा 2026

समीक्षा मानक (Audit Parameter)संख्या / स्थिति (Data)वर्तमान स्थिति एवं प्रशासनिक निर्देश
जिले में कुल सरकारी हाईस्कूल423 विद्यालयसभी में 10वीं की मैट्रिक परीक्षा के केंद्र व छात्र नामांकित
प्रैक्टिकल रिपोर्ट जमा करने वाले स्कूल174 विद्यालय50% से कम सिलेबस पूरा होने की पुष्टि हुई
डिफॉल्टर स्कूल (रिपोर्ट न देने वाले)249 विद्यालयमाह के अंत तक स्पष्टीकरण व रिपोर्ट तलब
प्रैक्टिकल सिलेबस की वर्तमान स्थिति50% से भी कमअतिरिक्त कक्षाएं लगाकर दिसंबर तक पूरा करने का आदेश
जिले में सक्रिय आईसीटी लैब74 विद्यालयखराब कंप्यूटर बदलने और ट्रैकर मॉनिटरिंग के निर्देश
प्रायोगिक परीक्षा की प्रस्तावित तिथिजनवरी 2026/27बिहार बोर्ड की आगामी आधिकारिक डेटशीट के अनुसार

आईसीटी लैब पर नया फरमान: खराब कंप्यूटर बदलेंगे, नोटकैम से हाजिरी अनिवार्य

​प्रैक्टिकल कक्षाओं की इस बदहाली के बीच शिक्षा विभाग ने स्कूलों में चल रही आईसीटी लैब्स (ICT Labs) को लेकर भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। विभाग का सख्त निर्देश है कि सरकारी विद्यालयों में स्थापित आधुनिक कंप्यूटर लैब किसी भी सूरत में बंद नहीं होनी चाहिए।

​वर्तमान में पटना जिले के 74 विद्यालयों में आईसीटी लैब संचालित हो रही हैं। इन लैब्स में छात्रों को तकनीकी और डिजिटल शिक्षा दी जानी है, लेकिन कई जगह कंप्यूटरों के खराब पड़े होने और तकनीकी ऑपरेटरों की अनुपस्थिति की शिकायतें मिल रही थीं।

​जिला शिक्षा कार्यालय ने अब इसके लिए एक नया प्रोफार्मा (प्रारूप) जारी किया है। इसके तहत हर स्कूल को प्रत्येक महीने एक विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी। इस प्रारूप में निम्नलिखित विवरण देना अनिवार्य होगा:

  • ​संबंधित माह का नाम
  • ​लैब में अधिष्ठापित (Installed) कुल कंप्यूटरों की संख्या
  • ​वर्तमान में चालू (Working) कंप्यूटरों की संख्या
  • ​खराब/खराब पड़े (Non-functional) कंप्यूटरों का ब्योरा

​विभागीय आदेश के अनुसार, जो कंप्यूटर खराब हैं, उन्हें संबंधित एजेंसी के माध्यम से तत्काल बदलवाया या ठीक कराया जाएगा।

​इसके साथ ही, व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए आईसीटी लैब अनुदेशकों (Instructors) की उपस्थिति को डिजिटल ट्रैकर से जोड़ दिया गया है। अनुदेशकों को रोजाना क्लास लेते समय ‘नोटकैम’ (NoteCam) एप्लिकेशन से जीपीएस लोकेशन और टाइम-स्टैम्प वाली तस्वीरें अपलोड करनी होंगी। साथ ही, उस दिन उन्होंने छात्रों को कंप्यूटर में क्या सिखाया, इसका पूरा विवरण भी दैनिक आधार पर पोर्टल पर दर्ज करना होगा।

​थ्योरी में रटना आसान, लेकिन प्रयोग बिना विज्ञान अधूरा

​शिक्षाविदों और वरिष्ठ शिक्षकों का मानना है कि विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों और रटने तक सीमित नहीं हो सकती। यदि छात्र खुद अपने हाथों से परखनली (Test tube) नहीं पकड़ेंगे, लेंस से प्रकाश की किरणों को केंद्रित नहीं करेंगे या माइक्रोस्कोप में पादप कोशिकाओं को नहीं देखेंगे, तो उनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण कभी विकसित नहीं हो सकता।

​एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि कई स्कूलों में प्रयोगशाला सहायक (Lab Assistant) नहीं हैं और कई जगह जरूरी केमिकल या उपकरण वर्षों से संदूकों में बंद पड़े हैं। परीक्षा के समय केवल औपचारिक रूप से नंबर चढ़ा दिए जाते हैं।

​लेकिन इस बार शिक्षा विभाग की सीधी निगरानी ने इस परिपाटी पर रोक लगाने की कोशिश की है। 20 नंबर का प्रैक्टिकल छात्रों के फर्स्ट डिवीजन और डिस्टिंक्शन के बीच की खाई को पाटता है। अगर प्रैक्टिकल में छात्रों को सही अभ्यास नहीं मिला, तो बोर्ड के वाइवा में वे असहज होंगे और आगे चलकर 11वीं-12वीं की उच्च विज्ञान शिक्षा में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

​छात्रों और शिक्षकों के लिए आगे की राह: क्या करें?

​जनवरी में प्रस्तावित प्रैक्टिकल परीक्षा में अब दो महीने से भी कम का प्रभावी समय बचा है। ऐसे में समय रहते सिलेबस की भरपाई के लिए विशेष रणनीति की दरकार है:

  • ​अतिरिक्त लैब सत्र: विद्यालयों को सप्ताह में कम से कम तीन दिन दो-दो घंटे के विशेष व्यावहारिक सत्र आयोजित करने चाहिए ताकि लंबित 11 प्रयोगों को छात्र स्वयं दोहरा सकें।
  • ​प्रोजेक्ट फाइलों का समयबद्ध निर्माण: छात्रों को 6 अनिवार्य प्रोजेक्ट फाइलों के विषय तुरंत आवंटित किए जाने चाहिए ताकि नवंबर के भीतर उनकी हस्तलिखित फाइलें तैयार हो जाएं।
  • ​सुरक्षा और केमिकल का प्रबंध: विद्यालयों को विकास कोष से आवश्यक रसायनों, लिटमस पेपर और बेसिक ग्लासवेयर की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • ​पारदर्शिता और रिकॉर्ड कीपिंग: प्रत्येक छात्र द्वारा किए गए प्रयोग का रिकॉर्ड बाकायदा लैब रजिस्टर में दर्ज हो, जिससे निरीक्षण के समय कोई विसंगति न मिले।

​शिक्षा विभाग की इस सख्त कवायद का असर आने वाले हफ्तों में पटना के 423 स्कूलों की प्रयोगशालाओं में दिखेगा या यह आदेश भी केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा, इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

Siddharth

Expertise: B.Tech

Educational Content Writer having experience of 5+ years

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