auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️बिहार शिक्षा विभाग ने सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान के तहत रोहतास जिले के 2,296 सरकारी विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुधारने के लिए ₹8,28,80,000 की मंजूरी दी और 65% अग्रिम राशि जारी की।
◾️कुल ₹8.288 करोड़ बजट; 2012 प्रारंभिक विद्यालयों को ₹6.777 करोड़ तथा 284 उच्च माध्यमिक विद्यालयों को ₹1.511 करोड़ का आवंटन।
◾️जिले के हजारों छात्र-छात्राओं को जर्जर भवनों से मुक्ति मिलेगी और स्वच्छ पेयजल, चालू शौचालय, विद्युतीकरण, डेस्क-बेंच व चहारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाएं सुलभ होंगी।
◾️छोटे व आवश्यक कार्य 30 नवंबर 2026 तक तथा चहारदीवारी/खेल मैदान जैसे बड़े निर्माण कार्य 31 मार्च 2027 तक पूरे किए जाने हैं; गड़बड़ी मिलने पर एफआईआर दर्ज होगी।

सेवा संकल्प अभियान के तहत प्राथमिक से उच्च माध्यमिक विद्यालयों को मिली राशि; 65 फीसदी फंड पहली किस्त में जारी, घटिया निर्माण पर एफआईआर की चेतावनी।
8 करोड़ 28 लाख 80 हजार रुपये। यह वह तय बजट है, जिससे रोहतास जिले के 2,296 सरकारी विद्यालयों की बदहाल तस्वीर को बदलने की अंतिम रूपरेखा खींची गई है। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ (वित्तीय वर्ष 2026-27) के तहत जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए खजाना खोल दिया है। योजना के पहले चरण के तहत कुल स्वीकृत राशि का 65 प्रतिशत हिस्सा जारी भी कर दिया गया है, ताकि बुनियादी कमियों को तत्काल प्रभाव से दूर किया जा सके।
जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों में जर्जर छतों के नीचे चल रहे वर्गकक्षों, टूटे पड़े डेस्क-बेंचों और बंद पड़े शौचालयों से जूझते विद्यार्थियों के लिए यह प्रशासनिक पहल बड़ी राहत लेकर आई है। हालांकि, इस बार सरकार का रुख सिर्फ राशि बांटने तक सीमित नहीं है। राज्य मुख्यालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों के जीर्णोद्धार में ईंट-सीमेंट की गुणवत्ता से समझौता हुआ या वित्तीय हेराफेरी सामने आई, तो सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
दो चरणों में बंटी समय-सीमा: 30 नवंबर और 31 मार्च की डेडलाइन
जिले के शिक्षा महकमे ने पूरे कायाकल्प अभियान को दो अलग-अलग चरणों में बांटा है, ताकि प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ति बिना किसी देरी के सुनिश्चित हो सके।
तत्काल प्रभाव वाले छोटे मरम्मत कार्य—जैसे कि खिड़की-दरवाजों की मरम्मत, दीवारों का रंग-रोगन, ब्लैकबोर्ड/ग्रीनबोर्ड दुरुस्त करना, रनिंग वाटर की बहाली और शौचालयों की सफाई व मरम्मत—हर हाल में 30 नवंबर 2026 तक पूरे करने होंगे। इसके लिए प्रारंभिक स्तर पर विद्यालय प्रधानों को तेजी से काम निपटाने का टास्क सौंपा गया है।
इसके उलट, बड़े पैमाने के संरचनात्मक कार्य, जैसे कि विद्यालय की बाउंड्री वॉल (चहारदीवारी निर्माण), भवनहीन विद्यालयों में अतिरिक्त वर्ग कक्षों का निर्माण, खेल मैदान का समतलीकरण और मिट्टी भराई के काम को पूरा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय तय किया गया है। इन दीर्घकालिक कार्यों को पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और मनरेगा जैसी योजनाओं के समन्वय से धरातल पर उतारा जाएगा।
प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक: बजट आवंटन का पूरा गणित
रोहतास जिले में कुल 2,012 प्रारंभिक (प्राथमिक व मध्य) विद्यालय और 284 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। छात्र संख्या और भवनों के आकार के आधार पर शिक्षा विभाग ने दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की है।
कुल आवंटित बजट का 65 प्रतिशत हिस्सा अग्रिम के तौर पर कार्य शुरू कराने के लिए भेजा गया है, जबकि शेष 35 प्रतिशत राशि कार्य की तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) पूर्ण होने के बाद ही विमुक्त की जाएगी।
विद्यालयवार बजट और चरणबद्ध वित्तीय विवरण
| विद्यालय श्रेणी | कुल विद्यालय संख्या | कुल स्वीकृत राशि | 65% प्रथम किस्त (जारी राशि) | 35% द्वितीय किस्त (कार्य पूर्ण होने पर) |
|---|---|---|---|---|
| प्रारंभिक विद्यालय (प्राथमिक व मध्य) | 2,012 | ₹6,77,70,000 | ₹4,40,50,000 | ₹2,37,20,000 |
| माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय | 284 | ₹1,51,10,000 | ₹98,20,000 | ₹52,90,000 |
| कुल योग (रोहतास जिला) | 2,296 | ₹8,28,80,000 | ₹5,38,70,000 | ₹2,90,10,000 |
विभागीय आदेश के तहत डीपीओ (स्थापना) को अधिकृत किया गया है कि वे तत्काल जरूरतों को देखते हुए प्रति विद्यालय अधिकतम 50 हजार रुपये तक की राशि फौरी तौर पर मुहैया कराएंगे, जिससे छोटे-मोटे मरम्मत कार्य तुरंत शुरू हो सकें।
प्राथमिकताओं की फेहरिस्त: इन जरूरी सुविधाओं पर खर्च होगी राशि
शिक्षा विभाग ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) और प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मिली हुई राशि को किसी अन्य मद में स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा। स्कूलों की वास्तविक स्थिति के आकलन के आधार पर प्राथमिकता सूची तैयार की गई है:
- पेयजल और स्वच्छता: विद्यालयों में रनिंग वाटर (नल-जल) की निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित करना, खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत, और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों की मुकम्मल साफ-सफाई व मरम्मत।
- विद्युतीकरण व प्रकाश: वर्गकक्षों में पंखे, एलईडी बल्ब, सुरक्षित बिजली वायरिंग और स्विच बोर्ड की दुरुस्ती, जिससे गर्मियों और उमस में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
- भवन व वर्गकक्षों का संरक्षण: टूटे हुए फर्श, खिड़कियों के पल्ले, दरवाजों के सिटकनी-ताले, छतों की मामूली लीकेज की मरम्मत और आकर्षक रंगों से दीवारों का रंग-रोगन।
- किचन शेड व भोजन स्थल: मध्याह्न भोजन (MDM) योजना के तहत बनने वाले भोजन के लिए किचन शेड की मरम्मत, स्वच्छता और जल निकासी की व्यवस्था।
- परिसर सुरक्षा व सुविधाएं: साइकिल से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए साइकिल स्टैंड का निर्माण, आवश्यकतानुसार चहारदीवारी और परिसर में जलजमाव रोकने के लिए मिट्टी भराई व खेल मैदान का समतलीकरण।
पूर्व की अनियमितताओं से सबक: गुणवत्ता पर सवाल और कड़ा पहरा
सरकारी स्कूलों में रंग-रोगन और मरम्मत के नाम पर खानापूरी का इतिहास रोहतास में नया नहीं है। दो वर्ष पूर्व लोकसभा चुनाव के दौरान भी विद्यालयों के जीर्णोद्धार और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए प्रति स्कूल 3 लाख से लेकर 5 लाख रुपये तक की भारी-भरकम राशि दी गई थी। उस समय कई प्रखंडों में काम की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे—कहीं घटिया पेंट की वजह से कुछ ही महीनों में दीवारें उखड़ गईं, तो कहीं वायरिंग के नाम पर खानापूरी कर राशि निकाल ली गई।
इसी कड़वे अनुभव को देखते हुए शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पांडेय ने इस बार जिला प्रशासन को कड़े तेवर दिखाए हैं।
”कार्यों के क्रियान्वयन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। यदि किसी भी विद्यालय में मरम्मत कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी पाई गई या वित्तीय अनियमितता हुई, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मियों पर सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
— विजय कुमार पांडेय, निदेशक (प्रशासन), शिक्षा विभाग, बिहार
इसके साथ ही विभाग ने एक अनिवार्य शर्त यह भी जोड़ी है कि जिन विद्यालयों के पास पूर्व से अनुरक्षण (Maintenance) मद की कोई अप्रयुक्त राशि शेष पड़ी है, उन्हें पहले उस पुरानी राशि का उपयोग करना होगा। पुरानी राशि का विधिवत समायोजन और उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा करने के बाद ही इस नए अभियान की राशि का उपभोग मान्य होगा।
जमीन विवाद और अतिक्रमण मुक्ति: राजस्व विभाग से तालमेल
अक्सर देखने में आता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की भूमि पर स्थानीय दबंगों या आसपास के लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया जाता है, जिससे चहारदीवारी निर्माण या खेल मैदान का विकास अटक जाता है।
23 सितंबर 2026 को आयोजित विभागीय उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर विशेष रणनीति तैयार की गई थी। जिला शिक्षा पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय परिसरों को अतिक्रमणमुक्त कराने और भूमि सीमांकन के मामलों को सुलझाने के लिए अंचलाधिकारी (CO) और स्थानीय राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ सीधा समन्वय स्थापित किया जाए। राजस्व विभाग की मदद से विद्यालय की भूमि की नापी कराकर चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा, ताकि स्कूल की परिसंपत्तियां सुरक्षित रह सकें।
प्रशासनिक मुस्तैदी और आगे की राह
सासाराम स्थित जिला शिक्षा कार्यालय में इस अभियान को लेकर हलचल तेज हो चुकी है। सभी प्रखंडों से स्कूलों की जरूरत के हिसाब से प्राथमिक सूची संकलित की जा रही है।
रोहतास के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) मदन राय ने अभियान की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा:
”सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान के तहत जिले के सभी कोटि के विद्यालयों की आधारभूत संरचना को उच्चस्तरीय बनाया जाएगा। स्कूलों में बच्चों को निजी विद्यालयों जैसा सुरक्षित और स्वच्छ परिवेश देना हमारी प्राथमिकता है। अभियान को तय समय-सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की जा रही है।”
30 नवंबर की पहली समय-सीमा सिर पर है। ऐसे में रोहतास के शिक्षा महकमे के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि कागजों पर स्वीकृत हुए 8.28 करोड़ रुपये वास्तव में विद्यालयों की दीवारों, छतों, नलों और कक्षाओं में दिखाई दें, न कि केवल विभागीय फाइलों और औपचारिक रिपोर्टों तक सिमट कर रह जाएं।


