​भभुआ: आदर्श विद्यालयों के रंगरोगन में घपला, DPO की सख्ती के बाद वापस हुआ घटिया पेंट

updateUpdated: July 3, 2026 at 12:24 pm schedule 2 min read
SHARE
info

auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

▪️भभुआ (कैमूर) के आदर्श विद्यालयों में DPO विकास कुमार ने घटिया पेंट के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
▪️स्कूल के सौंदर्यीकरण के लिए प्रति विद्यालय ₹5 लाख आवंटित हैं।
▪️वेंडरों को अब सिर्फ स्वीकृत ब्रांडेड पेंट इस्तेमाल करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
▪️मानकों की अनदेखी करने वाले वेंडरों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई होगी। सार्वजनिक धन के सही उपयोग के लिए, विभाग अब अच्छी स्थिति वाले भवनों के फंड को मरम्मत की जरूरत वाले स्कूलों में लगाने पर भी विचार कर रहा है।

भभुआ: आदर्श विद्यालयों के रंगरोगन में घपला, DPO की सख्ती के बाद वापस हुआ घटिया पेंट

बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम द्वारा चयनित स्कूलों में 5 लाख रुपये की लागत से चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य में अनियमितता की शिकायत पर कसा गया शिकंजा।

​कैमूर जिले के आदर्श विद्यालयों (Adarsh Vidyalayas) में रंगरोगन के दौरान घटिया सामग्री के उपयोग पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) विकास कुमार ने शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए कार्यस्थल से घटिया पेंट वापस करा दिया है।

​बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम द्वारा जिले के विभिन्न प्रखंडों में ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ (आदर्श विद्यालय) के तहत चयनित भवनों के आकर्षक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के लिए प्रति विद्यालय पांच लाख रुपये स्वीकृत किये गए हैं। यह कार्य चयनित एजेंसियों और वेंडरों (vendors) के माध्यम से कराया जा रहा है।

​लेकिन कार्य शुरू होते ही गुणवत्ता को लेकर प्रधानाध्यापकों (principals) की शिकायतें सामने आने लगीं।

​ब्रांडेड पेंट के उपयोग का सख्त निर्देश

​जांच के दौरान यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि कुछ स्थानों पर एजेंसियों ने निर्धारित मानकों के अनुरूप पेंट उपलब्ध नहीं कराया था। इसके बाद डीपीओ ने संबंधित एजेंसियों को तत्काल निर्देश जारी करते हुए घटिया सामग्री को वापस करवाया और उसकी जगह कंपनी द्वारा निर्धारित एशियन पेंट (Asian Paints) उपलब्ध कराया, ताकि गुणवत्ता मानकों को पूरा किया जा सके।

​डीपीओ ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई वेंडर निर्देशों की अनदेखी करता है अथवा घटिया सामग्री का उपयोग करता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल भवनों की पुताई करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में लापरवाही या सार्वजनिक धन का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​अच्छी स्थिति वाले भवनों की दोबारा पुताई पर उठे सवाल

​इस बीच, रंगरोगन कार्य के दौरान कई विद्यालयों ने विभाग को एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि जिन भवनों में हाल के वर्षों में ही गुणवत्तापूर्ण पेंटिंग (painting) कराई गई है और भवन की स्थिति अभी भी अच्छी है, वहां दोबारा डिस्टेंपर (distemper) कराना तकनीकी व वित्तीय दृष्टि से उचित नहीं है।

​उनका मानना है कि इस सरकारी राशि का सार्थक उपयोग उन विद्यालयों में किया जाए जहां वास्तव में मरम्मत, रंगरोगन या अन्य आधारभूत सुविधाओं की अधिक आवश्यकता है। शिक्षा विभाग अब इस सुझाव पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है।

Ravi Kumar

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar 13 year of teaching experience in multiple government school of Bihar.

SHARE

Recommended Reading

Join
Telegram