Important Update Available
Updated information regarding this news story (इस न्यूज़ (खबर) की अपडेटेड जानकारी): बिहार में खुलेंगे ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’, बक्सर से होगी शुरुआत
auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
▪️शिक्षा विभाग की पहल 'चेतना सत्र' के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में बच्चों की पठन रुचि और भाषा कौशल में सुधार लाया जा रहा है।
▪️यह दैनिक कार्यक्रम बिहार के कैमूर जिले (भभुआ नगर) सहित प्रदेश के कई जिले एवं विद्यालयों में संचालित हो रहा है।
▪️प्रतिदिन 'हर दिन एक नई कहानी, बच्चों की जुबानी' और 'प्रेरक प्रसंग' जैसी डिजिटल सामग्री विद्यालयों में भेजी जा रही है।
▪️इससे बच्चों में नैतिक मूल्य, नेतृत्व क्षमता, मंच पर बोलने का साहस और सकारात्मक सोच का विकास हो रहा है।

कैमूर जिले में ‘हर दिन एक नई कहानी’ कार्यक्रम से छात्रों के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता में हो रहा है उल्लेखनीय सुधार।
कैमूर जिले (भभुआ नगर) के विद्यालयों में अब सुबह की शुरुआत केवल पारंपरिक प्रार्थना से नहीं होती। कतारों में खड़े छात्र-छात्राएं ‘हर दिन एक नई कहानी, बच्चों की जुबानी’ कार्यक्रम के तहत ज्ञानवर्धक कहानियों का वाचन कर रहे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा संचालित पठन पर्व के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में यह ‘चेतना सत्र’ (Chetna Satra) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना और उनकी भाषा दक्षता (language skills) को मजबूत बनाना है।
प्रतिदिन होने वाली इस गतिविधि के तहत विद्यार्थी प्रेरणादायक और नैतिक मूल्यों से जुड़ी कहानियों का पठन करते हैं और फिर उन्हें मंच पर अपने शब्दों में प्रस्तुत करते हैं। इससे बच्चों में पढ़ने, समझने और अभिव्यक्ति की क्षमता का तेजी से विकास हो रहा है। साथ ही, मंच पर बेझिझक बोलने का साहस और आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
सीखने का यह नया वातावरण अब विद्यालयों में अधिक रोचक, सक्रिय व सहभागितापूर्ण बन गया है।
चेतना सत्र का एक अन्य प्रमुख आकर्षण ‘प्रेरक प्रसंग’ है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को देश के महान व्यक्तियों, स्वतंत्रता सेनानियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों व समाज सुधारकों के जीवन से परिचित कराया जाता है। इन प्रसंगों को नियमित रूप से सुनने से नई पीढ़ी में नैतिक मूल्य, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सकारात्मक सोच व सामाजिक उत्तरदायित्व (social responsibility) की भावना विकसित हो रही है।
इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के पीछे डिजिटल तकनीक और शिक्षकों का साझा प्रयास है।
पहल के अंतर्गत, शिक्षक सुमित कुमार प्रतिदिन चेतना सत्र की सामग्री तैयार करते हैं और उसे डिजिटल माध्यम से जिले के विद्यालयों तक उपलब्ध कराते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में शिक्षा विभाग के कार्यक्रम सहायक मृत्युंजय कुमार शर्मा का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहता है। प्रतिदिन भेजी जाने वाली इस शिक्षण सामग्री में कहानियां, प्रेरक प्रसंग, सामान्य ज्ञान, क्विज (quiz) और व्यक्तित्व विकास आधारित गतिविधियां शामिल होती हैं, जो चेतना सत्र को और अधिक प्रासंगिक बना रही हैं।