​सहयोग पोर्टल पर वेतन की शिकायत करना तीन शिक्षकों को पड़ा भारी, डीपीओ ने मांगा स्पष्टीकरण

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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

▪️सहयोग पोर्टल पर बकाया वेतन की तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक शिकायतें दर्ज कराने के आरोप में तीन सरकारी शिक्षकों को कारण बताओ (स्पष्टीकरण) नोटिस जारी किए गए हैं।
▪️यह मामला नरपतगंज और पलासी प्रखंडों से संबंधित है, जिसमें मार्च 2026 तक के उपस्थिति रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया है।
▪️: ₹21,522, ₹26,580 और ₹60,714 के पहले ही हो चुके भुगतान के संबंध में विसंगतियां पाई गईं, साथ ही ई-शिक्षा कोष ऐप पर प्रमाणित उपस्थिति केवल 12 दिनों की पाई गई।
▪️एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए, आरोपी शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर अपना आधिकारिक पक्ष (जवाब) प्रस्तुत करना होगा।

सहयोग पोर्टल पर बकाया वेतन की गलत शिकायत दर्ज कराने के मामले में डीपीओ रशिद नवाज ने तीन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है।

तथ्यों से अलग शिकायत दर्ज कराने पर शिक्षा विभाग सख्त, एक सप्ताह के भीतर जवाब न देने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

​सहयोग पोर्टल पर बकाया वेतन के भुगतान की शिकायत दर्ज कराना जिले के तीन शिक्षकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी शिकायत का निवारण होगा, लेकिन इसके उलट शिक्षा विभाग ने उनके दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें ही कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। डीपीओ (स्थापना) रशिद नवाज ने इन सभी शिक्षकों से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगते हुए जवाब दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है।

​विभाग का स्पष्ट कहना है कि इन शिक्षकों द्वारा पोर्टल पर लगाए गए आरोप आधिकारिक तथ्यों और वित्तीय रिकॉर्ड से कतई मेल नहीं खाते। अगर एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उनके खिलाफ गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

​विभागीय रिकॉर्ड और दावों में बड़ा अंतर

​डीपीओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, नरपतगंज प्रखंड के उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय धरहरा में कार्यरत विशिष्ट शिक्षक शंकरानंद तिवारी ने अंतर वेतन के बकाया भुगतान को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, विभागीय जांच में सामने आया कि उन्हें 3 फरवरी को ₹21,522 और उसके बाद ₹26,580 का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।

​इसी तरह का एक अन्य मामला उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय साहेबगंज का है। यहाँ के विशिष्ट शिक्षक टुनटुन कुमार ने भी बकाया वेतन न मिलने का दावा किया था, जबकि विभाग के अनुसार उनके बैंक खाते में ₹60,714 की राशि काफी पहले ही भेजी जा चुकी है।

​पलासी प्रखंड के उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय डाला से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहाँ विद्यालय अध्यापक सोनू कुमार ने महज दो दिनों के बकाया वेतन को लेकर पोर्टल पर शिकायत दर्ज की थी।

​ई-शिक्षा कोष ऐप से खुली पोल

​सोनू कुमार के मामले की जांच का ब्योरा देते हुए डीपीओ रशिद नवाज ने बताया कि मार्च 2026 में ई-शिक्षा कोष ऐप पर संबंधित शिक्षक की केवल 12 दिनों की उपस्थिति दर्ज पाई गई थी। इससे पहले भी उनसे इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसके बाद दो दिनों के वेतन की कटौती करते हुए शेष राशि का भुगतान नियमानुसार कर दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने पोर्टल पर दोबारा शिकायत दर्ज करा दी।

​डीपीओ स्थापना ने तीनों शिक्षकों के इस कदम पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में उनसे सीधे पूछा गया है कि उनके इस कृत्य को विभागीय कार्यों में बाधा, कर्तव्य के प्रति लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और मनमानेपन का द्योतक क्यों न माना जाए और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

​गलत तथ्यों के आधार पर शिकायत करना अब अनुशासनहीनता के दायरे में देखा जा रहा है। सभी संबंधित शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे तय समय सीमा यानी एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष निश्चित रूप से प्रस्तुत करें, अन्यथा उनके खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar

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