रोहतास: 2010 से पहले बहाल शिक्षकों पर TET थोपने का विरोध, समस्याओं के निपटारे के लिए बना 7-सदस्यीय कोषांग

updateUpdated: July 8, 2026 at 3:14 pm schedule 3 min read
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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

▪️2010 से पूर्व बहाल शिक्षकों पर TET थोपने का विरोध करने और लंबित वेतन मामलों को सुलझाने के लिए 7-सदस्यीय 'शिक्षक शिकायत निवारण कोषांग' का गठन किया गया।
▪️शिकायतों के निवारण हेतु 7-सदस्यीय विशेष सेल का निर्माण।
▪️RTE एक्ट 2010 से पहले नियुक्त हुए पुराने शिक्षक TET की अनिवार्यता और DEO स्तर पर वेतन कटौती के कारण मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
▪️यह नया कोषांग लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए सीधे जिला प्रशासन और DEO कार्यालय के समक्ष इन मुद्दों को उठाएगा।

जिला प्राथमिक शिक्षक संघ की बिक्रमगंज में हुई बैठक में पुरानी बहाली से टीईटी की अनिवार्यता हटाने और लंबित वेतन भुगतान की उठी जोरदार मांग।

Byline: न्यूज़ डेस्क

​बिहार के रोहतास जिले में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों ने अपने ऊपर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता थोपे जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

​रविवार को बिक्रमगंज के मध्य विद्यालय जमोड़ी में जिला प्राथमिक शिक्षक संघ (रोहतास) के जिला व प्रखंड प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिलाध्यक्ष श्रीनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में लंबे समय से लंबित वेतन, ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल की खामियों और टीईटी नियमों के कारण शिक्षकों में बढ़ रहे मानसिक तनाव पर गंभीर चर्चा की गई। समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए संघ ने सर्वसम्मति से एक सात-सदस्यीय ‘शिक्षक शिकायत निवारण कोषांग’ का गठन किया है।

​पुरानी बहाली पर TET का नियम ‘अनुचित’

​बैठक का मुख्य बिंदु पुराने और अनुभवी शिक्षकों पर नए नियमों का दबाव था।

​संघ के प्रधान सचिव अखिलेश्वर कुमार सिंह ने टीईटी से जुड़े सरकारी नियमों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष 2010 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त किये गये शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है।

​इसी बात का समर्थन करते हुए राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित एवं संघ के सचिव अरविंद कुमार मेहता ने कहा, “लंबे समय से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों के अनुभव को महत्व दिया जाना चाहिए।” उनके अलावा प्रधानाध्यापक सुरेश कुमार सिंह, ददन सिंह और मेहंदी हसन ने भी सरकार से नियमों में शिथिलता बरतने की पुरजोर अपील की।

​DEO कार्यालय की लापरवाही से शिक्षक तनाव में

​नीतिगत विरोध के साथ-साथ प्रशासनिक लेटलतीफी भी शिक्षकों के आक्रोश का एक बड़ा कारण है।

​कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय के स्तर पर अटके मामलों को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों का व्यक्तिगत डेटा अद्यतन (अपडेट) न होने, बकाया वेतन के भुगतान में हो रही देरी और सर्व शिक्षा अभियान (SSA) मद से जुड़े शिक्षकों के वेतन कटौती जैसे लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त की। संघ का मानना है कि इन प्रशासनिक बाधाओं के कारण शिक्षक भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।

​इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए राज्य संघ के निर्देश पर विशेष कोषांग की घोषणा की गई है, जिसकी रूपरेखा वरीय उपाध्यक्ष ज्वाला प्रसाद सिंह, उप प्रधान सचिव सुहैल अहमद, अविनाश चंद्र और ओम प्रकाश चौधरी के सुझावों पर तय की गई।

​बैठक के अंत में मध्य विद्यालय जमोड़ी के प्रधानाध्यापक व राज्य प्रतिनिधि राकेश कुमार सिंह की विद्यालय के कुशल प्रबंधन और स्वच्छ भौतिक संरचना के लिए पीठ थपथपाई गई। मौके पर सुशील कुमार राय, रामनाथ राम, सुरेश राम, रामजी प्रसाद, दिलीप कुमार सिंह, शशि भूषण, बिंदेश्वरी पाल और अरविन्द तिवारी सहित कई शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar

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