auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
▪️विश्वविद्यालयों में परास्नातक (PG) स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत नया जॉब-ओरिएंटेड और फ्लेक्सिबल पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी।
▪️पटना (बिहार) में योजना की घोषणा की गई; पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में प्रारंभिक चरण इसी जुलाई से और पूरे राज्य में पूर्ण कार्यान्वयन वर्ष 2027 से।
▪️4 वर्षीय यूजी के बाद 1 साल का मास्टर कोर्स; विशिष्ट पीजी कोर्स के लिए 7.5 सीजीपीए का अनिवार्य।
▪️यह नियम पीजी स्तर पर मनपसंद विषय चुनने की आजादी देता है, एक साथ दो पीजी डिग्री की अनुमति देता है, और पहले वर्ष के बाद ड्रॉपआउट करने पर पीजी डिप्लोमा प्रदान करता है।
▪️विशेषज्ञ समिति द्वारा समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।

नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक के बाद एक साल का मास्टर कोर्स होगा लागू, छात्रों को मिलेगी एक साथ दो पीजी डिग्री करने की अनुमति।
पटना: देश और राज्य के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब परास्नातक (PG) स्तर पर नया पाठ्यक्रम लागू होने जा रहा है, जिसे वर्ष 2027 से पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस नए बदलाव के लागू होने के बाद, छात्र अपने स्नातक (UG) के मूल विषय से अलग हटकर भी पीजी में अपनी पसंद का विषय चुन सकेंगे। इसके लिए शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की एक विशेष कमेटी लगातार लोक भवन स्तर पर मंथन कर रही है।
यूजीसी के नए क्रेडिट फ्रेमवर्क से हटेगी विषयों की बाध्यता
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए एक नया ‘करिकुलम एंड क्रेडिट फ्रेमवर्क’ तैयार किया है। इस नए नियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब पीजी में नामांकन के लिए स्नातक के विषयों की पुरानी बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। यदि कोई छात्र स्नातक में किसी भी विषय से उत्तीर्ण है और वह पीजी में अपना स्ट्रीम या विषय बदलना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है। हालांकि, इसके लिए छात्रों को राष्ट्रीय (National) या राज्य स्तरीय (State University Level) प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी।
2027 से पूर्ण रूप से लागू होगा एक वर्षीय मास्टर कोर्स
जैसा कि हमारे पास उपलब्ध जानकारियों से स्पष्ट है, नई शिक्षा नीति के तहत चार साल का ऑनर्स या रिसर्च आधारित ग्रेजुएशन कोर्स पूरा करने वाले छात्रों के लिए केवल एक साल का मास्टर कोर्स लागू किया जाएगा। वहीं, तीन साल की पारंपरिक ग्रेजुएशन डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के लिए पीजी कोर्स दो वर्ष का ही रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए फ्रेमवर्क पर अंतिम मंथन के बाद इस प्रस्ताव को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे वर्ष 2027 से सभी विश्वविद्यालयों में समान रूप से लागू कर दिया जाएगा।
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में जुलाई से शुरू होगा नया सत्र
उपलब्ध जानकारियों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अबू बकर रिजवी ने स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने चार वर्षीय यूजी कोर्स में 7.5 सीजीपीए (CGPA) या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उनके लिए दो वर्षीय पीजी कोर्स इसी जुलाई महीने से शुरू होने जा रहा है। इसका पाठ्यक्रम पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है। वहीं, जिन छात्रों ने चार वर्षीय स्नातक कोर्स में 7.5 सीजीपीए से कम अंक हासिल किए हैं, वे पुराने नियमों के तहत संचालित पीजी कोर्स में नामांकन ले सकेंगे।
एक साथ दो पीजी डिग्री और ड्रॉपआउट पर डिप्लोमा की सुविधा
इस नए कौशल-आधारित (Skill-based) और प्रयोग-आधारित पाठ्यक्रम में छात्रों को कई अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं भी दी जा रही हैं:
- मल्टीपल पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम: छात्र अब एक साथ दो पीजी कोर्स कर सकेंगे। इसके लिए वे या तो दोनों कोर्स फुलटाइम फिजिकल मोड (नियमित क्लास) में कर सकते हैं, या फिर एक फिजिकल और दूसरा ऑनलाइन मोड में चुन सकते हैं।
- एग्जिट ऑप्शन और डिप्लोमा: दो साल के पीजी कोर्स में पढ़ाई करने वाले छात्रों को पहले साल के बाद यदि किसी कारणवश पढ़ाई छोड़नी पड़ती है (ड्रॉपआउट), तो उन्हें पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा की उपाधि दी जाएगी।
- वर्क एक्सपीरियंस क्रेडिट: यदि किसी छात्र के पास काम का व्यावहारिक अनुभव है, तो नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के नियमों के तहत उस अनुभव को भी छात्र के क्रेडिट स्कोर में जोड़ा जा सकेगा।
यह पूरा नया शैक्षणिक ढांचा पूरी तरह से परिणाम-उन्मुख (Outcome-based) होगा, जिसमें विषय के मूल कंटेंट में कोई कटौती किए बिना छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।