auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
▪️गया कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. शिवाजी पांडेय को महिला सहकर्मी से अभद्रता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है, जबकि छात्रों ने डॉ. पांडेय द्वारा दर्ज FIR का कड़ा विरोध किया है।
▪️यह सिर्फ एक प्रशासनिक निलंबन नहीं है; छात्र नेताओं ने इसे कॉलेज प्रशासन की अनियमितताओं को छिपाने और आवाज उठाने वालों को झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश करार दिया है।
▪️छात्र नेताओं ने IG और SSP सहित उच्च पुलिस अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक पर महिला सहकर्मी से अभद्रता का आरोप, जबकि छात्रों ने प्रशासन पर लगाए झूठे मुकदमे में फंसाने के गंभीर आरोप।
गया कॉलेज (Gaya College) के संस्कृत विभाग में तैनात सहायक प्राध्यापक डॉ. शिवाजी पांडेय को महिला सहकर्मी से कथित अभद्रता के आरोप में तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं ठीक इसी समय इस विवाद ने एक नया और गहरा मोड़ ले लिया, जब छात्र नेताओं ने डॉ. पांडेय द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराई गई FIR को पूरी तरह से निराधार बताते हुए पुलिस के आला अधिकारियों से जांच की गुहार लगाई।
विश्वविद्यालय की ओर से यह सख्त कार्रवाई उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद की गई। मामले की शुरुआत तब हुई जब महिला सहायक प्राध्यापक डॉ. संगीता आर्या ने डॉ. पांडेय पर अमर्यादित आचरण का आरोप लगाते हुए आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
सस्पेंशन की इस अवधि में डॉ. पांडेय का मुख्यालय नवीनगर स्थित एएनएस कॉलेज (ANS College) तय किया गया है। उन्हें वहां नियमित रूप से अपनी अटेंडेंस दर्ज करानी होगी।
आदेश के मुताबिक, निलंबन के दौरान उन्हें केवल नियमानुसार जीवन-यापन भत्ता (Subsistence allowance) ही दिया जाएगा। हालांकि, उनके अनुभव प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेजों के सत्यापन (Verification) का काम पूरा होने के बाद ही उनके वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
छात्र नेताओं का पलटवार: ‘निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई’
शुक्रवार को शहर के विष्णुपद स्थित आनंदी भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवाद का दूसरा पहलू सामने आया। सूरज सिंह, मैक्स अवस्थी, विनायक कुमार और पवन मिश्रा समेत अन्य छात्र नेताओं ने डॉ. पांडेय द्वारा रामपुर थाने में उनके खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को दुर्भावनापूर्ण बताया।
उनका स्पष्ट दावा था कि जिस कथित घटना का जिक्र किया जा रहा है, उस वक्त वे कॉलेज परिसर या उसके आसपास मौजूद ही नहीं थे।
साक्ष्यों पर जोर देते हुए छात्रों ने कहा कि अगर पुलिस सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage), मोबाइल लोकेशन और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की पारदर्शी तरीके से जांच करे, तो सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी।
विवाद की असली वजह की ओर इशारा करते हुए छात्र नेताओं ने एक बड़ा आरोप लगाया। उनका कहना था कि कॉलेज प्रशासन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की लगातार मांग उठाने के कारण ही उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक (IG), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), DSP और रामपुर थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंप दिया गया है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि कानूनी दायरे में रहकर वे छात्र हितों और न्याय के लिए अपना यह संघर्ष जारी रखेंगे।