auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️बिहार के विश्वविद्यालयों में स्नातक (UG) स्तर पर 7 विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने हेतु वोकेशनल सिलेबस का प्रारूप तैयार कर कुलपतियों को भेजा गया।
◾️7 प्रमुख विदेशी भाषाएं (जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश, जापानी, कोरियन, चीनी, रूसी); सभी विश्वविद्यालयों में एकसमान फीस।
◾️छात्रों को स्नातक के साथ अंतरराष्ट्रीय भाषाओं की दक्षता मिलेगी, जिससे मल्टीनेशनल कंपनियों और विदेशों में उच्च वेतन वाले रोजगार के अवसर खुलेंगे।
◾️कुलपतियों से मंतव्य मिलने और समीक्षा के बाद कुलाधिपति की औपचारिक स्वीकृति से पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।

जेएनयू और बीएचयू की तर्ज पर वोकेशनल सिलेबस तैयार, सभी कुलपतियों से मांगा गया मंतव्य; फीस होगी एकसमान।
बिहार के विश्वविद्यालयों में अब स्नातक (UG) स्तर पर सात प्रमुख विदेशी भाषाओं की पढ़ाई होगी। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर गठित पाठ्यक्रम समिति ने वोकेशनल कोर्स का नया प्रारूप तैयार कर राज्य के सभी कुलपतियों को भेज दिया है।
तैयार ड्राफ्ट के तहत पहले चरण में जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश, जापानी, कोरियन, चीनी और रूसी भाषा को स्नातक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
यह बदलाव केवल भाषा सिखाने तक सीमित नहीं रहेगा। नए पाठ्यक्रम का खाका दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), आईआईएम और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (अमृतसर) के मॉडल सिलेबस का अध्ययन करके तैयार किया गया है। इसके साथ ही विशेषज्ञों की समिति ने मॉडर्न अरबी, पाली, तिब्बती भाषा एवं साहित्य, इतालवी और फारसी के पाठ्यक्रमों की संरचना का भी विश्लेषण किया है।
”राज्य के विश्वविद्यालयों में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू कराने की यह पहल बेहद सराहनीय है,” पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रासबिहारी सिंह ने कहा। उनके अनुसार, बहुभाषी दक्षता रखने वाले प्रोफेशनल्स के लिए देश और विदेश दोनों जगह करियर के बड़े विकल्प मौजूद हैं और इससे छात्रों को अच्छे वेतन वाली नौकरियां आसानी से मिल सकेंगी।
पूरे राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में इन पाठ्यक्रमों की फीस एकसमान रखी जाएगी।
बिहार के विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर तैयार किया जा रहा विदेशी भाषा पाठ्यक्रम विशुद्ध रूप से रोजगारोन्मुख (वोकेशनल व स्किल-बेस्ड) मॉडल पर आधारित है। राज्यपाल सचिवालय की पाठ्यक्रम समिति ने इसे देश के शीर्ष संस्थानों की तर्ज पर संरचित किया है।
मॉडल पाठ्यक्रम का आधार (Benchmark Institutions)
- प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रेरणा: जेएनयू (JNU), दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), बीएचयू (BHU), आईआईएम और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (अमृतसर) में संचालित विदेशी भाषा पाठ्यक्रमों को ड्राफ्ट का आधार बनाया गया है।
- अंतरराष्ट्रीय मानक: पाठ्यक्रम को वैश्विक भाषा प्रवीणता मानकों (जैसे यूरोपियन CEFR फ्रेमवर्क—A1 से B2 स्तर) के अनुरूप डिजाइन किया गया है, ताकि छात्रों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और दूतावासों में मान्यता मिल सके।
करिकुलम के मुख्य मॉड्यूल और संरचना
| मॉड्यूल घटक | फोकस क्षेत्र | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| फाउंडेशनल स्किल्स (LSRW) | सुनना (Listening), बोलना (Speaking), पढ़ना (Reading) और लिखना (Writing) | रोजमर्रा के संवाद और बुनियादी व्याकरण में पकड़ बनाना |
| बिजनेस व वोकेशनल कम्युनिकेशन | कॉर्पोरेट ईमेल राइटिंग, बिजनेस ड्राफ्टिंग, टेलीफोनिक शिष्टाचार | आईटी, बीपीओ, एविएशन और एमएनसी सेक्टर के लिए तैयार करना |
| अनुवाद एवं इंटरप्रिटेशन | तकनीकी, कानूनी और साहित्यिक अनुवाद (Translation & Interpretation) | ट्रांसलेटर और द्विभाषिया (Interpreter) के रूप में रोजगार |
| सांस्कृतिक पृष्ठभूमि (Cultural Context) | संबंधित देशों का इतिहास, व्यापारिक शिष्टाचार और कार्य संस्कृति | अंतरराष्ट्रीय कार्य परिवेश में सहज तालमेल बैठाना |
| अनिवार्य इंटर्नशिप | पर्यटन, कॉरपोरेट हाउस, अनुवाद एजेंसियों या एक्सपोर्ट फर्मों के साथ प्रोजेक्ट वर्क | क्लासरूम थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल इंडस्ट्री का अनुभव |
शामिल भाषाएं
- प्राथमिक सूची: जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश, जापानी, कोरियन, चीनी और रूसी।
- अतिरिक्त प्रस्तावित भाषाएं: मॉडर्न अरबी, पाली, तिब्बती भाषा एवं साहित्य, इतालवी और फारसी।
क्रेडिट और मूल्यांकन व्यवस्था यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के 4-वर्षीय स्नातक ढांचे के अंतर्गत वोकेशनल / स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (SEC) या माइनर कोर्स के रूप में क्रेडिट प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके तहत आंतरिक मूल्यांकन (प्रोजेक्ट/वाइवा) और थ्योरी-प्रैक्टिकल दोनों आधारों पर ग्रेड दिए जाएंगे। प्रत्येक विश्वविद्यालय में खुलने वाले करियर काउंसिलिंग सेंटर छात्रों को इन क्रेडिट्स के आधार पर प्लेसमेंट और इंटर्नशिप में मदद करेंगे। कुलपतियों से प्राप्त सुझावों के बाद राजभवन द्वारा इसका विस्तृत क्रेडिट-वार सिलेबस अधिसूचित किया जाएगा।
रोजगारपरक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से प्रत्येक विश्वविद्यालय में करियर काउंसिलिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप की अनिवार्य व्यवस्था भी होगी। राज्यपाल सचिवालय के एक उच्चपदस्थ अधिकारी के अनुसार, कुलपतियों से लिखित मंतव्य मिलने और उसकी विस्तृत समीक्षा के बाद कुलाधिपति की अंतिम मंजूरी मिलते ही इसे विधिवत लागू कर दिया जाएगा।