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Updated information regarding this news story (इस न्यूज़ (खबर) की अपडेटेड जानकारी): बिहार में खुलेंगे ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’, बक्सर से होगी शुरुआत
auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️बिहार सरकार ने शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों को 7वें वेतन आयोग का पूर्ण वित्तीय लाभ देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।
◾️शिक्षकों को नियमित राज्यकर्मियों (लेवल 1-14) की बजाय अलग पे-मैट्रिक्स (₹25,000 से ₹35,000 मूल वेतन) में रखा गया है।
◾️इससे समान वेतन और 7वें वेतनमान के भत्तों की उम्मीद लगाए लाखों शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है।
◾️सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षक संघ आगामी रणनीति या विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर सकते हैं।

विधान परिषद में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को राज्यकर्मियों की तरह लेवल-1 से 14 तक का फिटमेंट मैट्रिक्स देने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
बिहार के लाखों नियोजित, विशिष्ट और नए विद्यालय अध्यापकों के लिए बेहद निराशाजनक खबर है। राज्य सरकार ने दो टूक कह दिया है कि इन शिक्षकों को 7वें वेतन आयोग की अनुशंसाओं के तहत पूर्ण वित्तीय लाभ देने का उसका कोई विचार नहीं है।
यह बड़ा खुलासा बिहार विधान परिषद के भीतर हुआ है। गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी (MLC) जीवन कुमार द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सरकार का रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ किया कि राज्यकर्मियों के सामान्य फिटमेंट मैट्रिक्स (लेवल-01 से लेवल-14) की तर्ज पर शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों को लाभ देने का कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के समक्ष लंबित नहीं है।
’समान काम, समान वेतन’ की कानूनी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के साथ ही खत्म हो गई थीं।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी (SLP C No. 20/2018) का प्रमुखता से हवाला दिया है। जवाब में बताया गया कि 10 मई 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें पंचायती राज और नगर निकाय संस्थाओं द्वारा नियुक्त शिक्षकों को समान कार्य के बदले समान वेतन देने का निर्देश दिया गया था।
अलग से तय किया गया है ‘पे-मैट्रिक्स’
समान वेतन की मांग खारिज होने के बाद, सरकार का तर्क है कि उसने शिक्षकों की सेवा शर्तों में समय-समय पर सुधार किए हैं। आधिकारिक जवाब के मुताबिक, सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए 1 सितंबर 2020 से शिक्षकों के वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि लागू की थी। इसके बाद, बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 और विद्यालय अध्यापक नियमावली 2023 अधिसूचित की गईं।
इन नई नियमावलियों के तहत राज्यकर्मियों वाले लेवल-1 से 14 के बजाय, शिक्षकों के लिए एक बिलकुल अलग पे-मैट्रिक्स (मूल वेतन ढांचा) निर्धारित किया गया है:
- वर्ग 1 से 5 के शिक्षक: 25,000 रुपये
- वर्ग 6 से 8 के शिक्षक: 28,000 रुपये
- वर्ग 9 से 10 के शिक्षक: 31,000 रुपये
- वर्ग 11 से 12 के शिक्षक: 32,000 रुपये
- प्रधान शिक्षक: 30,500 रुपये
- प्रधानाध्यापक: 35,000 रुपये
शिक्षा मंत्री के लिखित जवाब का अंतिम वाक्य शिक्षकों की बची-खुची उम्मीदों पर पानी फेरता है। पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है, “अलग से इन शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के परिप्रेक्ष्य में पूर्ण वित्तीय लाभ देने हेतु सरकार के समक्ष कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”
इस स्पष्ट इनकार के बाद, लंबे समय से पूर्ण 7वें वेतनमान और राज्यकर्मी के हूबहू भत्तों की आस लगाए बैठे शिक्षक संघों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है।