auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
▪️बिहार शिक्षा विभाग ने 14,000 शहरी सरकारी स्कूलों के अतिरिक्त (सरप्लस) शिक्षकों को भारी स्टाफ कमी का सामना कर रहे ग्रामीण स्कूलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।
▪️शहरी स्कूलों में 70 छात्रों पर 15 तक शिक्षक तैनात हैं, जबकि इसके विपरीत 2,977 स्कूल महज 2 शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं और 29 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है।
▪️इस असंतुलन ने ग्रामीण छात्रों के लिए गणित, विज्ञान और अंग्रेजी में बुनियादी शिक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है; नया नियम 150 छात्रों पर 5 शिक्षकों का अनुपात लागू करता है।
▪️हर स्कूल में कम से कम एक विज्ञान शिक्षक सुनिश्चित करने और लक्षित पोस्टिंग करने के लिए, जिलावार रिक्त सीटों और विषयवार शिक्षक उपलब्धता का डेटा मांगा गया है।

शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति के तहत मानक तय किए, 150 छात्रों पर 5 शिक्षकों की होगी तैनाती
एक तरफ बिहार के शहरी इलाकों में ऐसे स्कूल हैं जहां 70 से 100 बच्चों पर 9 से 15 शिक्षक तैनात हैं। दूसरी तरफ, राज्य भर में 2,977 स्कूल ऐसे भी हैं जो महज दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। शिक्षा विभाग अब इस भारी प्रशासनिक असंतुलन को खत्म करने जा रहा है। नई नीति के तहत राज्य के करीब 14 हजार शहरी सरकारी स्कूलों में मौजूद आवश्यकता से अधिक (सरप्लस) शिक्षकों का तबादला अब ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में किया जाएगा।
विभाग ने शिक्षक पोस्टिंग और ट्रांसफर की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। नियमानुसार अब 150 छात्रों पर 5 शिक्षकों की तैनाती की जाएगी, जिसके लिए सभी जिलों से स्कूल और विषयवार रिक्त सीटों का पूरा डेटा तलब किया गया है।
इस नई व्यवस्था के पीछे के तर्क को स्पष्ट करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा: “शिक्षा विभाग का उद्देश्य सभी छात्रों को शिक्षित करना है। शहरी और ग्रामीण स्कूलों में मानक के मुताबिक शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।” उन्होंने आगे जोड़ा कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या अधिक है, वहां से उन्हें हटाकर कमी वाले स्कूलों में मानक के अनुसार तैनात किया जाएगा, और हर विषय के लिए एक शिक्षक नियुक्त होना अनिवार्य होगा।
29 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं
1 जुलाई 2026 को सामने आए विभागीय आंकड़ों ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। पूरे राज्य में 29 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है (हालांकि यहां छात्रों की संख्या भी कम है)। इसके अलावा, 8 हजार स्कूलों में शिक्षकों की संख्या सिर्फ तीन है।
राजधानी पटना की स्थिति भी इस विषमता को दर्शाती है। जिले में लगभग 50 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है, 383 में सिर्फ दो शिक्षक हैं, जबकि 500 स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षकों की भारी भीड़ (सरप्लस) है। शिक्षकों के इस असंतुलन का सीधा असर बुनियादी शिक्षा पर पड़ रहा है। पर्याप्त विषय विशेषज्ञ न होने के कारण ग्रामीण छात्रों को गणित, साइंस और अंग्रेजी की पढ़ाई में संघर्ष करना पड़ रहा है, यहां तक कि बच्चों को बुनियादी जोड़, घटाव, गुणा, पहाड़ा और स्पष्ट वाक्य पढ़ने में भी परेशानी आ रही है।
क्या हैं शिक्षक नियुक्ति के नए मानक?
नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रावधानों के अनुरूप ही अब शिक्षकों की तैनाती की जा रही है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए मानकों के अनुसार रूपरेखा इस प्रकार होगी:
- कक्षा 1 से 5: 120 छात्रों पर एक प्रधानाध्यापक (या प्रधान शिक्षक) के साथ पांच अध्यापक अनिवार्य होंगे। यदि छात्रों की संख्या 121 से 150 के बीच है, तो छह शिक्षकों की पोस्टिंग की जाएगी।
- कक्षा 1 से 8: इन स्कूलों में न्यूनतम 9 शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य की गई है।
हर स्कूल में कम से कम एक साइंस (विज्ञान) टीचर रखना विभाग की शीर्ष प्राथमिकता है। अंग्रेजी, गणित और विज्ञान के शिक्षकों की पोस्टिंग में विशेष सतर्कता बरती जाएगी और इनका बाकायदा वर्गीकरण कर तैनाती होगी। ऐच्छिक (Voluntary) ट्रांसफर में भी विभाग ने साफ कर दिया है कि किसी भी शिक्षक को उस स्कूल में नहीं भेजा जाएगा, जहां पहले से ही उस विशिष्ट विषय के एक से अधिक अध्यापक मौजूद हों।