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▪️बिहार सरकार ने 'बिहार राज्य शिक्षक स्थानान्तरण नियमावली, 2026' लागू की है, जिसके तहत ट्रांसफर अब केवल ऑनलाइन पोर्टल और अंक-प्रणाली के आधार पर होंगे।
▪️ यह नियमावली अधिसूचना 25 जून 2026 को पटना, बिहार से पूरे राज्य के शिक्षकों के लिए जारी की गई है।
▪️यह नीति शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात को दुरुस्त करेगी।
▪️स्थापना समितियों की बैठकें सामान्यतः प्रत्येक वर्ष मार्च महीने में होंगी और विसंगतियों के खिलाफ शिक्षक आदेश के 15 दिनों के भीतर अपील दायर कर सकेंगे।

शिक्षा विभाग ने अधिसूचना जारी कर लागू किए नए नियम; महिलाओं को गृह ब्लॉक और पुरुषों को गृह जिला विकल्प में मिलेगी प्राथमिकता, गंभीर बीमारियों के लिए मिलेंगे विशेष वरीयता अंक।
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के तबादलों और पदस्थापन को पारदर्शी व नियमबद्ध बनाने के लिए ‘बिहार राज्य शिक्षक स्थानान्तरण, नियमावली, 2026’ की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल के हस्ताक्षर से जारी इस नए नियम के तहत अब पैरवी और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल और अंक-आधारित प्रणाली (Point System) से जोड़ दिया गया है। राज्य में इस नीति से कुल कितने लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, इसका सटीक आंकड़ा अभी आधिकारिक तौर पर आना बाकी है।
शिक्षा विभाग ने लागू की नई नियमावली, इन शिक्षकों पर होगा सीधा असर
यह नियमावली बिहार के सभी राजकीय, राजकीयकृत, प्रोजेक्ट कन्या और बुनियादी स्कूलों में कार्यरत नियमित शिक्षकों, विद्यालय अध्यापकों, विशिष्ट शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों (प्रिंसिपल्स) पर समान रूप से लागू होगी। हालांकि, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि त्रिस्तरीय पंचायतों और नगर निकायों द्वारा नियुक्त शिक्षक इस स्थानांतरण नीति के दायरे में शामिल नहीं होंगे।
सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मानकों को पूरा करना है। इसके तहत स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) और विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता को सुचारू रूप से संतुलित किया जाएगा।
ऐसे काम करेगी अंक-आधारित वरीयता प्रणाली (Point System)
नए नियमों के अनुसार, अब शिक्षक ट्रांसफर को अपने अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकेंगे। यदि किसी एक स्कूल या पद के लिए एक से अधिक शिक्षक आवेदन करते हैं, तो उनकी वरीयता का निर्धारण एक पारदर्शी पॉइंट सिस्टम से होगा। इसके लिए कुल अंकों की गणना इस फॉर्मूले से की जाएगी: स्थानांतरण अंक = पदस्थापन स्थल अंक + सेवा अंक + वरीयता अंक।
- सेवा अंक (Service Points): 31 मार्च तक सेवा के प्रत्येक पूर्ण शैक्षणिक वर्ष के लिए शिक्षकों को 1 अंक दिया जाएगा।
- पदस्थापन स्थल अंक (Posting Place Points): स्कूलों की भौगोलिक और कठिन परिस्थितियों के आधार पर चार श्रेणियां (श्रेणी I से IV) बनाई गई हैं, जिनमें सेवा देने वाले शिक्षकों को प्रति वर्ष 1 से लेकर 5 अंक तक मिलेंगे।
- वरीयता अंक (Seniority Points): विशेष परिस्थितियों जैसे गंभीर बीमारियों (कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, ब्रेन ट्यूमर, पैरालिसिस) या 40% से अधिक की दिव्यांगता होने पर शिक्षकों को 10 से 20 विशेष अंक दिए जाएंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय या राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों और उन शिक्षकों को भी 5 से 15 अंक की वरीयता मिलेगी जिनके पति-पत्नी बिहार में ही सरकारी सेवा में हैं।
महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए गृह क्षेत्र (Home Posting) के बदले नियम
नीति में शिक्षकों की वास्तविक पारिवारिक कठिनाइयों को देखते हुए गृह क्षेत्र में पदस्थापन के नियमों को संरचित किया गया है। महिला शिक्षकों को उनके अनुरोध पर उनके गृह प्रखंड (Home Block) में ट्रांसफर मिल सकेगा, हालांकि वे अपनी स्वयं की गृह पंचायत या वार्ड में पोस्टिंग नहीं पा सकेंगी।
दूसरी तरफ, पुरुष शिक्षकों को उनके गृह जिले (Home District) का विकल्प मिल सकेगा, लेकिन उन्हें अपना गृह प्रखंड छोड़ना होगा। गंभीर चिकित्सा या अत्यधिक दिव्यांगता की स्थिति में सक्षम प्राधिकार इन प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है। यह भी नियम बनाया गया है कि किसी भी स्कूल में कुल स्वीकृत पदों के 25% से अधिक सीटों को वरीयता श्रेणी के तहत आए शिक्षकों से नहीं भरा जाएगा।
अनुशासनहीनता और गबन पर होगी प्रशासनिक कार्रवाई, 15 दिनों में कर सकेंगे अपील
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि वित्तीय अनियमितता, सरकारी राशि का गबन, आपराधिक मामलों में संलिप्तता, अनुशासनहीनता या महिला सहकर्मी/छात्रा के साथ अमर्यादित व्यवहार करने वाले शिक्षकों का प्रशासनिक दृष्टिकोण से कभी भी जिला या प्रखंड से बाहर तबादला किया जा सकता है। ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले संबंधित शिक्षक को अपना पक्ष रखने के लिए 7 कार्य दिवस का समय दिया जाएगा।
स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया केवल शिक्षा विभाग द्वारा अधिसूचित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी। यदि कोई शिक्षक स्थापना समिति के निर्णय से व्यथित है, तो वह आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी (जैसे प्रमंडलीय आयुक्त या सचिव, शिक्षा विभाग) के समक्ष अपनी अपील दर्ज करा सकता है। गलत सूचना या फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट देने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक और विधिक कार्रवाई की जाएगी।