बिहार शिक्षक ट्रांसफर नीति: तबादले से पहले होगा रेशनलाइजेशन

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Updated information regarding this news story (इस न्यूज़ (खबर) की अपडेटेड जानकारी): बिहार में खुलेंगे ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’, बक्सर से होगी शुरुआत

auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

▪️बिहार सरकार ने मनचाहे तबादलों से पहले छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के आधार पर पूरे राज्य में शिक्षकों का रेशनलाइजेशन (युक्तिकरण) अनिवार्य कर दिया है।
▪️बिहार शिक्षा विभाग, सरकारी शिक्षक और विभिन्न शिक्षक संघ इस नियम से होंगे प्रभावित।
▪️पटना में लगभग 4,800 और बेगूसराय में 2,300 से अधिक शिक्षक सरप्लस (अतिरिक्त) हैं।
▪️शिक्षा विभाग RTE और NEP के नियमों के तहत 'ई-शिक्षाकोश' पोर्टल के डेटा का उपयोग करके शिक्षकों का संतुलित वितरण करेगा।

बिहार सरकार की नई शिक्षक स्थानांतरण नीति के तहत स्वैच्छिक तबादलों से पहले रेशनलाइजेशन होगा। पटना में 4800 और बेगूसराय में 2300 शिक्षक सरप्लस हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

पटना में 4800 और बेगूसराय में 2300 से अधिक शिक्षक सरप्लस; गृह जिला जाने की उम्मीद लगाए शिक्षकों को लग सकता है बड़ा झटका।

बिहार सरकार की नई शिक्षक स्थानांतरण नीति के तहत अब राज्य में स्वैच्छिक तबादलों से पहले शिक्षकों का रेशनलाइजेशन (युक्तिकरण) किया जाएगा, जिससे मनपसंद ट्रांसफर की राह देख रहे हजारों शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

​ई-शिक्षाकोश पोर्टल के डेटा और पीटीआर पर तय होंगे तबादले

​बिहार शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के निर्धारित मानक से अधिक शिक्षक मौजूद हैं, उन्हें पहले उन विद्यालयों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की भारी कमी है। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए ‘ई-शिक्षाकोश पोर्टल’ पर उपलब्ध छात्रों के वास्तविक नामांकन आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।

​विभागीय योजना के अनुसार, राज्य में रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इस नई व्यवस्था के कारण जो शिक्षक वर्षों से अपने गृह जिला या मनपसंद प्रखंड में जाने का इंतजार कर रहे थे, उनके विकल्प अब बेहद सीमित हो जाएंगे। यदि किसी जिले में पहले से ही पर्याप्त या सरप्लस शिक्षक मौजूद हैं, तो वहां नए तबादले की संभावना न के बराबर होगी।

​पटना और बेगूसराय सहित कई जिलों में हजारों शिक्षक सरप्लस

​शिक्षा विभाग के आंतरिक आकलन के अनुसार, राजधानी पटना में वर्तमान में लगभग 4800 शिक्षक आवश्यकता से अधिक (सरप्लस) श्रेणी में पाए गए हैं। इसी प्रकार, बेगूसराय जिले में 2300 से अधिक शिक्षक अतिरिक्त श्रेणी में मौजूद हैं। इनके अलावा, राज्य के कई अन्य जिलों में भी 1000 से 1200 या उससे अधिक अतिरिक्त शिक्षक कार्यरत हैं।

​इन सभी सरप्लस शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर उन जिलों, प्रखंडों और विद्यालयों में भेजा जाएगा जहां शिक्षक-छात्र अनुपात मानकों से कम है। विभाग कक्षा छह से आठवीं तक के लिए विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता भी इसी रेशनलाइजेशन प्रक्रिया के आधार पर सुनिश्चित करने की तैयारी कर रहा है।

​शिक्षक संगठनों की बढ़ी चिंता और आरटीई-एनईपी के मानक

​इस नई व्यवस्था को लेकर राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों में चिंता काफी बढ़ गई है। संगठनों का तर्क है कि यदि स्वैच्छिक तबादलों से पहले बड़े पैमाने पर रेशनलाइजेशन थोपा गया, तो हजारों शिक्षक अपने परिवारों और गृह जिलों से और अधिक दूर चले जाएंगे। शिक्षक संघों की मांग है कि स्थानांतरण नीति में मानवीय गरिमा और पारिवारिक परिस्थितियों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

​दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि जब तक सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित नहीं होगा, तब तक एक प्रभावी स्थानांतरण नीति लागू करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। विभाग ने साफ किया है कि इस रेशनलाइजेशन का उद्देश्य किसी शिक्षक को परेशान करना नहीं, बल्कि राइट टू एजुकेशन (RTE) अधिनियम और नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रावधानों के अनुरूप सभी स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है।

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar 13 year of teaching experience in multiple government school of Bihar.

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