बिहार शिक्षक ट्रांस्फर: बीमारी और दिव्यांगता प्रमाणपत्र पर ट्रांसफर लेने वाले शिक्षकों की होगी जांच

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▪️बिहार शिक्षा विभाग ने बीमारी और दिव्यांगता के आधार पर ट्रांसफर लेने वाले शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की अनिवार्य जांच के आदेश।
▪️वर्ष 2024 के 10,470 आवेदनों में से 250 से अधिक फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र पकड़े गए हैं और 35 कैंसर सर्टिफिकेट वाले मामले होल्ड पर हैं।
▪️डॉक्टरों और दिव्यांगता अधिकारियों की कमेटियां संदिग्ध प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच करेंगी।
▪️फर्जी पाए जाने पर तबादला रद्द करने की घोषणा की है।
▪️पारदर्शी तबादला नीति सुनिश्चित करना और वास्तव में जरूरतमंद (कैंसर व गंभीर बीमार) शिक्षकों को प्राथमिकता।

बिहार शिक्षा विभाग ने बीमारी और दिव्यांगता के आधार पर ट्रांसफर लेने वाले शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की अनिवार्य जांच के आदेश दिए हैं और फर्जी पाए जाने पर तबादला रद्द करने की घोषणा की है।

शिक्षा विभाग की सख्ती: 250 से अधिक फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पकड़े गए, दोषी शिक्षकों के तबादले होंगे रद्द

​बिहार के सरकारी स्कूलों में बीमारी और दिव्यांगता के आधार पर ट्रांसफर (तबादाला) लेने वाले शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की गहन जांच की जाएगी। शिक्षा विभाग की इस सख्ती के तहत यदि किसी शिक्षक का सर्टिफिकेट फर्जी पाया जाता है, तो उनका ट्रांसफर तुरंत रद्द कर उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

​250 से अधिक फर्जी प्रमाणपत्र पकड़े जाने के बाद बढ़ा जांच का दायरा

​बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का यह मामला दिसंबर 2024 से शुरू हुआ था। वर्ष 2024 में कुल 10,470 शिक्षकों ने कैंसर, गंभीर बीमारी और दिव्यांगता का प्रमाणपत्र लगाकर ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। इनमें से 759 शिक्षकों ने खुद को कैंसर रोगी बताया था।

​प्रारंभिक जांच के बाद 250 से अधिक शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। इसके साथ ही, कैंसर का सर्टिफिकेट लगाने वाले 35 ऐसे शिक्षकों के ट्रांसफर को फिलहाल होल्ड पर रख दिया गया है जिनकी रिपोर्ट संदिग्ध है। इस बड़े खुलासे के बाद अब विभाग ने जांच का दायरा पूरी तरह बढ़ा दिया है।

​डॉक्टरों की विशेष कमेटी करेगी संदिग्ध मेडिकल सर्टिफिकेट्स की जांच

​बीमारी और दिव्यांगता के आधार पर आवेदन करने वाले शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की स्क्रूटनी अब डॉक्टरों और दिव्यांग अधिकारियों की विशेष टीम करेगी। जो भी सर्टिफिकेट संदिग्ध पाए जाएंगे, उनकी शिक्षा विभाग के माध्यम से दोबारा जांच कराई जाएगी। यदि जांच में दिव्यांगता का प्रतिशत तय सीमा से कम मिलता है, तो ट्रांसफर का आधार अमान्य माना जाएगा।

​विभाग के अनुसार, शिक्षकों द्वारा किए गए इस फर्जीवाड़े का बकायदा उनकी ‘सर्विस बुक’ में जिक्र किया जाएगा। इसके अलावा उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों सहित अन्य दस्तावेजों की भी समानांतर जांच की जाएगी।

Specific composition of district medical boards के सहयोग से कई जिलों में शिक्षा विभाग ने विशेष कमेटियों का गठन कर दिया है जो इन प्रमाणपत्रों की सत्यता परख रही हैं।

​ट्रांसफर के लिए तय किए गए 4 चरण और 8 कैटेगरी

​शिक्षकों के तबादले को सुव्यवस्थित करने के लिए शिक्षा विभाग ने 4 चरण (Phases) और 8 कैटेगरी तय की हैं। पहले चरण में कैंसर पीड़ित शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके बाद गंभीर रोग से ग्रसित शिक्षकों का ट्रांसफर होना तय था। इस योजना के तहत मानसिक रोगी, विधवा या परित्यक्ता, पति-पत्नी और दूरी के आधार पर ट्रांसफर का प्रावधान है।

​हालांकि, पहले चरण में ही कई शिक्षकों द्वारा फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर आवेदन करने की बात सामने आई है। विभाग ने साफ किया है कि अब सभी संदिग्ध सर्टिफिकेट की पूरी जांच के बाद ही ट्रांसफर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या बोले शिक्षा मंत्री?

“गंभीर बीमारी, दिव्यांग और महिला शिक्षकों को ट्रांसफर में वरीयता (Priority) दी जा रही है। बीमार और दिव्यांग शिक्षकों को ट्रांसफर आवेदन के साथ ही संबंधित बीमारी का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है। शिक्षकों द्वारा लगाए जाने वाले सभी प्रमाणपत्रों की कड़ाई से जांच की जाएगी। फर्जी या गलत सूचना देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई होगी।”

मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री, बिहार

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar

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