बिहार के सरकारी स्कूलों में 75% हाजिरी पर ही मिलेगी साइकिल व पोशाक राशि, ई-शिक्षाकोश पोर्टल पर ‘Yes/No’ से होगा फैसला

updateUpdated: October 10, 2026 at 5:19 pm schedule 7 min read
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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

◾️बिहार शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति योजनाओं का डीबीटी लाभ पाने के लिए न्यूनतम 75% उपस्थिति और अधिकतम 1.50 लाख रुपये वार्षिक पारिवारिक आय की शर्त अनिवार्य की है।
◾️75% न्यूनतम उपस्थिति कट-ऑफ, ₹1.50 लाख अधिकतम पारिवारिक आय, 3-स्तरीय ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली।
◾️फर्जी और दोहरे नामांकन पर रोक लगेगी; कक्षाओं में बिना आए केवल डीबीटी राशि उठाने वाले छात्रों के नाम पोर्टल पर 'No' मार्क होते ही कट जाएंगे।
◾️प्रधानाध्यापक ई-शिक्षाकोश पोर्टल पर डेटा सबमिट करेंगे, बीईओ सत्यापन करेंगे, और डीपो अनुमोदन के बाद पीएफएमएस (PFMS) से सीधे बैंक खातों में भुगतान भेजा जाएगा।

​शिक्षा विभाग ने 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक की उपस्थिति रिपोर्ट तलब की; 1.50 लाख रुपये वार्षिक पारिवारिक आय की शर्त भी अनिवार्य, PFMS के जरिए खातों में जाएगा पैसा।

​75 प्रतिशत हाजिरी और अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय।

​बिहार के सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं की राशि पाने का यही अंतिम पैमाना तय कर दिया गया है। अगर कक्षा में बच्चे की मौजूदगी इस आंकड़े से एक फीसदी भी कम हुई, तो राज्य सरकार की बहुचर्चित मुख्यमंत्री साइकिल योजना, पोशाक योजना और छात्रवृत्ति की डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) राशि बैंक खाते में नहीं पहुंचेगी।

​शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट निर्देश भेज दिया है। 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक के शैक्षणिक सत्र की छह माही उपस्थिति को आधार बनाकर ई-शिक्षाकोश पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का काम युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है।

​विभागीय आदेश के अनुसार, पोर्टल पर हर नामांकित विद्यार्थी के नाम के आगे दो स्पष्ट विकल्प होंगे—’Yes’ या ‘No’। यदि छात्र ने निर्धारित छह महीनों में 75 फीसदी या उससे अधिक कक्षाएं की हैं, तो उसके नाम के आगे ‘Yes’ दर्ज होगा। यदि उपस्थिति 74.9 फीसदी भी रह गई, तो पोर्टल पर ‘No’ दर्ज होते ही छात्र योजना की पात्रता सूची से बाहर हो जाएगा।

​2025 की ढील के बाद 2026 में दोबारा सख्ती क्यों?

​सरकारी तंत्र के भीतर यह बदलाव अचानक नहीं आया है। वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने इस कड़े नियम में दो बार अस्थायी ढील दी थी। उस समय चुनावी और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए सत्र की शुरुआत में ही विद्यार्थियों के खातों में अग्रिम रूप से पोशाक और पाठ्य सामग्री की राशि भेजने की व्यवस्था की गई थी।

​लेकिन वित्तीय वर्ष 2026 आते ही विभाग ने पुराने नियम को पूरी सख्ती के साथ दोबारा बहाल कर दिया है।

​सचिवालय सूत्रों के अनुसार, पिछले साल दी गई छूट के कारण स्कूलों में फर्जी और दोहरे नामांकन की शिकायतें तेजी से बढ़ी थीं। कई ऐसे छात्र जो निजी विद्यालयों में नियमित पढ़ाई कर रहे थे, सरकारी स्कूलों के रजिस्टरों में केवल डीबीटी का लाभ लेने के लिए नामांकित पाए गए। कक्षाओं में वास्तविक उपस्थिति घटने लगी थी। इसी ‘घोस्ट एनरोलमेंट’ और सरकारी राजस्व के दुरुपयोग को रोकने के लिए विभाग ने ई-शिक्षाकोश की डिजिटल ट्रैकिंग को अनिवार्य शर्त बना दिया है।

​त्रिस्तरीय जांच का कड़ा चक्रव्यूह: स्कूल से जिला स्तर तक ऐसे पहुंचेगा डेटा

​इस बार पूरी प्रक्रिया केवल स्कूल के हाजिरी रजिस्टर तक सीमित नहीं रहेगी। गड़बड़ियों को शून्य करने के लिए शिक्षा विभाग ने तीन स्तरों पर जवाबदेही तय की है: 

[प्रधानाध्यापक स्तर] ➔ ई-शिक्षाकोश पर उपस्थिति (Yes/No) व आय डेटा सबमिट
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[प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO)] ➔ भौतिक व डिजिटल सत्यापन (स्वीकृत / अस्वीकृत / सुधार हेतु वापसी)
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[जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (योजना एवं लेखा)] ➔ अंतिम तकनीकी व वित्तीय अनुमोदन
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[PFMS पोर्टल ➔ DBT] ➔ छात्र के आधार लिंक बैंक खाते में सीधे राशि ट्रांसफर

1. प्रधानाध्यापक की पहली जवाबदेही

​विद्यालय के प्रधानाध्यापक अपने व्यक्तिगत स्कूल लॉगिन से ई-शिक्षाकोश पोर्टल खोलेंगे। वहां कक्षा-वार नामांकित सभी छात्र-छात्राओं की वास्तविक उपस्थिति दर्ज की जाएगी। उपस्थिति के साथ-साथ परिवार की वार्षिक आय ₹1.50 लाख के दायरे में है या नहीं, इसका विकल्प चुनकर डेटा सबमिट किया जाएगा।

​2. प्रखंड स्तर (BEO) पर स्क्रूटनी

​हेडमास्टर द्वारा सबमिट किया गया डेटा सीधे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) के पोर्टल डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होगा। बीईओ स्तर पर आंकड़ों का रैंडम और भौतिक सत्यापन किया जाएगा। यदि किसी विद्यालय के आंकड़ों में असामान्यता या त्रुटि पाई जाती है, तो बीईओ के पास डेटा रिजेक्ट करने और सुधार के लिए वापस स्कूल लॉगिन पर भेजने का अधिकार होगा।

​3. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) की अंतिम मुहर

​प्रखंड से स्वीकृत डेटा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (योजना एवं लेखा) के पास जाएगा। जिला स्तर पर अंतिम संतुष्टि के बाद ही संचिका को वित्तीय स्वीकृति दी जाएगी।

​अनुमोदन मिलते ही पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के माध्यम से लाभार्थियों के सीधे बैंक खातों में राशि क्रेडिट कर दी जाएगी।

​सत्यापन और प्रक्रिया समय-सारणी: एक नजर में

चरण / स्तरजिम्मेदार प्राधिकारीमुख्य दायित्वत्रुटि होने पर कार्रवाई
प्रथम स्तरप्रधानाध्यापक (HM)1 अप्रैल से 30 सितंबर की उपस्थिति और आय की प्रविष्टिगलत डेटा दर्ज करने पर जवाबदेही तय
द्वितीय स्तरप्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO)आंकड़ों की जांच और ब्लॉक स्तर पर अप्रूवल/रिजेक्शनआपत्ति होने पर फॉर्म विद्यालय को वापस लौटाना
तृतीय स्तरDPO (योजना एवं लेखा)जिला स्तर पर वित्तीय व तकनीकी अंतिम संस्तुतिअस्वीकृति पर बजट जारी नहीं होगा
अंतिम चरणPFMS / राज्य नोडल बैंकप्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भुगतानखाता अमान्य होने पर ट्रांजेक्शन फेल

1.50 लाख रुपये की आय सीमा: अभिभावकों के लिए समझना क्यों जरूरी?

​हाजिरी के अलावा इस आदेश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—पारिवारिक आय सीमा।

​विभागीय नियमावली के अनुसार, उन विद्यार्थियों को ही प्राथमिकता और पात्रता दी जाएगी जिनके परिवार की वार्षिक आय 1.50 लाख रुपये तक है। पोर्टल पर इस बाबत भी ‘Yes’ या ‘No’ का कॉलम दिया गया है।

​अभिभावकों को ध्यान देना होगा कि उनका आय प्रमाण पत्र अद्यतन (अपडेटेड) होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में अंचल कार्यालय (RTPS) द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र को विद्यालय स्तर पर सत्यापित किया जाता है। यदि किसी छात्र की उपस्थिति 75% है लेकिन उसकी पारिवारिक आय सीमा 1.50 लाख रुपये से अधिक दर्ज हो जाती है, तो वह योजना के लाभ से वंचित हो सकता है।

​किन प्रमुख योजनाओं पर पड़ेगा सीधा असर?

​बिहार सरकार स्कूली शिक्षा में ड्रॉपआउट रोकने और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाती है। 75% उपस्थिति की अनिवार्यता सीधे तौर पर निम्नलिखित योजनाओं के बजट वितरण को प्रभावित करेगी: 

योजना का नामलक्षित वर्ग / कक्षाउद्देश्य व लाभउपस्थिति की अनिवार्यता
मुख्यमंत्री बालक/बालिका साइकिल योजनाकक्षा 9 के नियमित छात्र-छात्राएंदूर-दराज के क्षेत्रों से हाई स्कूल आने-जाने के लिए साइकिल क्रय हेतु एकमुश्त ₹3,000 की सहायता75% अनिवार्य (1 अप्रैल–30 सितंबर)
मुख्यमंत्री पोशाक योजनाकक्षा 1 से 12 तक के छात्र-छात्राएं (कक्षावार राशि निर्धारित)विद्यालय गणवेश (Uniform) की खरीद हेतु डीबीटी सहायता राशि75% अनिवार्य
मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य योजनाकक्षा 7 से 12 की छात्राएंसेनेटरी नैपकिन क्रय हेतु वार्षिक वित्तीय सहायता75% अनिवार्य
पूर्व-दशम एवं अन्य छात्रवृत्तियांकक्षा 1 से 10 तक के पात्र विद्यार्थीशैक्षणिक प्रोत्साहन एवं पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने हेतु75% अनिवार्य

प्रधानाध्यापकों की बढ़ी चुनौती: वास्तविक और डिजिटल उपस्थिति का मिलान

​नए आदेश ने प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ा दी है।

​अब तक उपस्थिति दर्ज करने में कागजी रजिस्टरों पर मनमानी की जो गुंजाइश बची रहती थी, ई-शिक्षाकोश की दैनिक डिजिटल मॉनिटरिंग ने उसे लगभग समाप्त कर दिया है। विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा कागजी रजिस्टर और ई-शिक्षाकोश पोर्टल के दैनिक आंकड़ों में विसंगति पाई गई, तो संबंधित हेडमास्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी।

​जिलों में तैनात जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को आदेश दिया गया है कि वे विशेष उड़नदस्ते बनाकर प्रखंडों के विद्यालयों का औचक निरीक्षण करें।

​विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी परामर्श

​योजनाओं की राशि अटकने से बचाने के लिए छात्रों और अभिभावकों को निम्नलिखित तकनीकी बिंदुओं पर तुरंत ध्यान देना चाहिए:

  1. ​बैंक खाता आधार से सीडेड (Aadhaar Seeding) हो: कई बार छात्र का खाता बैंक में खुला होता है लेकिन वह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) मैपर पर आधार से लिंक नहीं होता। PFMS के जरिए डीबीटी केवल आधार-सीडेड सक्रिय खातों में ही सफल होता है।
  1. ​दैनिक उपस्थिति की पुष्टि: छात्र सुनिश्चित करें कि विद्यालय में उनकी दैनिक हाजिरी ई-शिक्षाकोश प्रणाली में नियमित दर्ज हो रही है।
  2. ​आय व अन्य प्रमाणपत्रों का अद्यतनीकरण: यदि विद्यालय द्वारा आय से संबंधित स्व-घोषणा या प्रमाणपत्र मांगा जाता है, तो उसे समय सीमा के भीतर प्रधानाध्यापक को उपलब्ध कराएं।

​छह महीने की इस समयावधि (अप्रैल से सितंबर) का डेटा अब अंतिम रूप ले रहा है। स्पष्ट है कि बिहार के सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ नामांकन करा लेने भर से सरकारी खजाने का लाभ नहीं मिलेगा; योजना का हकदार वही होगा जो वास्तव में कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई कर रहा है।

Ravi Kumar

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar 13 year of teaching experience in multiple government school of Bihar.

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