auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के शिक्षकों के लिए सक्षमता परीक्षा के बावजूद CTET या TET पास करना अनिवार्य कर दिया है।
◾️2.60 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में है, और 60 हजार बुजुर्ग शिक्षकों का प्रमोशन रुक जाएगा।
◾️यदि 2028 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं की, तो शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया जाएगा या करियर ग्रोथ फ्रीज कर दी जाएगी।
◾️शिक्षकों के पास 2027 और 2028 के दौरान परीक्षा पास करने के लिए केवल 3 मौके शेष बचे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2.60 लाख शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक CTET पास करना होगा, बचे हैं सिर्फ 3 मौके।
2.60 लाख, यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि बिहार के उन शिक्षकों की संख्या है जिनकी नौकरी पर अब सीधा संकट आ खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़े निर्देश में साफ कर दिया है कि राज्य में सक्षमता परीक्षा (Sakshamta Pariksha) पास कर चुके शिक्षकों को भी अपनी नौकरी बचाने के लिए अब सीटीईटी (CTET) या टीईटी (TET) पास करना अनिवार्य होगा। शिक्षकों के पास खुद को साबित करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का अल्टीमेटम है।
बिहार में फिलहाल राज्य स्तर पर टीईटी परीक्षा आयोजित नहीं हो रही है। इस वजह से इन शिक्षकों के पास अब केवल केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) का ही विकल्प शेष है। साल 2025 की परीक्षा का अवसर उनके हाथ से निकल चुका है, जिसका सीधा अर्थ है कि 2028 की डेडलाइन से पहले अब उनके पास केवल 2027 और 2028 के रूप में महज 3 मौके बचे हैं।
55 वर्ष उम्र पार के शिक्षकों को राहत, लेकिन तरक्की पर ब्रेक
इस पूरी कवायद में बुजुर्ग शिक्षकों के लिए एक अलग रास्ता तय किया गया है। जिन शिक्षकों की उम्र 55 वर्ष से अधिक हो चुकी है, उन्हें नौकरी से तो नहीं निकाला जाएगा, लेकिन उनकी तरक्की के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे।
राज्य के ऐसे करीब 60 हजार शिक्षकों का करियर ग्रोथ अब पूरी तरह से फ्रीज हो जाएगा। इसका सीधा असर उनके पद पर पड़ेगा। बिना टीईटी या सीटीईटी के वे कभी प्रधानाध्यापक (Headmaster) नहीं बन पाएंगे, और न ही उन्हें उनके लंबे अनुभव का कोई अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
फिलहाल कुल 5.80 लाख शिक्षकों में से लगभग आधे ‘रडार’ पर हैं।
15 साल पुराना नियम और संघ का विरोध
आखिर यह नौबत क्यों आई? राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 29 जुलाई 2011 को ही शिक्षकों के लिए टीईटी या सीटीईटी की न्यूनतम योग्यता को अनिवार्य कर दिया था। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की सभी नियुक्तियां इन्हीं नियमों के मुताबिक ही होंगी।
”2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम थोपना सरासर अन्याय है।” यह कहना है बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव आनंद मिश्रा का। उन्होंने इस फैसले को गलत ठहराते हुए पुराने शिक्षकों पर इसके प्रभाव का कड़ा विरोध किया है।
शिक्षा परिषद के मुताबिक, टीईटी पास शिक्षक केवल अपने स्थानीय स्कूल या राज्य तक सीमित रहते हैं, जबकि सीटीईटी पास करने के बाद अभ्यर्थी देश भर के केंद्रीय विद्यालय (KVS), नवोदय (NVS) और दिल्ली के स्कूलों में भी नियुक्ति पाने के योग्य हो जाते हैं।