auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️बिहार सरकार ने पहली से पांचवीं कक्षा तक पांच क्षेत्रीय भाषाओं (मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही, अंगिका) को अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाने, जर्जर स्कूलों की जांच कराने, सिमरी में गुरुकुल स्थापित करने और दिवाली से पूर्व डीबीटी राशि जारी करने का निर्णय लिया है।
◾️5 क्षेत्रीय भाषाएं, 700 मॉडल स्कूल, बक्सर सिमरी गुरुकुल के लिए 5 एकड़ भूमि, और शिक्षक मामलों के लिए 15 दिन की बाध्यकारी समय-सीमा।
◾️प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा से बुनियादी साक्षरता सुधरेगी, बालिकाओं को दिवाली से पहले छात्रवृत्ति मिलेगी और ई-शिक्षाकोष से जर्जर स्कूल भवनों की त्वरित मरम्मत संभव होगी।
◾️10 अक्टूबर को बापू सभागार में राज्यस्तरीय 'सेवा चित्र' समारोह होगा, एक महीने में मदरसों की जांच रिपोर्ट आएगी और दीपावली से पूर्व डीबीटी राशि खातों में भेजी जाएगी।

मैथिली, मगही, भोजपुरी, अंगिका और बज्जिका को प्राथमिक पाठ्यक्रम में जोड़ने की तैयारी; दिवाली से पहले छात्राओं को मिलेगा डीबीटी लाभ।
बिहार के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में अब बच्चे अपनी स्थानीय मातृभाषा में पढ़ाई की शुरुआत करेंगे। पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका में से एक अतिरिक्त क्षेत्रीय भाषा पढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने तेजी से काम शुरू कर दिया है।
पटना स्थित विकास भवन में आयोजित शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दो टूक कहा कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों को उनकी अपनी बोली और परिवेश से जोड़ना सीखने की प्रक्रिया को स्वाभाविक और मजबूत बनाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की मूल भावना को जमीन पर उतारते हुए राज्य सरकार क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिक शिक्षा के मुख्य ढांचे में समाहित करने के लिए आवश्यक पाठ्यक्रम तैयार कर रही है।
इस समीक्षा बैठक में प्राथमिक भाषा नीति के अलावा स्कूलों के भौतिक ढांचे, शिक्षकों की सेवा शर्तों, छात्रवृत्ति योजनाओं के डीबीटी भुगतान और उच्च शिक्षण संस्थानों में पीएचडी शोध की निगरानी को लेकर कई कड़े और दूरगामी फैसले लिए गए।
मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा: पांच क्षेत्रीय भाषाओं का नया खाका
प्राथमिक कक्षाओं में भाषा की बंदिशें अक्सर बच्चों के बौद्धिक विकास और संवाद में बाधा बनती रही हैं। इसी गतिरोध को तोड़ने के लिए शिक्षा विभाग ने बिहार की पांच प्रमुख लोकभाषाओं—मैथिली, भोजपुरी, मगही, बज्जिका और अंगिका—को औपचारिक स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है।
योजना के तहत राज्य के अलग-अलग भाषाई अंचलों के आधार पर स्कूलों में इनमें से किसी एक अतिरिक्त क्षेत्रीय भाषा के पठन-पाठन का विकल्प दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, मिथिलांचल के स्कूलों में मैथिली, शाहाबाद और सारण प्रमंडल में भोजपुरी, मगध क्षेत्र में मगही, तिरहुत अंचल में बज्जिका तथा अंग क्षेत्र में अंगिका को प्राथमिकता मिलेगी।
“पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका में से एक अतिरिक्त भाषा पढ़ाने की दिशा में विभाग तेजी से कदम उठा रहा है। इसके साथ ही विद्यालयों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा और आधुनिक आधारभूत संरचना को समानांतर रूप से मजबूत किया जाएगा।”
— मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री, बिहार
विभाग का मानना है कि प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा में संवाद स्थापित होने से छात्रों में ड्रॉपआउट दर कम होगी और उनकी विषयगत समझ में गुणात्मक सुधार आएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के माध्यम से इन भाषाओं की अध्ययन सामग्री और बाल साहित्य तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
सिमरी में सत्य साईं आश्रम के मॉडल पर बनेगा ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’
बिहार के बक्सर जिले अंतर्गत सिमरी में एक आधुनिक ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’ की स्थापना की जाएगी। समीक्षा बैठक के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत रूपरेखा और आर्किटेक्चरल डिजाइन प्रस्तुत किया गया।
हाल ही में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विषय-विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक स्थित सत्य साईं आश्रम का दौरा किया था। उस अध्ययन दल ने वहां की शैक्षणिक व्यवस्था, छात्रावास प्रबंधन, नैतिक मूल्य आधारित शिक्षण पद्धति और आधुनिक अधोसंरचना का गहन मुआयना किया। बैठक में उसी अध्ययन दल ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसके आधार पर सिमरी गुरुकुलम का विस्तृत मॉडल फाइनल किया गया है।
मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि सिमरी में गुरुकुलम विद्यापीठ की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। यदि भविष्य में आवासीय परिसरों, प्रयोगशालाओं या खेल मैदानों के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता महसूस हुई, तो जिला प्रशासन के समन्वय से और भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। यह विद्यापीठ प्राचीन भारतीय गुरुकुल परंपरा के नैतिक अनुशासन और 21वीं सदी के विज्ञान-प्रौद्योगिकी शिक्षण का अनूठा संगम होगा।
डेटा टेबल: बिहार शिक्षा विभाग समीक्षा बैठक 2026 — मुख्य घोषणाएं व समय-सीमा
| क्रमांक | नीतिगत क्षेत्र / विषय | स्वीकृत निर्णय | लक्षित वर्ग / क्षेत्र | क्रियान्वयन समय-सीमा |
|---|---|---|---|---|
| 1 | प्राथमिक भाषा नीति | 1 से 5वीं कक्षा तक मैथिली, भोजपुरी, मगही, बज्जिका व अंगिका की पढ़ाई | राज्य के सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालय | वर्तमान शैक्षणिक सत्र से चरणबद्ध |
| 2 | आवासीय गुरुकुल शिक्षा | बक्सर के सिमरी में ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’ का निर्माण (सत्य साईं मॉडल) | सिमरी, बक्सर (5 एकड़ भूमि उपलब्ध) | डिजाइन प्रस्तुत, भूमि आवंटन पूर्ण |
| 3 | स्कूल सुरक्षा व जांच | सभी जर्जर सरकारी स्कूल भवनों की अभियंताओं द्वारा तकनीकी जांच | राज्यभर के असुरक्षित व पुराने विद्यालय | ई-शिक्षाकोष पर अविलंब फोटो अपलोड |
| 4 | डीबीटी कल्याणकारी योजनाएं | मुख्यमंत्री कन्या उत्थान एवं बालिका प्रोत्साहन योजना राशि का अंतरण | पात्र छात्राएं व सामाजिक लाभार्थी | दीपावली 2026 से पूर्व |
| 5 | संस्कृत बोर्ड व मदरसा | मध्यमा पास छात्रों को +2 की पढ़ाई; मदरसों व संस्कृत स्कूलों की जांच | संस्कृत व मदरसा शिक्षा प्रणाली | जांच रिपोर्ट 1 महीने के भीतर |
| 6 | शिक्षक सेवा निवारण | DPO स्तर पर लंबित मामलों का 15 दिनों में अनिवार्य निष्पादन | राज्य के नियोजित व नियमित शिक्षक | 15 दिन बाद मुख्यालय को रेफरल |
| 7 | शोध गुणवत्ता (Higher Edu) | विश्वविद्यालयों में विशेष पीएचडी शोध निगरानी सेल का गठन | राज्य के सभी राज्य विश्वविद्यालय | पीएचडी रेगुलेशन-2026 के तहत |
जर्जर स्कूल भवनों की होगी तकनीकी जांच: अभियंताओं की टीम करेगी निरीक्षण
मानसून और समय के थपेड़ों से जर्जर हो चुके स्कूल भवनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। समीक्षा बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राज्य के प्रत्येक सरकारी विद्यालय के जर्जर और पुराने भवनों की तकनीकी जांच (Structural Safety Audit) कराई जाएगी।
इसके लिए भवन निर्माण और संबंधित कार्य विभागों के योग्य कनिष्ठ व सहायक अभियंताओं की विशेष टीम गठित की जा रही है, जो सीधे स्कूलों में जाकर भवनों की लोड-बेयरिंग क्षमता, छत और दीवारों की मजबूती की जांच करेगी।
प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। हर सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया गया है कि वे अपने विद्यालय परिसर के जर्जर, क्षतिग्रस्त अथवा असुरक्षित कमरों की स्पष्ट तस्वीरें ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। पोर्टल पर प्राप्त फोटोग्राफ और जियो-टैगिंग डेटा के आधार पर प्राथमिक सूची बनेगी, जिसके बाद अभियंताओं की टीम जमीनी सत्यापन कर असुरक्षित हिस्सों को गिराने या तत्काल मरम्मत कराने की सिफारिश करेगी। असुरक्षित भवनों में कक्षाएं चलाने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाएगी।
तालिका: क्षेत्रीय भाषाओं का भौगोलिक प्रभाव क्षेत्र और प्रस्तावित वितरण
| क्षेत्रीय भाषा | पारंपरिक भौगोलिक क्षेत्र (बिहार) | मुख्य जिले |
|---|---|---|
| मैथिली | मिथिलांचल | दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सुपौल |
| भोजपुरी | शाहाबाद एवं सारण अंचल | भोजपुर, बक्सर, रोहतास, सारण, सीवान, गोपालगंज |
| मगही | मगध प्रमंडल | पटना ग्रामीण, गया, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, औरंगाबाद |
| बज्जिका | वैशाली एवं तिरहुत क्षेत्र | वैशाली, मुजफ्फरपुर, शिवहर |
| अंगिका | अंग प्रदेश | भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई |
दीपावली से पहले खातों में पहुंचेगी कन्या उत्थान और प्रोत्साहन राशि
त्योहारी सीजन से पहले राज्य के छात्र-छात्राओं, विशेषकर बालिकाओं के लिए बैठक से बड़ी राहत भरी खबर आई है। शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना सहित सभी प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं की राशि दीपावली से पहले सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जाए।
यह भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के जरिए पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि किसी भी स्तर पर तकनीकी अड़चनों या पोर्टल मिलान की देरी के कारण छात्राओं का पैसा नहीं रुकना चाहिए। वित्तीय वर्ष के लंबित दावों का सत्यापन युद्धस्तर पर पूरा करने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को जवाबदेह बनाया गया है।
संस्कृत बोर्ड से प्लस-टू की पढ़ाई और मदरसों की 30 दिन में जांच
पारंपरिक प्राच्य विद्या से जुड़े विद्यार्थियों के उच्चतर माध्यमिक भविष्य को लेकर भी बैठक में बड़ा नीतिगत विमर्श हुआ। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड से ‘मध्यमा’ (मैट्रिक समकक्ष) उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को अब सीधे संस्कृत बोर्ड के माध्यम से ही प्लस-टू (+2 / उत्तर मध्यमा स्तर) की पढ़ाई की औपचारिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
वर्तमान में मध्यमा पास छात्रों को उच्चतर कक्षाओं के लिए सामान्य इंटरमीडिएट कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनकी पारंपरिक भाषा साधना बाधित होती थी। इस नई व्यवस्था को कानूनी और संस्थागत रूप देने के लिए बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड से जुड़े प्रासंगिक एक्ट और नियमों में आवश्यक विधायी संशोधन किए जाएंगे।
इसके साथ ही, शिक्षा मंत्री ने राज्यभर के अनुदानित संस्कृत विद्यालयों और मदरसों की चल रही जांच प्रक्रिया को एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करने का सख्त आदेश दिया। उन्होंने कहा कि अनुदान और मान्यता से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सर्वोपरि है और किसी भी गैर-मानक संस्थान को छूट नहीं मिलेगी।
शिक्षक समस्याओं पर शिक्षा सचिव का अल्टीमेटम: 15 दिन में हो निपटारा
प्रशासनिक मोर्चे पर, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने शिक्षकों के सेवा मामलों में जिला स्तर पर होने वाली लेटलतीफी पर कड़ा रुख अपनाया। बैठक में सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO – स्थापना) को शिक्षकों की सेवा, वेतन विसंगति, मातृत्व अवकाश, प्रोन्नति और अन्य प्रशासनिक दावों के लंबित मामलों को तत्काल निपटाने का आदेश दिया गया।
सचिवालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किया कि यदि शिक्षक के आवेदन के 15 दिनों के बाद भी मामला जिला स्तर पर अकारण लंबित रहता है, तो संबंधित फाइल सीधे संबंधित प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षा निदेशक और विभागीय सचिव के डैशबोर्ड पर आ जाएगी।
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा गया कि शिक्षकों को अपने जायज काम के लिए जिला कार्यालयों के चक्कर काटने पर मजबूर करने वाले पदाधिकारियों के विरुद्ध निलंबन और सेवा निष्कासन तक की कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
700 मॉडल स्कूल, वीबी-जी राम जी मिशन और ‘सेवा चित्र’ अभियान
समीक्षा बैठक के दौरान प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक कई अन्य दूरगामी कार्यक्रमों की प्रगति भी परखी गई:
- 700 मॉडल स्कूलों का सुदृढ़ीकरण: ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ की तर्ज पर विकसित किए जा रहे राज्य के 700 मॉडल स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और परिणामोन्मुखी शिक्षा के विस्तार पर रणनीति बनाई गई।
- वीबी-जी राम जी मिशन से ढांचागत विकास: विद्यालयों के दीर्घकालिक कायाकल्प और ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण के लिए ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के अभिसरण (Convergence) से निर्माण कार्य कराने पर विमर्श हुआ।
- ‘मेरे सपनों का भारत : सेवा चित्र’ अभियान: आगामी 10 अक्टूबर को पटना स्थित बापू सभागार में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की गई। इस अभियान के तहत स्कूली बच्चों में कला और निबंध प्रतियोगिताओं के जरिए राष्ट्र निर्माण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा में सख्त सुधार: विश्वविद्यालयों में पीएचडी शोध निगरानी सेल
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला उच्च शिक्षा और अकादमिक शोध की साख बचाने से जुड़ा है। राज्य के सभी पारंपरिक विश्वविद्यालयों में पीएचडी नामांकन और शोध प्रबंधों (Dissertation/Thesis) की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखने के लिए एक विशेष ‘पीएचडी शोध निगरानी सेल’ (PhD Research Monitoring Cell) का गठन किया जाएगा।
यह विशेष सेल सुनिश्चित करेगा कि विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नए दाखिले केवल निर्धारित पीएचडी ऑर्डिनेंस और ‘पीएचडी रेगुलेशन-2026’ के कड़े प्रावधानों के तहत ही संपन्न हों। फर्जी शोध पत्रिकाओं (Predatory Journals) में प्रकाशन, गाइड आवंटन में मनमानी, थीसिस में साहित्यिक चोरी (Plagiarism) और शोध नामांकन में आरक्षण नियमों की अनदेखी को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शोध की गुणवत्ता से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा।
समग्र प्रभाव: बिहार में शिक्षा सुधार का बहुस्तरीय ढांचा
विकास भवन में संपन्न हुई यह बैठक दर्शाती है कि बिहार सरकार प्राथमिक शिक्षा की स्थानीयता से लेकर विश्वविद्यालयी शोध के वैश्विक मानकों तक एक साथ काम करने की योजना बना रही है। प्राथमिक कक्षाओं में मातृभाषा की स्वीकार्यता बच्चों के सीखने की नींव को मजबूत करेगी, वहीं ई-शिक्षाकोष के माध्यम से जर्जर भवनों की पहचान और 15 दिनों में शिक्षक समस्याओं का निपटारा प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम है। आगामी 10 अक्टूबर का बापू सभागार कार्यक्रम और दीपावली से पहले डीबीटी भुगतान इस पूरी कार्ययोजना को तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारने की कसौटी साबित होंगे।


