auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षाकोष ऐप 3.6.0 लॉन्च किया; मिड डे-मील राशन के लिए छात्रों की फेस स्कैनिंग अनिवार्य।
◾️ राज्य के करीब 1.09 करोड़ स्कूली बच्चों की डिजिटल ट्रैकिंग होगी।
◾️कागजी हाजिरी का फर्जीवाड़ा (जैसे 50 की जगह 120 बच्चे दिखाना) और राशन चोरी पूरी तरह रुकेगी।
◾️11 बजे तक डेटा अपलोड न करने वाले प्रधानाध्यापकों पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

बिहार में मिड डे-मील राशन अब छात्रों की फेस स्कैनिंग से मिलेगा। प्रधानाध्यापकों को सुबह 11 बजे तक ऐप पर डेटा देना होगा।
बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे-मील (Mid-Day Meal) वितरण में होने वाले फर्जीवाड़े और राशन चोरी पर शिक्षा विभाग ने सीधा प्रहार किया है। राज्य के करीब 1.09 करोड़ स्कूली बच्चों को मिलने वाले पोषाहार का डेटा अब पूरी तरह से डिजिटल होने जा रहा है। विभाग ने ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल का नया ऐप वर्जन 3.6.0 (e-Shikshakosh 3.6.0 app) लॉन्च कर दिया है, जिसके तहत राशन का आवंटन अब सिर्फ छात्रों की फेस स्कैनिंग (Face Scanning) और वीडियो उपस्थिति के आधार पर ही किया जाएगा।
अब तक कई स्कूलों में छात्रों की वास्तविक उपस्थिति कम होने के बावजूद, रजिस्टर में 120 या उससे अधिक छात्र दिखाकर राशन और राशि की निकासी कर ली जाती थी। नई व्यवस्था से कागजों पर फर्जी संख्या दिखाकर खाद्यान्न खपत दर्ज कराने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
अगर सुबह 11 बजे तक किसी स्कूल से ई-शिक्षाकोष ऐप पर डेटा अपलोड नहीं होता है, तो संबंधित प्रधानाध्यापक (Headmaster) के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव काउंटिंग से निगरानी
नए ऐप वर्जन 3.6.0 में श्रम, स्वास्थ्य और सैन्य क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले एडवांस्ड मॉडलिंग और एनिमेशन सॉफ्टवेयर को शामिल किया गया है।
जिस तरह मनरेगा जैसी योजनाओं में मजदूरों की उपस्थिति के लिए लाइव काउंटिंग और फेस स्कैनिंग का इस्तेमाल किया जाता है, ठीक उसी तकनीक से अब कक्षाओं में बैठे बच्चों के चेहरों को स्कैन किया जाएगा। रोजाना स्कूल खुलने के बाद, प्रधानाध्यापक को 11 बजे तक ऐप में तीन प्रमुख जानकारियां अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होंगी:
- उपस्थित छात्रों की संख्या
- भोजन करने वाले बच्चों का आंकड़ा
- खाने की गुणवत्ता का डेटा
मिड डे-मील के निदेशक विनायक मिश्र ने इस डिजिटल शिफ्ट पर स्पष्ट किया: “मिड डे-मील के रिकॉर्ड को रखने के लिए नए ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके माध्यम से छात्रों की उपस्थिति, भोजन करने वाले छात्रों की संख्या सहित अन्य जानकारी मिलेगी।”
फर्जी हाजिरी पर लगेगा पूर्ण विराम
इस डिजिटल बदलाव का सीधा असर दैनिक खपत के सटीक आकलन पर पड़ेगा। ऐप में मौजूद वीडियो रिकॉर्डिंग फीचर की मदद से छात्रों की वास्तविक गणना सुनिश्चित की जाएगी।
उपस्थित छात्रों के चेहरे स्कैन होने के बाद ही सिस्टम राशन का कैलकुलेशन करेगा। इससे न केवल सरकारी राशन की चोरी रुकेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि पोषाहार केवल उन बच्चों के नाम पर आवंटित हो जो वास्तव में कक्षा में मौजूद हैं।