auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️बिहार सरकार ने 1 करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने, 1,000 छात्राओं को ₹10,000 मासिक पीएचडी फेलोशिप देने और पूर्णतः महिला संचालित समर्पित विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की।
◾️उच्च शिक्षा में महिलाओं के ड्रॉपआउट को रोकने और एनडीए के सबसे बड़े 'साइलेंट कोर वोटर' वर्ग को सामाजिक व आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम।
◾️महिला आयोग से नीतिगत सुधार के प्रस्ताव मांगे गए हैं और समर्पित महिला विश्वविद्यालय की स्थापना पर प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है।

महिला आयोग के 25वें स्थापना दिवस पर राज्य में समर्पित महिला यूनिवर्सिटी खोलने और ‘बालिका शोध फेलोशिप’ की बड़ी घोषणा।
एक करोड़ महिलाओं के लिए आजीविका का सीधा तंत्र और उच्च शिक्षा में शोध कर रहीं छात्राओं को हर महीने 10 हजार रुपए की फेलोशिप।
शनिवार को पटना में बिहार राज्य महिला आयोग के 25वें स्थापना दिवस (रजत जयंती समारोह) के मंच से सम्राट चौधरी ने राज्य की आधी आबादी के सामाजिक और शैक्षणिक उन्नयन का यह विस्तृत खाका पेश किया। महिलाओं को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार की सबसे मजबूत ताकत और असली रीढ़ करार देते हुए उन्होंने राज्य में एक पूर्णतः समर्पित महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम चलने की बात कही।
पढ़ने से लेकर पढ़ाने तक सिर्फ महिलाएं: बनेगा नया विश्वविद्यालय
उच्च शिक्षा में महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वायत्त माहौल तैयार करने के मकसद से इस नए संस्थान की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सम्राट चौधरी ने मंच से साफ किया कि राज्य में बनने वाले इस समर्पित विश्वविद्यालय में पढ़ने से लेकर पढ़ाने तक का पूरा जिम्मा महिलाओं के ही पास होगा।
इसका अर्थ यह है कि शीर्ष प्रशासनिक पदों से लेकर संकाय सदस्यों और सहायक कर्मचारियों तक, परिसर का समूचा तंत्र केवल महिलाओं द्वारा संचालित होगा।
उच्च शिक्षा और शोध के लिए ‘बालिका पीएचडी फेलोशिप’
अकादमिक क्षेत्र में छात्राओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘बालिका पीएचडी फेलोशिप’ योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- लक्षित लाभार्थी: प्रत्येक वर्ष उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थानों से 1,000 मेधावी छात्राओं का चयन किया जाएगा।
- वित्तीय सहायता: चयनित शोधार्थियों को प्रति माह 10-10 हजार रुपए की छात्रवृत्ति सीधे उपलब्ध कराई जाएगी।
- उद्देश्य: आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षण संस्थानों से बाहर होने वाली बेटियों को शोध कार्य पूरा करने के लिए स्थायी वित्तीय संबल देना।
शोध के साथ-साथ जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए जीविका समूह और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के विस्तार पर बल दिया गया। सुरक्षा के मोर्चे पर रेखांकित किया गया कि स्कूल-कॉलेजों के निकट ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती सुनिश्चित करने की पहल देश भर में सबसे पहले बिहार ने ही लागू की थी।
समारोह के दौरान डाक विभाग के सहयोग से आयोग के आधिकारिक प्रतीक चिह्न (Logo) पर आधारित एक विशेष डाक टिकट जारी हुआ और आयोग की 25 वर्षों की यात्रा को दर्ज करती रजत जयंती स्मारिका का विमोचन किया गया। मंच पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा भी उपस्थित रहीं, जिन्होंने आयोग के कामकाज और प्राथमिकताओं पर विचार रखे।
शिकायतों के निपटारे से आगे बढ़े महिला आयोग: सम्राट
संबोधन के दौरान उन्होंने महिला आयोग की कार्यप्रणाली के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने का स्पष्ट आह्वान किया।
”राज्य महिला आयोग खुद को केवल पारिवारिक विवाद सुलझाने या औपचारिक शिकायतों की सुनवाई तक ही सीमित न रखे। आयोग राज्य सरकार को महिला सशक्तिकरण और नीतिगत सुधारों के लिए समय-समय पर आवश्यक सुझाव भी दे,” उन्होंने रेखांकित किया।
उनका तर्क था कि आयोग को महिलाओं के कानूनी संरक्षण के साथ-साथ उनके सामाजिक और राजनीतिक नेतृत्व को तराशने के केंद्र के रूप में भी उभरना चाहिए।
साइलेंट वोटर को साधे रखने की सोची-समझी बिसात
इन बड़ी कल्याणकारी घोषणाओं के सियासी निहितार्थ भी साफ देखे जा रहे हैं।
बिहार के चुनावी परिदृश्य में महिलाएं लंबे समय से एनडीए का सबसे अनुशासित ‘साइलेंट वोटर’ और वफादार कोर वोट बैंक मानी जाती रही हैं। पंचायती राज संस्थाओं में लागू 50 फीसदी आरक्षण और जीविका के आर्थिक नेटवर्क ने राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के जीवन स्तर में उल्लेखनीय बदलाव लाया है।
अब सीधे एक करोड़ महिलाओं को आजीविका से जोड़ने और उच्च शिक्षा में आर्थिक सुरक्षा देने की पहल, इसी मजबूत सामाजिक आधार को दीर्घकालिक रूप से साधे रखने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।