auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में कारपोरेट तर्ज पर 'पैरेंट्स', 'टीचर्स' और 'स्टूडेंट ऑफ द मंथ' सम्मान शुरू करने का निर्णय लिया है।
◾️मॉडल स्कूलों के शिक्षकों का चयन नवाचार और सिलेबस कवरेज पर, जबकि छात्रों का चयन हाजिरी और कक्षा एकाग्रता के आधार पर होगा।
◾️यह पहल स्कूलों में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने और शिक्षकों में नवाचारी शिक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए की गई है।
◾️स्कूलों को निर्धारित फॉर्म उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसके जरिए शिक्षकों और विद्यार्थियों का मासिक आकलन शुरू होगा।

कारपोरेट संस्कृति की तर्ज पर शिक्षा विभाग की नई पहल; रचनात्मक सुझाव देने वाले अभिभावकों और नवाचारी शिक्षकों को मिलेगा मंच
निजी कंपनियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर ‘इम्प्लाई ऑफ द मंथ’ का बोर्ड टंगना आम बात है। अब यही कारपोरेट तरीका बिहार के सरकारी स्कूलों की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनने जा रहा है।
राज्य के शिक्षा विभाग ने प्राथमिक से लेकर मॉडल स्कूलों तक तीन नए सम्मान शुरू करने का फैसला लिया है—’पैरेंट्स ऑफ द मंथ’, ‘टीचर्स ऑफ द मंथ’ और ‘स्टूडेंट ऑफ द मंथ’। इसका मकसद स्पष्ट है: पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (PTM) को सिर्फ औपचारिकता न बनाकर अभिभावक, शिक्षक और छात्र की जवाबदेही तय करना।
सुझाव देंगे तो मिलेगा सम्मान
सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तरह PTM अनिवार्य की जा चुकी है, लेकिन अब अभिभावकों को सिर्फ बच्चे की प्रगति सुनने के लिए ही नहीं आना होगा। उन्हें विद्यालय की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव भी देने होंगे।
अभिभावक जो भी सुझाव देंगे, संबंधित शिक्षक उसे बाकायदा नोट करेंगे। इसके बाद स्कूल के शिक्षकों की एक विशेष कमेटी उन सुझावों की समीक्षा करेगी। जिस अभिभावक का सुझाव स्कूल के विकास के लिए सबसे व्यावहारिक और उत्कृष्ट पाया जाएगा, उन्हें उस महीने ‘पैरेंट्स ऑफ द मंथ’ के खिताब से नवाजा जाएगा।
मॉडल स्कूलों में कैसे चुने जाएंगे ‘टीचर्स ऑफ द मंथ’?
शुरुआती चरण में विभाग ने इसे सभी मॉडल स्कूलों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए शिक्षकों को एक विशेष फॉर्म भरना होगा। इस फॉर्म के आधार पर दो मुख्य बातों की जांच होगी:
- शिक्षक ने विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कौन-से नए नवाचार (Teaching Innovations) अपनाए।
- सिलेबस तय समय-सीमा के अनुसार पूरा हुआ या नहीं।
मूल्यांकन सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा; स्कूल प्रबंधन इसमें विद्यार्थियों से भी फीडबैक लेगा।
हाजिरी और एकाग्रता से तय होंगे ‘स्टूडेंट ऑफ द मंथ’
छात्रों के लिए तय किए गए मानकों में सबसे अहम उनकी क्लास में उपस्थिति (Attendance) है। इसके अलावा गृहकार्य पूरा करने की निरंतरता, कक्षा में एकाग्रता और खेलकूद या अन्य स्कूल गतिविधियों में सक्रियता को भी परखा जाएगा। शिक्षकों द्वारा भरे जाने वाले फॉर्म के आधार पर ही महीने के सर्वश्रेष्ठ छात्र का चयन होगा।
तीनों श्रेणियों के मूल्यांकन के प्रमुख मानक
| श्रेणी | पात्रता का दायरा | प्रमुख मूल्यांकन मानक | चयन का आधार |
|---|---|---|---|
| पैरेंट्स ऑफ द मंथ | सभी सरकारी स्कूल | स्कूल व्यवस्था सुधार हेतु रचनात्मक एवं व्यावहारिक सुझाव | शिक्षकों की कमेटी द्वारा सुझावों की समीक्षा |
| टीचर्स ऑफ द मंथ | सभी मॉडल स्कूल | शिक्षण नवाचार, सिलेबस की समयबद्ध प्रगति | शिक्षक फॉर्म और विद्यार्थियों का फीडबैक |
| स्टूडेंट ऑफ द मंथ | सभी सरकारी स्कूल | नियमित हाजिरी, गृहकार्य, कक्षा में एकाग्रता, पाठ्येतर सक्रियता | शिक्षकों द्वारा भरा गया मूल्यांकन फॉर्म |
”विद्यालय में अभिभावक रुचि लें, शिक्षकों के बीच कुछ नया करने का भाव जगे तथा विद्यार्थियों की सक्रियता नजर आए, इसे केंद्र में रखकर इन सभी को सम्मानित करने की योजना शुरू की जा रही है। इसका सकारात्मक असर दिखेगा।”
— मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से अभिभावकों का स्कूलों से जुड़ाव केवल शिकायत तक सीमित न रहकर समाधानोन्मुखी बनेगा। वहीं, नवाचार करने वाले शिक्षकों और नियमित छात्रों को विद्यालय स्तर पर पहचान मिलेगी।