बिहार में 1 जुलाई की डेडलाइन फेल: न 211 डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू, न 5.88 लाख शिक्षकों का ट्रांसफर

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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

▪️बिहार सरकार की 1 जुलाई की डेडलाइन समाप्त होने के बावजूद नए डिग्री कॉलेजों, मॉडल स्कूलों में पढ़ाई और 5.88 लाख शिक्षकों का ट्रांसफर शुरू नहीं हो सका है।
▪️211 नए डिग्री कॉलेज और 572 मॉडल स्कूलों के लिए शिक्षकों की भारी कमी है; 14,000 स्कूलों में सरप्लस शिक्षक होने के बावजूद रेशनलाइजेशन नहीं हुआ है।
▪️रेशनलाइजेशन और विषयवार डेटा के अभाव में 60 हजार छात्रों की पढ़ाई रुकी हुई है और लाखों शिक्षक अपने ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं।
▪️अब यह संभावना जताई जा रही है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

बिहार में शिक्षकों की कमी के कारण बंद पड़ा नवनिर्मित मॉडल स्कूल भवन

शिक्षा विभाग की बिना डेटा के तैयारी भारी पड़ी, 60 हजार छात्रों का इंतजार बढ़ा; मंत्री ने कहा- प्रक्रिया अंतिम चरण में।

​एक तरफ बिहार सरकार ने जोर-शोर से ऐलान किया था कि 1 जुलाई से राज्य के 211 नवनिर्मित डिग्री कॉलेजों और 572 मॉडल स्कूलों में शानदार पढ़ाई शुरू हो जाएगी। दूसरी तरफ हकीकत यह है कि शिक्षकों की भारी कमी और डेटा के अभाव में एक भी संस्थान का ताला नहीं खुल सका है। 30 जून तक 5.88 लाख शिक्षकों के तबादले का दावा भी हवा-हवाई साबित हुआ है, क्योंकि विभाग अब तक ट्रांसफर पोर्टल ही नहीं खोल पाया है।

​राज्य के 211 प्रखंडों में खुलने वाले नए डिग्री कॉलेजों के लिए 60 हजार छात्रों ने आवेदन किया था। इन कॉलेजों को चलाने के लिए 6,752 शिक्षकों की जरूरत है। सरकार ने शुरुआत में स्कूलों के नेट (NET) और पीएचडी (PhD) पास शिक्षकों को कॉलेजों में भेजने का आदेश निकाला, लेकिन शिक्षकों के भारी विरोध के बाद यह फैसला वापस लेना पड़ा। नतीजा यह है कि छात्र अब भी डिग्री कॉलेज शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

​मॉडल स्कूलों का हाल भी इससे अलग नहीं है।

​प्रदेश के 38 जिलों में 572 मॉडल स्कूल खोलने की योजना है, जिसके लिए करीब 11 हजार शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। इसके लिए सरकार ने चयन के लिए 100 अंकों का कड़ा मानक तय करते हुए 70% अंक लाना अनिवार्य किया था। लेकिन पूरे बिहार से सिर्फ 200 शिक्षक ही इस मानक पर खरे उतरे। सरकार ने आनन-फानन में मेरिट लिस्ट का कट-ऑफ घटाकर 50% कर दिया, इसके बावजूद स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक नहीं मिल सके।

​बिना डेटा के सुधार का दावा, मंत्री ने दीं 10 तारीखें

​दैनिक भास्कर के एनालिसि‍स के अनुसार, शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी नाकामी डेटा की कमी है। राज्य के 14 हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां मानक से कहीं अधिक शिक्षक तैनात हैं। विभाग ने अब तक इन शिक्षकों का रेशनलाइजेशन (पदों का मिलान) नहीं किया है, जिस कारण यह ही पता नहीं चल पा रहा कि किस स्कूल में कितनी रिक्तियां हैं।

​शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने 29 मई से लेकर 25 जून तक तबादले पूरे करने की करीब 10 अलग-अलग तारीखें दीं, लेकिन विषयवार डेटा न होने के कारण पोर्टल नहीं खुल सका। सीएम सम्राट चौधरी ने भी नए सत्र से मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज में पढ़ाई शुरू करने की बात कही थी, लेकिन स्थिति जस की तस है।

​इन सब के बीच, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सफाई देते हुए कहा: “पूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है, समस्याएं दूर हो रही हैं। बिहार में 5.80 लाख से अधिक शिक्षकों का ट्रांसफर होना है। नई नीति कैबिनेट से पास हो चुकी है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जो भी समस्याएं आ रही हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है।”

​फिलहाल, विभाग के पास स्पष्ट डेटा न होने के कारण अब संभावना जताई जा रही है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक ही यह ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar

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