auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️दारोगा मुख्य परीक्षा के दौरान वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने अनुपस्थित छात्रों की दो प्रश्न पत्र बुकलेट चुराकर 6 मिनट के भीतर व्हाट्सएप पर लीक कर दीं।
◾️6 मिनट में पर्चा लीक; बुकलेट क्रमांक 22532773 और 22532780; बिहार पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 की धारा 3, 9 व 10(1) के तहत चार्जशीट।
◾️ परीक्षा की सुरक्षा में गंभीर सेंधमारी, केंद्र पर जैमर व मोबाइल प्रतिबंध नियमों की विफलता और संगठित सॉल्वर गिरोह तक पेपर पहुंचने का खतरा।
◾️केस डायरी और चार्जशीट ईओयू (EOU) को सौंपी गई है; फरार आरोपी पप्पू कुमार के खिलाफ इश्तेहार व कुर्की की अग्रिम कार्रवाई लंबित है।

पूर्णिया साइबर थाने की केस डायरी से खुलासा—कमरा नंबर 23 से उठाईं 2 बुकलेट, सीढ़ी के नीचे मोबाइल से फोटो खींच ममेरे भाई को भेजीं।
महज छह मिनट। दोपहर 2 बजकर 44 मिनट से 2 बजकर 50 मिनट के बीच दारोगा बहाली मुख्य परीक्षा की शुचिता तार-तार कर दी गई। पूर्णिया के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने रूम नंबर 23 से अनुपस्थित अभ्यर्थियों के दो खाली प्रश्न पत्र उठाए, सीढ़ियों के नीचे बने स्टोररूम में ले जाकर मोबाइल से उनकी तस्वीरें उतारीं और अपने ममेरे भाई पप्पू कुमार को व्हाट्सएप कर दीं।
कमरे से प्रश्न पत्र बाहर निकला, लकड़ी की मेज पर रखकर फोटो खींची गई, तस्वीरें भेजी गईं और साक्ष्य मिटाने के लिए चैट डिलीट कर दी गई।
पूर्णिया साइबर थाने की केस डायरी और 25 जुलाई को दाखिल आरोप पत्र (चार्जशीट) ने इस सुनियोजित सेंधमारी की पूरी कड़ियां जोड़ दी हैं। पुलिस तफ्तीश में मृत्युंजय के खिलाफ ‘द बिहार पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024’ की धारा 3, 9 और 10(1) के तहत लगाए गए आरोप सत्य पाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए केस डायरी और चार्जशीट आगे की कार्रवाई के लिए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को सौंप दी गई है।
रूम नंबर 23 से स्टोररूम तक: मिनट-दर-मिनट ऐसे रची गई साजिश
केस डायरी के अनुसार, परीक्षा शुरू होने के 10 मिनट के भीतर अनुपस्थित छात्रों के खाली प्रश्न पत्र उसी कक्ष में सील किए जाने थे। लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दोपहर 2:44 बजे वीक्षक मृत्युंजय कुमार रूम नंबर 23 में दाखिल हुआ। उसने अनुपस्थित छात्रों की दो अनयूज्ड प्रश्न पत्र बुकलेट (क्रमांक 22532773 और 22532780) उठा लीं और उन्हें सील करने के बजाय चुपचाप अपनी फाइल में दबा लिया।
जब वह बिना सील किए दोनों बुकलेट कमरे से बाहर ले जाने लगा, तो साथी वीक्षकों अजीत कुमार चौधरी और रंजना कुमारी ने उसे टोका। दोनों ने परीक्षा सामग्री को बाहर ले जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।
मृत्युंजय ने तत्काल झूठ बोलते हुए कहा कि वह बुकलेट कार्यालय में ले जाकर सील करेगा।
कार्यालय जाने के बजाय मृत्युंजय सीधे सीढ़ियों के नीचे बने स्टोररूम में जा घुसा। वहां रखी लकड़ी की मेज पर दोनों प्रश्न पत्र रखे और अपने वीवो (Vivo) मोबाइल से उनके पन्नों की तस्वीरें खींचीं। दोपहर 2:44 से 2:50 बजे के बीच तस्वीरें ममेरे भाई पप्पू कुमार के मोबाइल पर भेज दी गईं। काम पूरा होते ही मृत्युंजय ने पकड़े जाने के डर से व्हाट्सएप चैट को तुरंत डिलीट कर दिया।
सुरक्षा तंत्र की तीन बड़ी कमियां, जिन्होंने खोला धांधली का रास्ता
जांच रिपोर्ट ने परीक्षा संचालन की जमीनी हकीकत और केंद्र स्तर पर बरती गई घोर लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं:
- प्रतिबंधित फोन का केंद्र में प्रवेश: परीक्षा केंद्र के भीतर मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित था। इसके बावजूद मृत्युंजय मोबाइल लेकर अंदर पहुंचा और कॉरिडोर में फोन चलाते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया।
- 10 मिनट के सीलिंग नियम का उल्लंघन: गाइडलाइन के अनुसार अनुपस्थित परीक्षार्थियों के प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने के 10 मिनट के भीतर संबंधित कमरे में ही सील होने चाहिए थे। केंद्र के जिम्मेदारों ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि दोनों बुकलेट समय पर सील हुईं या नहीं।
- मुख्य सूत्रधार अब भी फरार: प्रश्न पत्र हासिल करने वाला मुख्य किरदार पप्पू कुमार पुलिस की पकड़ से बाहर है। गंगा में आई बाढ़ के कारण पुलिस उसके घर पर इश्तेहार चस्पा नहीं कर सकी है, जिसके चलते इस रैकेट के मुख्य खरीदारों और अंतिम सिंडिकेट तक पहुंचना अभी बाकी है।