auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
▪️बिहार के राज्यपाल ने असिस्टेंट प्रोफेसर (नियमित और संविदा) की नियुक्ति के लिए 'स्टैच्यूट्स फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स, 2026' को मंजूरी दे दी है।
▪️चयन 175 अंकों की लिखित परीक्षा और 25 अंकों के इंटरव्यू (कुल 200 अंक) पर आधारित होगा। अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष तय की गई है।
▪️यह नियम लंबे समय से रुकी हुई असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली का रास्ता साफ करेगा। इंटरव्यू के दौरान टीचिंग स्किल की वीडियो रिकॉर्डिंग से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
▪️यह नियम लंबे समय से रुकी हुई असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली का रास्ता साफ करेगा। इंटरव्यू के दौरान टीचिंग स्किल की वीडियो रिकॉर्डिंग से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

“राज्यपाल ने 2026 की नई नियुक्ति नियमावली को दी मंजूरी, अब 25 अंकों के इंटरव्यू में 13 अंक टीचिंग स्किल के लिए होंगे, प्रक्रिया की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग।“
175 अंकों की लिखित परीक्षा, 25 अंकों का इंटरव्यू और अधिकतम 43 वर्ष की उम्र—बिहार के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों (Assistant Professors) की नियुक्ति का आधार अब यही होगा। बुधवार को राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ‘स्टैच्यूट्स फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स, इनक्लूडिंग कॉन्ट्रैक्चुअल अपॉइंटमेंट्स ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स, 2026’ को अपनी मंजूरी दे दी है। एक जुलाई से पूरे राज्य में प्रभावी हो चुके इस नए नियम ने लंबे समय से चली आ रही बहाली की असमंजसता को खत्म कर दिया है।
नियमित और संविदा (contractual) दोनों प्रकार की नियुक्तियों के लिए अब स्पष्ट मानक तय हो गए हैं। यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) की अनुशंसा पर ही आयोजित की जाएगी।
अधिकतम उम्र सीमा के मुद्दे पर शोधार्थियों को बड़ी राहत मिली है। नए नियम में अधिकतम आयु 43 वर्ष कर दी गई है। इससे पहले जारी ड्राफ्ट में उम्र सीमा 40 वर्ष तय की गई थी, जिसका शोधार्थियों ने कड़ा विरोध किया था। हालांकि, 10वीं और 12वीं के अंकों के आधार पर मिलने वाले वेटेज को खत्म करने की उनकी पुरानी मांग इस नियमावली में पूरी नहीं हो सकी।
200 अंकों की नई चयन प्रक्रिया और वीडियो रिकॉर्डिंग
चयन का मुख्य आधार तीन घंटे की 175 अंकों की लिखित परीक्षा होगी। इसके बाद 25 अंकों का इंटरव्यू लिया जाएगा, जिसे दो हिस्सों में बांटा गया है। कुल 13 अंक शिक्षण कौशल (Teaching Demo) के लिए और 12 अंक बोर्ड के साथ संवाद के लिए दिए जाएंगे।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। शिक्षण प्रदर्शन की पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी ताकि किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
अनिवार्य योग्यता और पीएचडी (PhD) का कड़ा मूल्यांकन
नियुक्ति के लिए मास्टर डिग्री में कम-से-कम 55 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। बिहार के एससी, एसटी, ईबीसी, बीसी (नॉन क्रीमी लेयर) और दिव्यांग अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंकों में 5 प्रतिशत की विशेष छूट मिलेगी।
नेट (NET) या सेट (SET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य रखा गया है, लेकिन यूजीसी नियमों के अनुरूप पीएचडी प्राप्त अभ्यर्थियों को नेट से छूट दी जाएगी।
पीएचडी मूल्यांकन के नियम अब पहले से अधिक सख्त कर दिए गए हैं:
- मूल्यांकन दो बाहरी परीक्षकों द्वारा किया जाना अनिवार्य है।
- कम-से-कम दो रिसर्च पेपर पब्लिश करने के साथ ही एक जर्नल प्रकाशित होना जरूरी है।
- विदेश से पीएचडी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उनके विश्वविद्यालय या संस्थान का दुनिया की टॉप 500 रैंकिंग में होना अनिवार्य है। (संगीत, विजुअल आर्ट्स और मूर्तिकला जैसे विषयों में पारंपरिक पेशेवर कलाकारों का आकलन यूजीसी के नियमों के मुताबिक ही होगा)।
अब बनेंगे अधिक इंटरव्यू बोर्ड, घटेगी देरी
नियुक्ति प्रक्रिया में होने वाली देरी को दूर करने के लिए राज्य कैबिनेट ने भी बुधवार को बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग कार्य संचालन (संशोधन) नियमावली, 2026’ के प्रारूप को स्वीकृति दे दी है।
उच्च शिक्षा सचिव राजीव रौशन ने इस संशोधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, “अब तक आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की संख्या के आधार पर ही इंटरव्यू बोर्ड गठित किये जाते थे।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आयोग में एक अध्यक्ष और पांच सदस्य हैं, तो अधिकतम छह बोर्ड ही बन सकते थे, जिससे बड़ी संख्या में रिक्तियों के साक्षात्कार में एक-दो महीने लग जाते थे। अब इस संशोधन के बाद, आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार की पूर्वानुमति से आयोग अतिरिक्त साक्षात्कार बोर्ड गठित कर सकेगा, जिससे हजारों अभ्यर्थियों के इंटरव्यू कम समय में पूरे हो सकेंगे।