auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️प्राथमिक विद्यालय बरदाहा के प्रधान शिक्षक मो. नईमुद्दीन को पीएम पोषण योजना बंद रखने और ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों की फर्जी उपस्थिति दर्ज करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया।
◾️उपस्थिति पंजी में 145 में से 84 बच्चे उपस्थित दिखाए गए, जबकि जांच के समय मौके पर 0 बच्चे मिले; पोर्टल पर 75 बच्चों का फर्जी भोजन दर्ज था।
◾️छात्रों को सरकारी योजना के तहत अनिवार्य पोषण भोजन से वंचित रखा गया और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की गई।
◾️आरोपी शिक्षक के खिलाफ प्रपत्र 'क' में आरोप-पत्र गठित होगा और बीआरसी नरपतगंज में उपस्थिति के साथ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई चलेगी।

रसोई में चूल्हा ठंडा था मगर पोर्टल पर दर्ज थी दर्जनों बच्चों की थाली; जांच में रंगे हाथ पकड़े जाने पर डीईओ ने की कार्रवाई।
सरकारी रिकॉर्ड में 75 बच्चे भोजन कर रहे थे, लेकिन रसोई का चूल्हा पांच दिनों से जला ही नहीं था।
बिहार के अररिया जिले में डिजिटल निगरानी की आंखों में धूल झोंकने का एक सनसनीखेज खेल पकड़ा गया है। नरपतगंज प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय बरदाहा के प्रधान शिक्षक मो. नईमुद्दीन को मध्याह्न भोजन योजना (पीएम पोषण) में गंभीर वित्तीय अनियमितता और ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर बच्चों की फर्जी हाजिरी दर्ज करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
शिक्षा विभाग के पटना स्थित केंद्रीय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में जब ग्रामीणों की शिकायत पहुंची, तो जांच की सुई तेजी से घूमी।
15 सितंबर की दोपहर ठीक 1 बजकर 18 मिनट पर प्रखंड साधन सेवी (बीआरपी) ने विद्यालय परिसर में औचक कदम रखा। कागजों का सच और जमीन की हकीकत आमने-सामने थी। विद्यालय की दैनिक उपस्थिति पंजी में कुल नामांकित 145 विद्यार्थियों में से 84 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी। किंतु परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था—कक्षाएं वीरान थीं और मौके पर एक भी छात्र मौजूद नहीं मिला।
पूछताछ में प्रधान शिक्षक मो. नईमुद्दीन ने बचाव करते हुए दलील दी कि उन्होंने 12:45 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी थी। हालांकि, यह दलील उनके गले की फांस बन गई। नियमानुसार तय समय से पहले स्कूल बंद करना पठन-पाठन में मनमानी और विभागीय निर्देशों की खुली नाफरमानी साबित हुआ।
मोबाइल से चलता रहा ‘कागजी भोजन’, रसोई में नहीं जली आग
जांच के दौरान जब स्थानीय ग्रामीणों, रसोइयों और सहायकों से पूछताछ हुई, तो घपले की परतें उधड़ती चली गईं। ग्रामीणों ने जांच दल को बताया कि 10 सितंबर से लेकर 15 सितंबर तक स्कूल में मध्याह्न भोजन बना ही नहीं। इसके उलट, प्रधान शिक्षक अपने निजी मोबाइल से ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर लगातार फर्जी आंकड़े अपलोड करते रहे।
विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार पोर्टल पर दर्ज की गई संख्या इस प्रकार थी:
- 10 सितंबर: 75 बच्चों को भोजन दिखाया गया
- 11 सितंबर: शून्य
- 12 सितंबर: 56 बच्चे
- 13 सितंबर: रविवारीय अवकाश
- 14 सितंबर: हरतालिका तीज का आधिकारिक अवकाश
- 15 सितंबर: निरीक्षण के दिन फिर 75 बच्चों की उपस्थिति पोर्टल पर चढ़ा दी गई।
यह पूरा खेल बच्चों के निवाले की राशि का गबन करने के उद्देश्य से रचा गया था।
निलंबन के साथ आरोप-पत्र गठित, बीआरसी बना मुख्यालय
जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) साहेब आलम के अनुसार, प्रधान शिक्षक पर उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, सरकारी काम में बाधा डालने, स्वेच्छाचारिता, घोर अनुशासनहीनता और वित्तीय गबन के आरोप प्रथमदृष्टया सिद्ध पाए गए हैं।
”प्राथमिक विद्यालय बरदाहा में बच्चों के पोषण अधिकार के साथ खिलवाड़ किया गया। बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के तहत मो. नईमुद्दीन को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है।”
— साहेब आलम, जिला शिक्षा पदाधिकारी, अररिया
आदेश के तहत निलंबन काल में प्रधान शिक्षक का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) नरपतगंज निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, जबकि विस्तृत विभागीय जांच के लिए आरोप पत्र प्रपत्र ‘क’ अलग से निर्गत किया जा रहा है।