12 साल में 116 Paper Leaks: 7.5 करोड़ छात्रों का टूटा सपना, 19 राज्यों में फैला ‘Exam Mafia’

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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

◾️12 साल में 116 पेपर लीक के विरोध में हुए देशव्यापी छात्र आंदोलन के कारण शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
◾️2014 से जुलाई 2026 तक; यूपी, राजस्थान और एमपी समेत 19 राज्यों में, 116 पेपर लीक, 7.5 करोड़ प्रभावित छात्र और 3 लाख अटकी हुई सरकारी नौकरियां।
◾️इस सिस्टम की नाकामी से न सिर्फ भर्तियां अटकीं, बल्कि छात्रों ने आत्महत्या जैसे दुखद कदम उठाए, जिससे परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव का दबाव बना।

12 साल में 116 Paper Leaks: 7.5 करोड़ छात्रों का टूटा सपना, 19 राज्यों में फैला 'Exam Mafia'

2014 से 2026 के बीच पेपर लीक ने तीन लाख सरकारी भर्तियों को अटका दिया। आक्रोशित युवाओं के आंदोलन के आगे आखिरकार सिस्टम झुका और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।

​राजस्थान के झुंझुनूं में रहने वाली सुशीला देवी आज भी अपने बेटे प्रदीप मेघवाल की तस्वीर के सामने रोती हैं। नागपुर की नीलम और मध्य प्रदेश के धार निवासी बंसीलाल मौर्य की कहानी भी अलग नहीं है, जिन्होंने सिस्टम की नाकामी के कारण अपने बच्चों—आकांक्षा और अवंतिका—को खो दिया। इन परिवारों के लिए NEET-UG या अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि सुनहरे भविष्य का इकलौता टिकट थीं, जिसे ‘पेपर माफिया’ ने बीच रास्ते में ही फाड़ दिया।

​यह किसी एक परीक्षा या एक राज्य की तकनीकी गड़बड़ी नहीं है। 2014 से जुलाई 2026 तक पूरे भारत में 116 पेपर लीक के डराने वाले मामले सामने आ चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संगठित अपराध ने करीब 7.5 करोड़ अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। माफिया का नेटवर्क 19 राज्यों तक फैल चुका है, जिसमें उत्तर प्रदेश (11 मामले), राजस्थान और मध्य प्रदेश (9-9 मामले) सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं।

​सिर्फ 2019 से जून 2024 के बीच 65 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए। इसका सीधा असर यह हुआ कि 27 परीक्षाएं रद्द या स्थगित करनी पड़ीं और तीन लाख से अधिक सरकारी नौकरियों पर अचानक ब्रेक लग गया। पुलिस और शिक्षक भर्तियां इस माफिया के सबसे बड़े निशाने पर रहीं। जब SSC, UPSC और केंद्रीय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के पेपर भी सुरक्षित नहीं रहे, तो देश भर के युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा।

​Tech-Driven प्रोटेस्ट और सिस्टम की हार

​इस बिखरे हुए गुस्से को एक दिशा दी चार प्रमुख चेहरों ने। बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े अभिजीत दीपके ने ‘डिजिटल समर्थन’ से आंदोलन की जमीनी मशीनरी खड़ी की, जबकि शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक इस भीड़ के ‘नैतिक कमांडर’ बने। खोजी पत्रकार सौरव दास ने मीडिया और सरकार के बीच संवाद कायम रखा, तो IIT छात्र आशुतोष रांका ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी राजनीतिक दल इस छात्र आंदोलन को हाईजैक न कर सके। दिलचस्प बात यह है कि इंटरनेट बैन होने पर भी छात्रों ने ‘BitChat’ और ‘Google Forms’ जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बिना इंटरनेट अपना संवाद जारी रखा।

​अंततः सिस्टम को झुकना पड़ा।

​3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितता के बाद, भारी विरोध के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने पत्र में प्रधान ने लिखा कि युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए वे यह कदम उठा रहे हैं।

​इस बीच पुलिसिया कार्रवाई भी तेज हो गई है। महाराष्ट्र TET 2026 लीक मामले के मास्टरमाइंड बृजेंद्र कुमार गुप्ता और उसके साथी इंद्रजीत सिंह को ठाणे से गिरफ्तार कर लिया गया है। सत्ता पक्ष के नेता राजीव चंद्रशेखर और सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि सरकार माफियाओं को बख्शने वाली नहीं है, वहीं विपक्ष के मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव इसे युवाओं के ‘सत्य और साझा संघर्ष’ की ऐतिहासिक जीत बता रहे हैं।

Siddharth

verifiedManager and Content Writer

Expertise: B.Tech and MBA in IT

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