बिहार विद्यालय शिक्षा समिति (VSS) गठन प्रपत्र फॉर्मेट PDF
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विद्यालय शिक्षा समिति गठन हेतु फार्मेट
विद्यालय शिक्षा समिति गठन प्रपत्र Bihar 2026
बिहार के सरकारी स्कूलों के सुचारू संचालन और विकास के लिए विद्यालय शिक्षा समिति गठन प्रपत्र (Vidyalaya Shiksha Samiti Gathan Prapatra) एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इस निबंधन फॉर्म (Registration Form) का उपयोग समिति के विधिवत गठन और आधिकारिक रिकॉर्ड को तैयार करने के लिए किया जाता है। इस प्रपत्र के जरिए पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और बच्चों के अभिभावकों को एक साथ जोड़ा जाता है।
मुख्य निर्देश एवं नियम क्या हैं?
इस आधिकारिक प्रपत्र को भरने के लिए समिति की संरचना और सदस्यों के चयन से जुड़े कई स्पष्ट खंड दिए गए हैं:
- प्राथमिक विवरण: सबसे पहले फॉर्म में विद्यालय का पूरा नाम, संबंधित कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर का नाम, पंचायत का नाम, वार्ड संख्या और शिक्षा समिति के गठन की सटीक तारीख दर्ज करनी होती है। इसके साथ ही समिति के कुल सदस्यों की संख्या भी बतानी होती है।
- समिति के अध्यक्ष: जिस ग्राम पंचायत के वार्ड में विद्यालय स्थित होता है, वहां के निर्वाचित वार्ड सदस्य को ही समिति का पदेन अध्यक्ष बनाया जाता है।
- विद्यालय के प्रतिनिधि: स्कूल के प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक इस समिति के मुख्य सदस्य होते हैं। उनके साथ-साथ विद्यालय के सबसे वरीयतम शिक्षक को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है।
- माताओं का विशेष प्रतिनिधित्व: समिति में अलग-अलग वर्गों के छात्र-छात्राओं की माताओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसमें पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति/जनजाति और सामान्य जाति से दो-दो माताओं को सदस्य चुना जाता है। इसके अलावा, निःशक्त छात्र/छात्रा की माता को भी सदस्य बनाया जाता है।
- स्थानीय और सामाजिक भागीदारी: अगर किसी ने स्कूल के लिए ज़मीन दी है, तो भूमिदाता या उनके परिवार का एक सदस्य समिति में शामिल होता है। साथ ही, जीविका के ग्राम संगठन या महिला समाख्या समूह की अध्यक्ष/प्रधान स्तर की दो महिलाओं को भी सदस्य चुना जाता है।
- छात्रों का प्रतिनिधित्व: बच्चों की आवाज़ को मंच देने के लिए, बाल संसद से चुना गया एक छात्र प्रतिनिधि और मीना मंच से चुनी गई एक छात्रा प्रतिनिधि भी समिति के सदस्य होते हैं।
- प्रमाणीकरण और निबंधन: फॉर्म के अंत में पदेन अध्यक्ष (वार्ड सदस्य), प्रधानाध्यापक, चयनित सचिव और पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर ज़रूरी होते हैं। अंतिम निबंधन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (निबंधन पदाधिकारी) के हस्ताक्षर और मुहर के बाद ही पूरा होता है, जिसके बाद निबंधन संख्या और दिनांक दर्ज की जाती है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, यह विद्यालय शिक्षा समिति गठन प्रपत्र बिहार के स्कूलों में एक पारदर्शी और समावेशी प्रबंधन तंत्र स्थापित करने का आधार है। इसमें समाज के हर वर्ग—विशेषकर महिलाओं, छात्रों और स्थानीय पंचायत—की भागीदारी तय की गई है ताकि विद्यालय का सर्वांगीण विकास हो सके।