शेखपुरा में दादा-परदादा की जमीन अब होगी वंशजों के नाम, शुद्धीकरण अभियान तेज

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◾️शेखपुरा जिले में 45 दिवसीय विशेष अभियान के तहत मृत पूर्वजों (पिता, दादा, परदादा) के नाम दर्ज जमाबंदियों को वैध वंशजों के नाम हस्तांतरित करने का कार्य तेज किया गया।
◾️15 सितंबर 2026 से अभियान जारी; शेखपुरा जिला (सभी 6 अंचल, 49 पंचायतें), बिहार।
◾️जिले की 49 पंचायतों में लगभग 1.18 लाख अशुद्ध जमाबंदियों को दुरुस्त करने का लक्ष्य।
◾️रैयतों को अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे; जमीन विवाद घटेंगे और बैंक लोन, सरकारी मुआवजा व फसल सहायता पाना आसान होगा।
◾️दस्तावेज न मिलने पर स्वतः संज्ञान लेकर ऑनलाइन संयुक्त जमाबंदी दर्ज की जाएगी।

शेखपुरा में 45 दिवसीय जमाबंदी शुद्धीकरण अभियान शुरू। मृत पूर्वजों के नाम दर्ज 1.18 लाख जमीन रिकॉर्ड अब वैध वंशजों के नाम होंगे। जानें पूरी प्रक्रिया और नियम।

​45 दिवसीय विशेष अभियान के तहत गांव-गांव पहुंचेंगे राजस्व कर्मी, कागजात न मिलने पर भी बनेगी संयुक्त जमाबंदी।

​पैतृक जमीन की जमाबंदी अपने नाम कराने के लिए अब ग्रामीणों को अंचल दफ्तरों के चक्कर काटने और बाबुओं के आगे अर्जी लगाकर महीनों इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देश पर शेखपुरा जिले में 45 दिनों का सघन ‘जमाबंदी शुद्धीकरण अभियान’ तेज कर दिया गया है। इस पहल के तहत वर्षों से पिता, दादा और परदादा के नाम पर अटकी जमीन की जमाबंदी को प्राथमिकता के आधार पर उनके असली उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज किया जा रहा है।

​जिले के सभी छह अंचलों की 49 पंचायतों में 15 सितंबर से शुरू हुए इस अभियान के तहत कुल 1 लाख 18 हजार अशुद्ध जमाबंदियों को दुरुस्त करने का लक्ष्य तय है।

​अपर समाहर्ता लखींद्र पासवान ने स्पष्ट किया है कि अभियान की प्रगति की दैनिक निगरानी की जा रही है। “अंचल स्तर के अधिकारियों और राजस्व कर्मियों की सीधी जवाबदेही तय की गई है, ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मृत जमाबंदीधारियों के रिकॉर्ड को अद्यतन किया जा सके,” पासवान ने भौतिक और ऑनलाइन बैठकों के दौरान अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा।

​अंचल कार्यालय जाने की जरूरत नहीं, घर-गांव पहुंचेगी टीम

​इस अभियान की सबसे अहम कड़ी यह है कि रैयतों को पहले खुद अंचल कार्यालय जाकर आवेदन देने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। राजस्व कर्मचारी अब सीधे गांव और वार्ड स्तर पर जाकर मृत जमाबंदीधारियों को चिन्हित करेंगे।

​इस शिनाख्त के लिए पंचायत की मृत्यु पंजी, स्थानीय चौकीदार की रिपोर्ट, वार्ड प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और संबंधित परिवारों से मिले ब्योरे का सहारा लिया जा रहा है। पहचान स्थापित होते ही मूल जमाबंदी रिकॉर्ड की पड़ताल होगी, जिसके बाद वैध वारिसों से वंशावली, आपसी सहमति और जरूरी दस्तावेज जुटाए जाएंगे। कागजात दुरुस्त पाए जाने पर आपसी हिस्सेदारी के आधार पर अलग-अलग जमाबंदी कायम कर दी जाएगी।

​दस्तावेज न होने पर भी नहीं लटकेगा मामला

​यदि किसी परिवार के पास तय समय में आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं हैं, तो भी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में नहीं जाएगी।

​अपर समाहर्ता के अनुसार, ऐसी सूरत में उपलब्ध रिकॉर्ड और वैध वारिसों की पहचान के आधार पर सभी के नाम संयुक्त जमाबंदी कायम कर दी जाएगी। हिस्सेदारी का अंतिम बंटवारा आपसी सहमति, बाद में पेश किए गए दस्तावेजों या सक्षम न्यायालय के फैसले के आधार पर तय होगा।

​तेजी लाने के लिए व्यवस्था यह बनाई गई है कि राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट मिलते ही अंचल अधिकारी ‘बिहार भूमि’ पोर्टल के जरिए स्वतः संज्ञान (suo-motu) लेकर ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।

​जमीनी विवादों से मिलेगी राहत, योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ

​जिले में भूमि विवादों की एक बड़ी वजह यही रही है कि जमीन आज भी उन पूर्वजों के नाम दर्ज है, जिनका निधन दशकों पहले हो चुका है। रिकॉर्ड स्पष्ट न होने से भाइयों और गोतिया में सिर-फुटौव्वल होती है और मुकदमे वर्षों तक अदालतों में खिंचते हैं।

​नाम दर्ज होने के बाद किसानों को जमीन की खरीद-बिक्री, बैंकों से केसीसी या कृषि ऋण, सरकारी भूमि अधिग्रहण का मुआवजा और फसल क्षति सहायता पाने में सीधी सहूलियत होगी। प्रशासन ने आम रैयतों से अपील की है कि वे गांव आने वाले राजस्व कर्मियों को सही जानकारी व दस्तावेज देकर इस 45 दिवसीय अभियान को सफल बनाएं।

Siddhant

verifiedManager and Content Writer

Expertise: B.Tech and MBA in IT

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