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Updated information regarding this news story (इस न्यूज़ (खबर) की अपडेटेड जानकारी): बिहार में खुलेंगे ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’, बक्सर से होगी शुरुआत
auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
▪️बिहार शिक्षा विभाग ने 12 जिलों के शहरी स्कूलों में नई पोस्टिंग पर रोक लगाते हुए 22 हजार सरप्लस शिक्षकों के रेशनलाइजेशन और ट्रांसफर का फैसला किया है।
▪️प्रक्रिया 15 जुलाई 2026 के बाद बिहार के 12 जिलों (पटना, कैमूर, सीवान, बक्सर आदि) में शुरू होगी।
▪️12 जिलों के 15,000 शहरी स्कूलों में 22,000 अतिरिक्त शिक्षक तैनात हैं, जबकि विभाग का नियम 60 छात्रों पर केवल 2 शिक्षकों का है।
▪️इस कदम से शहरी स्कूलों में शिक्षकों की अनावश्यक भीड़ कम होगी और ग्रामीण व सुदूर इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर की जा सकेगी।
▪️विभाग शिक्षकों की योग्यता और कैटेगरी के आधार पर डेटाबेस तैयार कर रहा है; ट्रांसफर में बीमार और दिव्यांग शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पटना, सीवान और बक्सर समेत 12 जिलों के शहरी स्कूलों में अब कोई नई पोस्टिंग नहीं होगी; शिक्षा विभाग ने छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने के लिए कसी कमर।
करीब 22 हजार अतिरिक्त शिक्षक, 15 हजार शहरी स्कूल और 12 ऐसे जिले जहां मानक से कई गुना अधिक स्टाफ तैनात है। बिहार शिक्षा विभाग (Bihar Education Department) अब इस भारी असंतुलन को खत्म करने जा रहा है, जिसके तहत पटना, कैमूर, सीवान और बक्सर समेत 12 जिलों के शहरी क्षेत्रों में स्थित स्कूलों से शिक्षकों का ट्रांसफर (Transfer) तो किया जाएगा, लेकिन वहां कोई नई पोस्टिंग नहीं होगी।
विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि 15 जुलाई के बाद बड़े पैमाने पर रेशनलाइजेशन (Rationalization) की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके जरिए शहरों में जमे सरप्लस (Surplus) शिक्षकों को हटाकर उन सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा जहां वास्तव में शिक्षकों की भारी कमी है। राज्य भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन 12 जिलों में कुल 27 हजार स्कूल हैं, जिनमें 80 हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं।
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पूरी कवायद पर विभागीय रुख साफ किया है। उन्होंने कहा, “शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए काम हो रहा है। नियमानुसार और निर्धारित मानक मुताबिक ही शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग होगी।”
शहरी स्कूलों में ‘नो-पोस्टिंग’ का फॉर्मूला क्यों?
शिक्षा विभाग के नए नियमों के अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती सीधे तौर पर छात्र संख्या (Student-Teacher Ratio) पर निर्भर करेगी। नियम बिल्कुल सख्त हैं—60 छात्रों पर केवल 2 और 120 छात्रों पर अधिकतम 4 शिक्षकों की ही पोस्टिंग की जा सकती है। लेकिन मौजूदा समय में इन 12 जिलों के शहरी स्कूलों में शिक्षकों की भारी भीड़ जमा है।
अगर विभाग इन इलाकों में नई पोस्टिंग की अनुमति देता है, तो स्थिति यह हो जाएगी कि 60 बच्चों पर 5 या 120 बच्चों पर 9 शिक्षक तैनात हो जाएंगे। यह स्थिति पूरी तरह विभागीय नियमों के खिलाफ है। यही कारण है कि संतुलन बनाने के लिए इन क्षेत्रों में नई भर्तियों या पोस्टिंग की संभावना को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।
रेशनलाइजेशन का डेटाबेस और प्राथमिकताएं
पहले चरण में केवल 13 हजार शिक्षकों का ही रेशनलाइजेशन पूरा हो सका है। अब बारी उन 14 हजार स्कूलों में तैनात लगभग 22 हजार सरप्लस शिक्षकों की है, जिन्हें सही जगह पर भेजना विभाग के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग शिक्षकों की योग्यता, विषय और कैटेगरी के आधार पर एक विस्तृत डेटाबेस (Database) तैयार कर रहा है।
ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान सबसे पहली प्राथमिकता उन शिक्षकों को मिलेगी जो गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं या दिव्यांग हैं। इसके बाद ही अन्य शिक्षकों को उनके घर के पास स्कूल चुनने का विकल्प मिल सकेगा, बशर्ते वहां कोई सीट खाली हो। अक्सर देखा गया है कि रसूख और पहुंच के कारण शिक्षक शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में ही जमे रहते थे, जिस पर अब लगाम कसी जा रही है।
बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव आनंदा मिश्रा ने विभाग से इस काम में तेजी लाने की अपील की है। मिश्रा ने कहा: “शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया को जल्द से जल्द खत्म करें। इससे शिक्षक निश्चिंत होकर स्कूलों में छात्रों को पढ़ाएंगे।”