बिहार में शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: अब होगी सरकारी स्कूलों की रैंकिंग और शिक्षकों का मूल्यांकन

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Updated information regarding this news story (इस न्यूज़ (खबर) की अपडेटेड जानकारी): बिहार में खुलेंगे ‘गुरुकुलम विद्यापीठ’, बक्सर से होगी शुरुआत

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▪️बिहार शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों की रैंकिंग और शिक्षकों के मूल्यांकन के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है।
▪️बिहार राज्य में, व्यवस्था को अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।
▪️समय पर प्रशासनिक कार्य (जैसे SLC निर्गमन) पूरा न करने वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई होगी।
▪️इससे स्कूलों में अवैध वसूली रुकेगी, प्रशासनिक कार्यों की समय-सीमा तय होगी और शिकायत निवारण पारदर्शी होगा।

बिहार शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों की रैंकिंग और शिक्षकों के मूल्यांकन के लिए नई व्यवस्था लागू कर रहा है। 10-15 दिनों में लागू होने वाले इस नियम से अवैध वसूली रुकेगी और पारदर्शिता आएगी।

10 से 15 दिनों में लागू होगी नई व्यवस्था; सेवाओं की तय होगी समय-सीमा, स्कूलों में अवैध वसूली पर लगेगी रोक।

​बिहार के सरकारी स्कूलों में अब मनमानी नहीं चलेगी। राज्य का शिक्षा विभाग अगले 10 से 15 दिनों में एक नई और सख्त व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसके तहत सभी सरकारी स्कूलों की नियमित रैंकिंग की जाएगी और शिक्षकों के प्रदर्शन का कड़ाई से मूल्यांकन होगा।

​इस फैसले का सीधा असर प्रखंड शिक्षा कार्यालयों (BEO) से लेकर स्कूल स्तर तक पड़ेगा। शिक्षा विभाग का स्पष्ट मानना है कि इस कदम से स्कूलों में जवाबदेही बढ़ेगी और शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी व गुणवत्तापूर्ण होगी।

​शिक्षकों और बीईओ के मूल्यांकन के तय होंगे मानक

​नई व्यवस्था के तहत प्रखंड शिक्षा कार्यालयों के काम को परखने के लिए अलग-अलग पैरामीटर तय किए जाएंगे। वहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित होगा।

​कक्षा में उनके पढ़ाने की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के प्रति उनका व्यवहार, लर्निग आउटकम, समय का पालन और ओवरऑल शैक्षणिक प्रदर्शन उनके मूल्यांकन का मुख्य आधार बनेंगे। इसी प्रकार सरकारी स्कूलों की रैंकिंग के लिए भी अलग मूल्यांकन प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की आसानी से पहचान हो सकेगी और कमजोर स्कूलों को सुधारने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

​अवैध वसूली पर लगेगी लगाम, सेवाओं की तय होगी डेडलाइन

​इस पूरी कवायद का एक और बड़ा लक्ष्य है—सरकारी स्कूलों में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली पर पूर्ण रोक लगाना।

​अक्सर छात्रों और अभिभावकों को विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र (SLC) या अन्य कागजात बनवाने के लिए अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ता है। अब नई व्यवस्था में इन सभी प्रशासनिक कार्यों और सेवाओं के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाएगी। यदि निर्धारित अवधि में कार्य पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध सीधी कार्रवाई की जाएगी।

​पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शिकायतों के त्वरित निपटारे की भी तैयारी है। अब प्रत्येक शिकायतकर्ता को एक शिकायत संख्या उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वह अपनी शिकायत की प्रगति पर नजर रख सके।

​मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेजों के संचालन पर नजर

​प्रखंड स्तर पर संचालित मॉडल स्कूलों के प्रभावी प्रबंधन पर भी शिक्षा विभाग का विशेष फोकस है। इसके साथ ही, डिग्री कॉलेज विहीन प्रखंडों में स्थापित किए गए नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के सुचारू संचालन पर विभाग खास ध्यान देगा।

​शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इन सुधारात्मक कदमों से सरकारी विद्यालयों की कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आएगा। शिक्षकों की जवाबदेही तय होने से विद्यार्थियों को एक बेहतर और बाधारहित शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।

Ravi Kumar

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar 13 year of teaching experience in multiple government school of Bihar.

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