auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
▪️18 महीने के NIOS D.El.Ed प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्त BPSC TRE-3 शिक्षकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू।
▪️अररिया (बिहार); DEO ने 1 जुलाई को 24 घंटे के अंदर ऐसे शिक्षकों की पहचान करने का सख्त निर्देश दिया।
▪️अकेले अररिया जिले में 67 से अधिक शिक्षकों की नौकरी खतरे में है।
▪️करीब एक साल से काम कर रहे शिक्षकों की आजीविका पर संकट आया है, जिससे नाराज होकर शिक्षक संघ ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
▪️शिक्षकों की पहचान और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अंतिम बर्खास्तगी के लिए विस्तृत रिपोर्ट शिक्षा मुख्यालय भेजी जाएगी।

शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद DEO ने सभी स्कूलों से मांगी सूची, शिक्षक संघ ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
बिहार के अररिया जिले में बीपीएससी टीआरई-3 (BPSC TRE-3) के तहत नियुक्त 67 से अधिक सरकारी शिक्षकों की नौकरी जाने की कगार पर है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) से 18 महीने का डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षण प्राप्त कर नियुक्त हुए इन शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सेवा समाप्ति की प्रक्रिया तेज कर दी है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय ने 1 जुलाई को जिले के सभी प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर सख्त निर्देश दिया था। इस पत्र में स्पष्ट कहा गया कि एनआईओएस से 18 माह का डीएलएड करने वाले शिक्षकों का पूरा विवरण 24 घंटे के भीतर संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए। विभिन्न प्रखंडों से मिली रिपोर्ट के आधार पर जिले में अब तक करीब 67 ऐसे शिक्षकों को चिह्नित किया जा चुका है, जिनकी नियुक्ति बीपीएससी टीआरई-3 के माध्यम से हुई थी।
विज्ञापन की शर्त ही बनी कार्रवाई का आधार
नियुक्ति के लगभग एक वर्ष बाद इन शिक्षकों पर अचानक यह गाज क्यों गिरी, इसका जवाब बीपीएससी के मूल विज्ञापन में छिपा है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बीपीएससी टीआरई-3 भर्ती के लिए जारी विज्ञापन संख्या 22/2024 की कंडिका-2 (बी)(4) में पहले से ही यह शर्त मौजूद थी। इसके तहत, शिक्षा विभाग के 7 दिसंबर 2023 के आदेश के अनुसार एनआईओएस द्वारा दिया गया 18 माह का डीएलएड विद्यालय अध्यापक पद के लिए मान्य नहीं है। तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र लिखकर ऐसे शिक्षकों की पहचान कर नियमानुसार उनकी सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया था। विभाग का कहना है कि शिक्षकों को बिना निर्धारित कानूनी और विभागीय प्रक्रिया अपनाए नहीं हटाया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई कानूनी बाधा उत्पन्न न हो।
शिक्षक संघ ने दी चेतावनी
इस कार्रवाई की खबर फैलते ही जिले के शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। रोजगार का गंभीर संकट खड़ा होने के कारण पूरे राज्य के साथ-साथ अररिया में भी चिंता का माहौल है, जबकि विभागीय अधिकारी इस पर बोलने से बच रहे हैं।
जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अब्दुल कुदुस ने विभाग के इस फैसले को गलत ठहराया है। उनका साफ कहना है कि अगर विभाग की ऐसी ही नीति थी, तो इसे बहाली प्रक्रिया के दौरान ही तय करना चाहिए था, न कि नियुक्ति के बाद। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की दिशा में कार्रवाई की जाती है, तो संघ उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा।