बिहार शिक्षा विभाग का सख्त आदेश: शिक्षा सेवकों के लिए नई नियमावली जारी, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

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auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)

▪️बिहार शिक्षा विभाग ने शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज़ के लिए नई नियमावली जारी की है। काम में लापरवाही पर अब सख्त कार्रवाई होगी।
▪️6-14 वर्ष के बच्चों की 75% स्कूल उपस्थिति अनिवार्य। 15-45 वर्ष की असाक्षर महिलाओं को रोज़ 1 घंटे पढ़ाना होगा।
▪️वेतन वृद्धि के बाद भी काम में ढिलाई को रोकने और जवाबदेही तय करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे स्कूलों में शिक्षा और मिड-डे मील व्यवस्था सुधरेगी।
▪️अधिकारी केंद्रों का औचक भौतिक निरीक्षण (physical inspection) करेंगे। नियम न मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

​बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य में कार्यरत शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज़ (Talimi Markaz) के लिए कार्यों एवं दायित्वों की एक विस्तृत नियमावली जारी कर दी है। मानदेय में वार्षिक वेतनवृद्धि (annual increment) का लाभ मिलने के बावजूद कर्तव्यों में लापरवाही की शिकायतों को विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। अब काम में ढिलाई बरतने वाले कर्मियों पर सीधे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

​विभाग के अपर सचिव सह जन शिक्षा निदेशक विजय कुमार द्वारा यह नवीनतम निर्देश जारी किया गया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिक्षा सेवकों को अब केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में अधिक सक्रिय और जवाबदेह (accountable) होना पड़ेगा।

​इन कर्मियों को अब एक सामाजिक कार्यकर्ता (Social Worker) की व्यापक भूमिका निभानी होगी।

​ड्रॉप आउट रोकने और उपस्थिति बढ़ाने का लक्ष्य

​सबसे प्रमुख जिम्मेदारी महादलित, दलित और अल्पसंख्यक अतिपिछड़ा वर्ग के समुदायों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना है। शिक्षा सेवकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 6 से 14 आयुवर्ग के सभी बच्चे विद्यालय में नामांकित हों।

​इतना ही नहीं, स्कूलों में इन बच्चों की उपस्थिति कम से कम 75 प्रतिशत बनी रहनी चाहिए। जो बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं (drop-out students), उनकी पहचान कर उन्हें वापस विद्यालय तक लाना अब इनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

​दैनिक विद्यालय गतिविधियों में अनिवार्य सहयोग

​विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा सेवकों का कार्यक्षेत्र अब केवल समुदाय तक नहीं, बल्कि स्कूल परिसर के भीतर भी होगा। विद्यालय में शिक्षकों की कमी होने की स्थिति में उन्हें कक्षा-1 और कक्षा-2 के बच्चों को अनिवार्य रूप से पढ़ाना होगा।

​इसके अतिरिक्त, उन्हें कई अन्य दैनिक गतिविधियों में विद्यालय प्रबंधन को पूर्ण सहयोग देना होगा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ​मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal)
  • ​खेलकूद और स्वास्थ्य जाँच
  • ​अन्य एक्स्ट्रा-करिकुलर गतिविधियां (Extra-curricular activities)

​स्कूली बच्चों के अलावा, 15 से 45 आयुवर्ग की असाक्षर महिलाओं को भी प्रतिदिन एक घंटे पढ़ाने की अतिरिक्त जिम्मेदारी शिक्षा सेवकों को सौंपी गई है।

​भौतिक निरीक्षण और कार्रवाई की चेतावनी

​लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग का रुख बेहद सख्त है।

​अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर संचालित केंद्रों का भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) करें और कार्यों की प्रगति सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन निर्देशों के कड़ाई से पालन के बाद न केवल सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि राज्य के विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता (educational quality) में भी बड़ा सुधार आएगा।

Prabhanjan

verifiedHead Teacher and Educational Content Writer

Expertise: MA, D.El.Ed

Head Teacher in Primary School Bihar

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