auto_awesome एक नज़र में (Major Highlights)
◾️बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 27 जिलों के 29 स्थानों पर 4-मंजिला हाइटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह निर्माण के लिए ₹330.07 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी।
◾️₹330 करोड़ 7 लाख 13 हजार कुल स्वीकृत लागत; प्रत्येक केंद्र में 4,000 परीक्षार्थियों के बैठने की क्षमता।
◾️प्रतियोगी परीक्षाओं के चलते स्कूलों-कॉलेजों में नियमित पढ़ाई बंद नहीं होगी, पेपर लीक व कदाचार पर 24 घंटे सीसीटीवी से रोक लगेगी और चुनाव सामग्री का सुरक्षित भंडारण होगा।
◾️तकनीकी अनुमोदन के उपरांत भवन निर्माण विभाग द्वारा टेंडर व धरातलीय निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

4,000 परीक्षार्थियों की क्षमता वाले इन जी+3 भवनों में स्ट्रॉन्ग रूम, मूल्यांकन और निर्वाचन सामग्री का सुरक्षित भंडारण होगा।
330 करोड़ 7 लाख 13 हजार रुपये। इस भारी-भरकम बजट के साथ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) राज्य के 27 जिलों में आधुनिक अवसंरचना का नया संजाल तैयार करने जा रही है। कुल 29 स्थानों पर चार मंजिला (G+3) बहुउद्देश्यीय हाइटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह का निर्माण होगा, जिसे प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है।
तकनीकी प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण की कमान भवन निर्माण विभाग संभालेगा।
राज्य के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने परियोजना का खाका स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रत्येक भवन के निर्माण के लिए एक से डेढ़ एकड़ भूमि चिह्नित की जा चुकी है। दरभंगा प्रमंडल के दो जिलों—मधुबनी और समस्तीपुर—में दो-दो परीक्षा भवन बनाए जाएंगे, जबकि शेष चिह्नित जिलों में एक-एक भवन का निर्माण होगा। सूबे के सभी 9 प्रमंडलीय मुख्यालयों में ऐसे क्षेत्रीय कार्यालय-सह-परीक्षा भवन पहले से कार्य कर रहे हैं। अब इस मॉडल का विस्तार जिला स्तर पर किया जा रहा है।
4,000 छात्रों की क्षमता, बारकोडिंग और 24 घंटे सीसीटीवी का कड़ा पहरा
इन नए केंद्रों की सबसे बड़ी विशेषता इनका पैमाना और सुरक्षा ढांचा है। एक ही समय में 4,000 परीक्षार्थी एक छत के नीचे परीक्षा में बैठ सकेंगे। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए पूरे परिसर की निगरानी 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों और निर्बाध रिकॉर्डिंग सिस्टम से होगी।
इमारत सिर्फ परीक्षा कक्ष तक सीमित नहीं रहेगी। परीक्षा संपन्न होते ही उत्तरपुस्तिकाओं को तत्काल सुरक्षित करने के लिए इन-बिल्ट स्टोरेज की व्यवस्था रहेगी। मूल्यांकन केंद्र के रूप में भी इन परिसरों का पूर्ण इस्तेमाल होगा, जहाँ कॉपियों की बारकोडिंग और डिजिटल स्कैनिंग का तकनीकी काम भी उसी छत के नीचे संपन्न कराया जाएगा।
स्कूल-कॉलेजों में नहीं रुकेगी पढ़ाई, संचालन और राजस्व में भी मिलेगी हिस्सेदारी
वर्तमान में विभिन्न आयोगों और विभागों की प्रतियोगी परीक्षाओं का पूरा भार जिला मुख्यालय के शिक्षण संस्थानों पर पड़ता है। विद्यालय और महाविद्यालय छावनी में बदल जाते हैं, आंतरिक परीक्षाएं टालनी पड़ती हैं और सामान्य कक्षाओं का संचालन हफ्तों बाधित रहता है।
नये भवनों के अस्तित्व में आने के बाद शैक्षणिक कैलेंडर पटरी पर रहेगा।
परियोजना की संचालन रूपरेखा भी तय कर दी गई है। जिस स्कूल या कॉलेज परिसर की भूमि पर यह परिसर बनेगा, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसका दैनिक संचालन उसी शिक्षण संस्थान को सौंप दिया जाएगा। इससे होने वाले राजस्व में बिहार बोर्ड और संबंधित संस्थान दोनों की तय हिस्सेदारी होगी, जिससे स्कूलों को आत्मनिर्भर वित्तीय स्रोत भी हासिल होगा।
गोपनीय परीक्षा सामग्री के साथ चुनावी कार्यों में भी उपयोगी होंगे वज्रगृह
परीक्षा भवन से जुड़ा आधुनिक वज्रगृह (स्ट्रॉन्ग रूम) दोहरे उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। सामान्य दिनों में यहाँ बोर्ड व आयोगों की गोपनीय परीक्षा सामग्री रखी जाएगी। वहीं, आम चुनावों या विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन से जुड़ी संवेदनशील सामग्री के सुरक्षित भंडारण के लिए भी इस मजबूत सुरक्षा घेरे का उपयोग जिला प्रशासन कर सकेगा।
प्रशासनिक स्तर पर चिह्नित जिलों की सूची में पटना प्रमंडल से रोहतास, कैमूर, नालंदा, भोजपुर और बक्सर; मगध से नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद; तिरहुत से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, वैशाली; सारण से सीवान, गोपालगंज; कोसी से मधेपुरा, सुपौल; मुंगेर से शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, जमुई, खगड़िया; भागलपुर से बांका; पूर्णिया से किशनगंज, अररिया, कटिहार तथा दरभंगा प्रमंडल के मधुबनी और समस्तीपुर शामिल हैं। निर्माण पूर्ण होने की अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है।