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SOP FOR BIHAR PRIMARY TEACHER PDF

calendar_today Updated August 5, 2026

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Sop for Bihar Teachers in Primary School
बिहार शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 से 8 तक के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या के लिए नए मानक जारी किए हैं। छात्र-शिक्षक अनुपात के नए नियम और पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

updateUpdated on August 5, 2026

बिहार प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक मानक 2026 (Sop for Bihar Teacher in primary school) — पूरी जानकारी हिंदी में

बिहार शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों (कक्षा 1 से 8) में शिक्षकों की तैनाती को लेकर नया मानक तय किया गया है। यह कदम शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के नियमों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। विभाग ने अपनी पिछली समीक्षा में यह पाया था कि राज्य के कई स्कूलों में न्यूनतम मानक के अनुसार शिक्षक उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण यह नया निर्देश लागू किया गया है।

यह पत्र किसने जारी किया?

यह महत्वपूर्ण आदेश बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा निदेशक, विक्रम विरकर (IAS) द्वारा जारी किया गया है। इस पत्र की संचिका संख्या/पत्रांक 07/स्था०-01-02/2025 है और इसे 22 जून 2026 को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।

यह किसे संबोधित है?

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने यह पत्र बिहार के सभी जिला पदाधिकारियों (DM) और सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को सीधे भेजा है। इसके अलावा, इसकी प्रतिलिपि सभी क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशकों, जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों, उप विकास आयुक्तों और माननीय शिक्षा मंत्री के आप्त सचिव को भी सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

मुख्य निर्देश एवं नियम क्या हैं?

स्कूलों में बच्चों के नामांकन के आधार पर शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन करने के लिए कुछ स्पष्ट नियम बनाए गए हैं:

कक्षा 1 से 5 के लिए मानक

  • अगर स्कूल में 60 तक बच्चे पढ़ रहे हैं, तो वहां 2 शिक्षकों की नियुक्ति होगी।
  • 61 से 90 बच्चों पर 3 शिक्षक, 91 से 120 पर 4 शिक्षक, और 121 से 150 बच्चों पर 5 शिक्षक दिए जाएंगे।
  • 150 से अधिक छात्र होने पर 5 शिक्षकों के साथ 1 प्रधान शिक्षक भी होगा।
  • किसी भी स्थिति में एक शिक्षक पर 30 से ज़्यादा बच्चे नहीं होंगे (छात्र-शिक्षक अनुपात अधिकतम 30:1 रहेगा)।

कक्षा 6 से 8 के लिए मानक

  • छठी से आठवीं तक की हर कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक होना अनिवार्य है।
  • विषय के अनुसार: विज्ञान-गणित, सामाजिक अध्ययन, और भाषा (मुख्यतः हिन्दी) के लिए एक-एक शिक्षक ज़रूर होने चाहिए।
  • यदि बच्चों की संख्या 105 से 140 के बीच है, तो चौथे शिक्षक के रूप में अतिरिक्त अँग्रेजी विषय के शिक्षक को रखा जाएगा।
  • 140 से 175 छात्र होने पर पांचवें शिक्षक के रूप में संस्कृत या उर्दू के शिक्षक की नियुक्ति होगी। 175 से अधिक बच्चे होने पर इन्हीं नियमों के अनुसार आगे शिक्षक बढ़ाए जाएंगे।

प्रशासनिक व्यवस्था

  • कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को शिक्षकों की गिनती के लिए अलग-अलग शैक्षणिक इकाइयां माना जाएगा।
  • इसके बावजूद, प्रशासनिक कामों के लिए पूरे स्कूल का प्रबंधन एक ही प्रधानाध्यापक (Headmaster) के हाथ में रहेगा।

निष्कर्ष

इस पत्र का मुख्य उद्देश्य बिहार के स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को सुचारू बनाना है, ताकि हर विषय के लिए पर्याप्त शिक्षक मौजूद रहें। RTE और NEP के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात को दुरुस्त करके शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने का यह एक बड़ा कदम है।

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