गया में DPO पर ₹1.30 करोड़ की वसूली का आरोप, शिक्षा सेवकों ने किया हंगामा

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▪️गया में DPO सैयद तारिक सज्जाद पर 2,381 शिक्षा सेवकों से ₹5,500 प्रति व्यक्ति की दर से ₹1.30 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली का आरोप लगा है।
▪️DPO सैयद तारिक सज्जाद, शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज कर्मी और गया के DM।
▪️यह घटना गया (बिहार) का है।
▪️मुख्य आंकड़ा: 2,381 कर्मियों से ₹1,30,95,500 की कथित वसूली का दावा।
▪️संविदा कर्मियों ने आर्थिक शोषण और नौकरी से हटाने की धमकी के आरोप लगाए हैं।
▪️पीड़ितों ने DM से जांच और कार्रवाई की मांग की है, जबकि DPO ने आरोपों को निराधार बताया है।

Shiksha Sevaks protesting outside DPO office in Gaya over corruption allegations

महादलित और अल्पसंख्यक वर्ग के 2,381 शिक्षा सेवकों से नौकरी बचाने के नाम पर ₹5,500 प्रति व्यक्ति घूस लेने की शिकायत, DM से निष्पक्ष जांच की मांग।

बिहार के गया (Gayaji) जिले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO), माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता, सैयद तारिक सज्जाद पर 2,381 शिक्षा सेवकों से नौकरी बचाने के नाम पर ₹1.30 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज कर्मियों ने इस संबंध में जिला अधिकारी (DM) को एक सामूहिक आवेदन सौंपकर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है।

​इस भ्रष्टाचार के मामले को लेकर पीड़ित कर्मचारियों में भारी आक्रोश है, जिसके कारण करीब 100 की संख्या में कर्मियों ने DPO कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन और हंगामा भी किया।

​शिक्षा सेवकों ने लगाया ₹1.30 करोड़ की अवैध वसूली का आरोप

​सामूहिक आवेदन के अनुसार, विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत 2,381 शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज कर्मियों के बैंक खातों में मोबाइल आधारित उपस्थिति और शिक्षण सामग्री (TLM) खरीदने के लिए कुल ₹22,000 भेजे गए थे। इसमें से ₹10,000 मोबाइल के लिए और ₹12,000 सामग्री क्रय के लिए निर्धारित थे।

​पीड़ित कर्मियों का आरोप है कि इस राशि में से उनसे अवैध रूप से प्रति व्यक्ति ₹5,500 की कटौती यानी घूस की मांग की गई। विरोध करने पर उन्हें नौकरी से हटाने और विभागीय कार्रवाई करने की धमकी दी गई। इस सिंडिकेट के जरिए 2,381 कर्मियों से कुल 1 करोड़ 30 लाख 95 हजार 500 रुपये वसूल किए गए। इसके बदले कर्मियों को आश्वासन दिया गया था कि एक साल तक उनके केंद्रों का कोई मूल्यांकन या निरीक्षण नहीं किया जाएगा।

​सबूत मिटाने के लिए खुद बंद कर देते थे मोबाइल

​शिक्षा सेवकों ने अपनी शिकायत में अधिकारी की चालाकी की पोल खोलते हुए बताया कि लेन-देन की बातचीत के दौरान DPO स्वयं अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर देते थे, ताकि बातचीत का कोई भी ऑडियो या वीडियो गलती से रिकॉर्ड न हो सके। कर्मियों का आरोप है कि निरीक्षण के नाम पर एक शिक्षा सेवक के घर तक पहुंचकर पैसे मांगे गए।

​इस अवैध लेन-देन के बाद भी जब एक महीने के भीतर ही कई केंद्रों की जांच करा दी गई और कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगते हुए वेतन कटौती की चेतावनी दी गई, तो शिक्षा सेवकों का गुस्सा फूट पड़ा। करीब 100 की संख्या में कर्मी DPO कार्यालय पहुंचे और हंगामा किया। हालांकि, जब कर्मियों ने DPO से बात की, तो अधिकारी अपने बयान से पलट गए और कहा कि वे कुछ नहीं जानते, उन्हें बस सामग्री खरीद का वाउचर चाहिए।

​कमजोर तबके को निशाना बनाने का आरोप

​आंदोलन कर रहे कर्मियों ने आरोप लगाया है कि महादलित और अति पिछड़े मुस्लिम समुदाय (तालीमी मरकज) से जुड़े इन कर्मियों को कमजोर समझकर उनका मानसिक व आर्थिक शोषण किया जा रहा है। बार-बार नौकरी से हटाने की धमकी देकर उन्हें डराया जाता है। आंदोलनरत कर्मियों ने DM से इस पूरे सिंडिकेट की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

​डीपीओ सैयद तारिक सज्जाद ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

​दूसरी तरफ, आरोपी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता) सैयद तारिक सज्जाद ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

​”TLM खरीद के लिए आई राशि का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (उपयोगिता प्रमाण पत्र) शिक्षा सेवकों व तालीमी मरकज कर्मियों से मांगा जा रहा है। इसके लिए केंद्रों की जांच की जा रही है। इसी जांच के कारण उन लोगों द्वारा अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं,” DPO सैयद तारिक सज्जाद ने कहा।

​फिलहाल, इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक जांच रिपोर्ट या अंतिम फैसला आना बाकी है।

Sapana

verifiedEducational Writer

Expertise: B.Ed, M.Sc

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