auto_awesome AI Summary
▪️17 जून को बिहार कैबिनेट में नई ट्रांसफर नीति पेश होगी।
▪️20 से 25 जून तक शिक्षक ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे।
▪️26 से 30 जून के बीच पोस्टिंग प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी।
▪️1 जुलाई 2026 से शिक्षक नए स्कूलों में योगदान देंगे।
▪️विषयवार शिक्षक संतुलन के आधार पर ट्रांसफर किए जाएंगे।
▪️लगभग 5.80 लाख शिक्षक प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं।

बिहार में शिक्षक ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। शिक्षा विभाग 17 जून को नई ट्रांसफर नीति कैबिनेट में पेश करेगा, जबकि 1 जुलाई से शिक्षकों की नई स्कूलों में पदस्थापना शुरू कराने की तैयारी है।
बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया तेज कर दी है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग 17 जून को नई ट्रांसफर नीति को राज्य कैबिनेट के समक्ष पेश करेगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ट्रांसफर-पोस्टिंग की पूरी प्रक्रिया लगभग 14 दिनों में पूरी करने की योजना है, ताकि शिक्षक 1 जुलाई 2026 से नए विद्यालयों में योगदान देकर पढ़ाई शुरू कर सकें।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के लगभग 5.80 लाख शिक्षकों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। शिक्षकों को ट्रांसफर के लिए आवेदन करने का अवसर 20 जून से 25 जून तक दिया जाएगा।
ट्रांसफर के लिए क्या होगा शेड्यूल?
शिक्षा विभाग की तैयारी के मुताबिक, 20 से 25 जून तक शिक्षक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद विभाग स्कूलों में रिक्त पदों और विषयवार सीटों की जानकारी एकत्र करेगा। 26 जून से 30 जून के बीच शिक्षकों की नई पोस्टिंग और पदस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 से 20 जून के बीच नई नीति लागू करने से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
एक विषय में एक शिक्षक का सिद्धांत
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करने पर जोर दिया जाएगा। यदि किसी विद्यालय में किसी विषय के शिक्षक आवश्यकता से अधिक पाए जाते हैं, तो ऐसे शिक्षकों का स्थानांतरण दूसरे विद्यालयों में किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, कक्षा 1 से 5 तक 120 विद्यार्थियों पर 5 शिक्षकों तथा 121 से 150 विद्यार्थियों पर 6 शिक्षकों की पोस्टिंग का प्रावधान रखा गया है। वहीं, कक्षा 1 से 8 तक संचालित विद्यालयों में न्यूनतम 9 शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
अन्य राज्यों की नीतियों का भी किया गया अध्ययन
रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा सहित 11 राज्यों की शिक्षक ट्रांसफर नीतियों का अध्ययन किया है। इन राज्यों में पोस्टिंग, स्थानांतरण प्रक्रिया, जिला शिक्षा अधिकारियों की भूमिका और ट्रांसफर के बाद की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया गया।
इसके आधार पर बिहार की नई नीति तैयार की गई है, हालांकि अंतिम प्रावधान कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होंगे।
दो वर्षों से लंबित थी प्रक्रिया
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर पिछले दो वर्षों से काम चल रहा था। इस दौरान लगभग 1.80 लाख शिक्षकों का स्थानांतरण भी हुआ, लेकिन व्यापक स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी।
शिक्षकों की ओर से लंबे समय से गृह जिला या निकटवर्ती क्षेत्र में पदस्थापन की मांग उठाई जाती रही है। नई नीति से इस दिशा में कुछ स्पष्टता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
रिपोर्ट में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का बयान प्रकाशित है, जिसमें कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक और छात्रों के अनुपात के अनुसार ट्रांसफर-पोस्टिंग की जाएगी। जिन स्कूलों में एक विषय में अधिक शिक्षक होंगे, वहां से आवश्यकता वाले स्कूलों में स्थानांतरण किया जाएगा।
हालांकि नई नीति की अंतिम रूपरेखा और विस्तृत नियमों को लेकर आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है। कुछ प्रावधानों पर स्थिति अभी विकसित हो रही है और अंतिम पुष्टि कैबिनेट निर्णय के बाद ही होगी।